कुछ लक्षण जो बताते हैं कि आप पहले से ज्यादा मेच्योर हो गए हैं

1- जब कोई तारीफ करे तो बहुत खुशी न हो और अहंकार ना आये और जब कोई निंदा करे तो गुस्सा न आये बल्कि आप उस निंदा पर विचार करें और यह सोचें कि दूसरे ने ऐसा क्यों कहा।

2- जब दुख ज़्यादा दुख न लगे और खुशी में ज़्यादा खुशी न हो और जब आप ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव बिना परेशानी के झेल पाए और उसे कभी ईश्वर की मर्जी,तो कभी अपनी नियति जानकर एक्सेप्ट कर

3- जब आप फेसबुक, इंस्टाग्राम पर अपना ज्यादा समय बर्बाद ना करके अपने लक्ष्यों को अपना ज्यादा समय देने लगें।

4- जब आप अपने जज़्बातों को सोशल मीडिया पर शेयर ना करके उस व्यक्ति के साथ सुलझाने की कोशिश करते है , जिसके साथ आपका मन मुटाव हुआ है।

5- जब आप समझते है कि हर बार आप सही नहीं हो सकते और सामने वाले की पूरी बात सुनने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं |

6- जब आप अपनी गलतियों को मानते हैं और सामने वाले व्यक्ति की भावनाओं का सम्मान दिल से करते हैं।

7- जब आप अलविदा कहने की हिम्मत रखते हैं और समझते है कि कोई भी आपका साथ जीवन भर नहीं देगा और आपको अपना सफर अकेले ही तय करना है।

8- जब आप जिम्मेदारियों से मुँह नहीं मोड़ते हैं और जो जैसा है उसे वैसे ही स्वीकार करना सीख लेते हैं।

खुद से दोस्ती क्यों जरूरी है ?

हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है? यदि हमें इस प्रश्न का उत्तर खोजना है तो इसकी तलाश खुद के भीतर से ही प्रारंभ करनी होगी, खुद को समझ लेने के बाद ही संसार से प्राप्त ज्ञान का सही उपयोग हो पाता है अन्यथा यह ज्ञान खोखला ही साबित होता है जो सिर्फ हमारे भीतर अहंकार का ही पोषण करता है।

इससे पहले कि हम यह जानें कि हम क्या होगें, यह जान लेना जरूरी है कि हम क्या हैं? हम जो भी हैं उसे पहचानकर, समझकर ही उस भविष्य की रचना की जा सकती है जो अभी तक हमारे भीतर कहीं सो रहा है।

ज्ञान और जानकारी में फर्क है जो हमें अपने भीतर से, खुद को खोजने से, खुद के विषय में प्राप्त होता है वही ज्ञान है बाकी जो कुछ हम संसार से सीखते हैं वो जानकारी है। हममें से ज्यादातर लोगों के पास जानकारी तो बहुत है पर ज्ञान बहुत अल्प या नहीं के बराबर है।

ज्ञान प्राप्त करने की पहली शर्त खुद को जानने की है। यदि इस बिंदु पर अंधकार है तो सब जगह अंधेरा है। यदि यहां प्रकाश है तो सर्वत्र उजाला है।

google image
हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम स्वयं के प्रति उदासीन हैं। हम खुद के प्रति सजग नहीं हैं। चिराग तले अंधेरा वाली कहावत हमारे जीवन में सत्य सिद्ध हुई है। एेसे में यदि हमारी जीवन भटककर गलत दिशा में चला जाता है तो इसमें अचरज कैसा ?

खुद के प्रति अनजान बने रहने के कारण हमारी जिंदगी की स्थिति उस नाव की भांति है जिसका मांझी सो गया है फिर भी नाव किसी तरह, इधर-उधर लहरों के सहारे बही चली जा रही है।

खुद को जानना ही ज्ञान की पराकाष्ठा है। खुद को समझे बिना किसी और को समझने का मूल्य कुछ भी नहीं है। जो खुद से बेगाना है वह दूसरों से कितना भी घुल मिल जाए उसका कोई अर्थ नहीं है। स्वयं के अनुभव के बिना दूसरों से प्राप्त ज्ञान में हित कम अहित ज्यादा है।

आसान नहीं है खुद को जानना, बहुत कोशिश करनी पड़ती है पर जीवन को सार्थक बनाने की यह अनिवार्य शर्त है। आप भी खुद को समझने की कोशिश कीजिए, मैं भी कर रहा हूं।

जिंदगी में हम पैसों के पीछे भागने से खुद को कैसे रोक सकते हैं ?

जीवन में हम पैसोंं के पीछे जितना भागते हैं वह हमसे उतना ही दूर चला जाता है। पैसा जीवन में आवश्यक है लेकिन सब कुछ नहीं है।

पैसे के बिना जीवन सम्भव नहीं। आज के युग में ये मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। पैसा सब ज़रूरतें पूरी करने का माध्यम है। इंसान को आज की ही नहीं कल की भी चिंता होती है यहां तक कि समझदार जीव भी बुरे समय के लिए भोजन संचित करके रखते हैं।

पैसा भोजन की तरह होता है , हम सभी यह जानते हैं कि बिना भोजन के कोई भी जीवित नहीं रह सकता है। उसी तरीके से बिना पैसे के इस दुनिया में जीवित रहना बहुत मुश्किल है।

लेकिन यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है की जरूरत से ज्यादा खाना स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने की बजाय, स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है और इसीलिए हम अपने खाने पर नियंत्रण रखते हैं।

कल्पना कीजिए कि आपको किसी पार्टी में बुलाया गया है और वहां पर तरह- तरह के व्यंजन आपके सामने परोसे गए हैं और आप को इस खाने का कुछ भी पेमेंट नहीं करना है । ऐसी स्थिति में अक्सर खुद को रोक नहीं पाते हैं और जितना आपको खाना चाहिए उससे कई गुना ज्यादा आप खा लेते हैँ। यह जानते हुए भी कि जरूरत से ज्यादा खाना हमारे स्वयं के स्वास्थय के लिए हानिकारक है।

ठीक ऐसे ही, हम जब ऐसी पोजीशन में रहते हैं जहां पर हम पैसा कमा सकते हैं, चाहे वह गलत तरीके से हो या सही तरीके से हो, हम खुद को रोक नहीं पाते हैं।

इसी वजह से दुनिया में ज्यादातर लोग पैसे के पीछे भागते रहते हैं और कभी यह जानने की कोशिश नहीं करते की वह पैसा क्यों कमाना चाहते हैं और वह इस पैसे का क्या इस्तेमाल करेंगें?

रियल लाइफ में पैसा कमाना बहुत मुश्किल होता है। यदि आप बहुत सारा पैसा कमाना चाहते हैं तो आपको अपना समय, अपनी ऊर्जा और यहां तक कि अपना मानसिक संतुलन भी दांव पर लगाना पड़ता है।

बीत गया समय कभी भी वापस नहीं आता,खराब हुआ स्वास्थ्य भी कभी वापस नहीं आता है,जो रिश्ते हम खो देते हैं वह भी वापस नहीं आते हैं जो बुरे कर्म पैसा कमाने में हम करते हैं वह हमारा कभी पीछा नहीं छोड़ते हैं।

आपको सिर्फ इतना पैसा कमाना चाहिए जितना कि जरूरी हो, ताकि आपके पास में पर्याप्त समय और ऊर्जा हो जिससे कि आप अपने जीवन की और भी चीजें जो महत्वपूर्ण और मूल्यवान हैं उनको प्राप्त कर सकें।

किसी ने सच ही कहा है पैसा वह वस्तु है जिससे आप कितना भी कमा लो, कम ही लगता है।

कुछ एेसे काम जो दिखते तो सरल हैं पर होते मुश्किल हैं

1- किसी एेसे व्यक्ति को कुछ समझाने की कोशिश करना जो समझना ही नहीं चाहता है, किसी नासमझ व्यक्ति को समझाया जा सकता है परंतु अपने आप को बहुत अधिक समझदार समझने वाले व्यक्ति को समझाना बहुत मुश्किल काम है।

2- कभी-कभी दूर की चीजें ज्यादा साफ दिखती हैं और पास की चीजें धुंधली नजर आती हैं। इसी तरह हमें अपनी गलतियां नजर नहीं आती परंतु दूसरों की गलतियों पर उंगली उठाना बहुत आसान लगता है। खुद में गलतियां ढूढ़ पाना बहुत मुश्किल काम है।

3- खुद को जान लेना आवश्यक है ताकि भविष्य की एक मज़बूत नींव रखी जा सके। ये तभी सम्भव होगा जब आप प्रयोग करेंगे, कहीं सफल होंगे तो कहीं असफल और आपका यही अनुभव कारगर साबित होगा। खुद से रूबरू होना एक मुश्किल काम है।

4- जिम्मेदारी उठाना,क्योंकि जब आप जिम्मेदारी उठाते हैं तो आपसे कई सारे व्यक्ति जुड़े होते हैं जिनको आपसे उम्मीद होती है और आपके सामने उन उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होती है। इसलिए जिम्मेदारी उठाना एक मुश्किल काम है।

5- आगे बढ़ते रहना, आप एक सफलता से संतुष्ट नहीं हो सकते क्योंकि हर सफलता के साथ उम्मीद और बढ़ जाती है और चुनौती और भी बड़ी हो जाती है। इसलिए यह एक कठिन कार्य है।

6- किसी को हँसाना,दूसरों को हँसाना आसान नहीं है एक अच्छा सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत बड़ी चीज़ है। खुद का मज़ाक उड़ाने के लिए सच में जिगरा चाहिए होता है। इसलिए यह एक मुश्किल काम है।

7- दुःखी होते हुए भी मुस्कुराना, आंखों के नीचे के काले घेरे बताते हैं कि होठों पर जो मुस्कान है वह झूठी है।

8- दूसरों को सीख देना बहुत सरल है परन्तु अपने द्वारा दी गई शिक्षाओं का स्वयं अनुसरण करना बहुत मुश्किल काम है |

9- क्षमा मांगने के लिए हमे अपने अंदर के अहम को खत्म करना पड़ता है। क्षमा मांगने वाला इंसान रिश्तों की कदर करता है और किसी अपने को खोने से अच्छा हैं अपने अहम को खो देना इसलिए क्षमा मांगना एक मुश्किल काम है।

10- जीवन में सच्चाई और ईमानदारी के मार्ग पर चलना ,यह वास्तव में बहुत आसान लगता हैं परन्तु इस मार्ग पर चलना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। इसलिए यह एक कठिन काम है।

दोस्ती और प्रेम के बीच क्या अंतर है ?

1- दोस्ती में कोई वजह नहीं होती है, और प्रेम एक वजह बन कर रह जाता है क्योंकि दोस्ती को समझने की जरुरत नहीं होती है जबकि प्रेम में समझना बहुत आवश्यक हो जाता है।

2- प्रेम आत्मा है और दोस्ती शरीर और जब इन दोनों का मिलन होता है तो मजबूत रिश्तों का निर्माण होता है।

3- प्रेम मनुष्य को एकांत की और ले जाता है, दोस्ती उसे भीड़ की ओर क्योंकि प्रेम आपको विद्रोही बनाता है और दोस्ती आपको स्वच्छंद ।

4- प्रेमी कहता है, तुम्हें कुछ हुआ तो मैं ज़िंदा नहीं रहूँगा और दोस्त कहता है, जब तक मैं ज़िंदा हूँ, तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा।

5- मित्रता के लिए हमेशा ही किसी आलंबन की आवश्यकता होती है। किसी मित्र से कभी दुराव भी हो सकता है। मित्रता भी तभी तक है जब तक आपके ह्रदय में प्रेम है ।

6- प्रेम आप को लाचार बना सकता है पर दोस्ती आप को मजबूत बनाती है। प्रेम आंसुओं का कारण बन सकती है पर दोस्ती बारिश में भी आपके आँसू पहचान सकती है।

7- अगर प्रेम में मित्रता हो जाये तो अच्छी बात है पर यदि मित्रता में प्रेम हो जाये तो जिंदगी में फिर किसी और प्रेम की जरूरत ही नहीं पड़ती है।

8- प्रेम में दोनों पक्षों से उम्मीद रखी जाती है। पर दोस्ती बिना उम्मीद के भी चलती रहती है।

9- प्रेमी को दिल की बात समझनी पड़ती है और दोस्त अापके दिल की बात अपने आप समझ जातें हैं।

10- सैकड़ो अनकही उम्मीदों की वजह से प्रेम अक्सर दोस्ती की तुलना में कहीं ज़्यादा उलझाव भरा हो जाता है।

किसी व्यक्ति के लिए दुनिया में सबसे आसान काम क्या है ?

1- खुद की निजी परेशानियों पर ध्यान ना देकर अपनी कमियों का कुसूरवार दूसरों को ठहराना।

2- मोबाइल पर दिन भर बेवजह व्यस्त रहना और बिना मांगे दूसरों को मुफ्त में सलाह देते रहना।

3- माता -पिता के द्वारा दी गयीं सुख सुविधाओं का उपभोग करना और स्वयं के कंधों पर बोझ आने पर जिम्मेदारियों से भागना।

4- अपनी प्रशंसा स्वयं करना और दूसरों के कार्यों में हमेशा गलतियों को निकालना।

5- बात- बात पर झूठ बोलना और कार्य न करने के लिए लिये बहाने बनाना।

6- पहली मुलाकात के आधार पर किसी व्यक्ति के लिए धारणा बना लेना और एक तरफ़ा प्रेम में पड़कर खुद को बर्बाद कर लेना।

7- किये हुए वादे तोड़ देना और अपनी गलतियों के लिए किसी और को ज़िम्मेदार ठहराकर कहीं का गुस्सा कहीं और उतारना।

8- बिना कुछ जाने बिना कुछ समझे बड़ी आसानी से दूसरों को अपने आइने से तोल लेना और उसी हिसाब से दूसरों को उपदेश देते रहना।

9- नियमों को तोड़ना, चलता है कहकर चुप हो जाना और हर काम के लिए सरकार को दोष देना।

10- लोगों को नीचा दिखाने हेतु, उनके आत्मविश्वास पर हमला करना, बेवजह उन्हें कटु शब्दों से अपमानित करना।

11- किसी को गलत राय देकर दूसरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करना।

जानिए अपने अवचेतन मन की ताकत को

अवचेतन मन जिसे अंग्रेजी में subconscious mind कहा जाता है, यह वह मानसिक स्तर है जो न ही पूर्णतः चेतन होता है ना ही पूर्णतः अचेतन। हमारे अवचेतन मन में जो भी विचार होते है वे चेतन स्तर पर नहीं कार्यरत होते हैं फिर भी वह हमारे व्यवहार को प्रभावित कर रहे होते हैं।

हमारी जो आदतें हैं वो बिना चेतन के अधिक प्रयास के स्वयं संचालित होती हैं। आप गाड़ी चलाने में परफेक्ट है तो अब आपको गाड़ी के गियर बदलने में अधिक प्रयास नहीं करना पडता, आप बातें करते हुए भी आसानी से गाड़ी चला पाते हैं या कहें चीजें आटोमेटिक होने लगती है क्योंकि यह आपके अवचेतन मन में होती है।

जब हम बच्चों को पहली बार चलना या फिर थोड़े बड़े होकर लिखना सिखाते हैं तो वे पहली बार डर कर चलते हैं इसी प्रकार लिखना भी सीखते समय पहले मुश्किल लगता है फिर धीरे धीरे ये सब उनके अचेतन मन में store हो जाता है तो अंगुलियों स्वतः ही लिखने लगती हैं।

फ्रायड ने मन को तीन हिस्सों में बांटा है- चेतन, अवचेतन तथा अचेतन। अवचेतन मन हमारे मन का एक बड़ा हिस्सा है, यह चेतन व अचेतन के बीच पुल का कार्य करता है। अवचेतन मन को अत्यधिक शक्तिशाली भी बताया गया है। माना जाता है अगर आप अपने अवचेतन मन को कंट्रोल कर पाते हैं तो आप कुछ भी कर सकते हैं।

अवचेतन मन को जगाना बहुत मुश्किल नहीं है इसके लिए आपको शुरुआत में अपने विचारों को संयमित करना होगा और विचारों की सकारात्मकता के प्रति सजग बने रहना होगा, बिल्कुल उसी तरह जिस तरह आप पहली बार साइकिल चलाते समय सजग और सावधान बने रहे थे क्योंकि आप जानते थे कि ज़रा सा ध्यान हटा तो आप साइकिल से गिर जाएंगे और आपको चोट लग जायेगी।

इसी तरह आपके विचारों में ज़रा सी भी नकारात्मकता आने लगी तो आपके यही विचार अवचेतन मन में स्थायी हो जायेंगे और आपका अवचेतन मन इन्हें सच करने में जुट जाएगा और इन निगेटिव विचारों के परिणाम अच्छे नहीं निकलेंगे।

कोई भी बात या कार्य दोहराते रहने से, अवचेतन मन का हिस्सा बन जाता है। इसका अर्थ ये हुआ कि आप अपने जीवन में जिस तरह के सुधार या बदलाव चाहते हैं, जिस स्तर की सफलता हासिल करना चाहते, उन्हें अपने मन में दोहराते रहिये और ऐसा करते समय ध्यान रखिये कि शक्तिशाली विचार ही अवचेतन मन में अपनी जगह बना सकता है इसलिए विचार का दृढ़ होना बेहद ज़रूरी है।

पूरे यकीन के साथ स्पष्ट तरीके से दोहराया गया विचार निश्चित रूप से सच का रूप ले लेगा क्योंकि ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जिसे पूरा करना अवचेतन मन की सामर्थ्य से बाहर हो।

जीवन के बारे में लोगों की सबसे बड़ी गलतफ़हमी क्या है?

1- मैं तुम्हारे बिना जी नहीं पाउँगा। हमे ऐसे लगता है कि हम अपने प्रेमी के बिना कभी नहीं जी पाएंगे पर वास्तव में जीवन किसी के लिए भी नहीं रुकता,कोई हो या ना हो, जीवन हमेेशा चलता रहता है।

2- मै सही हूँ बाकी दुनिया गलत है और मैं सब कुछ जानता हूँ दूसरे कुछ भी नही जानते हैं ,यह जीवन की सबसे बड़ी गलतफ़हमी है।

3- मेरे पास अच्छा परिवार है,बंगले हैं,गाडियाँ हैं,मुझे किस चीज की कमी है? इस घमंड में कई लोग अपने से नीचे आर्थिक स्तर के व्यक्ति को अपने से तुच्छ समझते हैं।

4- लोग सोचते हैं कोई बीमारी या दुर्घटना हो भी गई तो मेरे पास उससे निपटने के लिए कई साधन हैं पर समय का ऊँट किस करवट बैठेगा,यह किसी को पता नहीं होता।

5- हम समझते हैं कि अन्य और बहुत सी चीजों की तरह कल के बारे में भी पूर्वानुमान किया जा सकता है जबकि वास्तविकता यह है कि कोई भी नहीं जानता है कि अगले पल क्या होने वाला है।

6- हम समझते हैं कि मैनें जो किया, उसे किसी ने नही देखा लोग कर्म के नियम को हमेशा भूल जाते है। जबकि कर्म का नियम हर समय हर जगह लागू होता है। आप अपने कर्मो से भाग नही सकते हैं।

7- मुझे किसी की जरूरत नहीं है,मै अकेले जिंदगी गुजार लूँगा। हर किसी को कभी ना कभी किसी ना किसी की जरूरत पड़ती ही है परंतु ऐसा देखा गया है कि थोड़े से मतभेद के कारण लोग एक दूसरे का साथ हमेशा के लिए छोड़ देते हैं, ऐसा कहकर कि तुम्हारी मुझे कोई जरूरत नहीं है।

8- पैसे कमाने के बाद सारा तनाव दूर हो जाएगा जिनके पास पैसों की कोई कमी नही है, वो लोग बहुत खुश हैं और दुनिया की सारी परेशानी मेरे पास ही है ।

9- यह मानना कि जीवन में सबसे अच्छी चीजें हमेशा महंगी होती हैं और अमीर लोग आम तौर पर खुश होते हैं।

10- यह मानना कि अपने सपनों को जीने और उन्हें पूरा करने के लिए हमारे पास बहुत समय है।

हमारी कुछ आदतें जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं

1- हर घंटे अपने फेसबुक और व्हाट्सएप पर अपनी प्रोफ़ाइल पिक्चर और स्टेटस को बदलते रहना।

2- बिना व्यवधान के प्रतिदिन टीवी सीरियल देखना और सोशल मीडिया एवं फेसबुक फ़ीड्स को स्क्रॉल करने में अपना ज्यादातर समय व्यतीत करना।

3- जब आप नियमित कार्यों को पूरा करने में बहुत अधिक समय बिताते हैं और आफिस में दिए गए कार्यों को में में बोरिंग और असंतुष्ट महसूस करते हैं।

4- जब आप बिना किसी उद्देश्य के सुबह देर से जागते हैं और जागने के बाद सबसे पहला काम अपने मोबाइल के नोटिफिकेशन को जांचने का करते हैं।

5- जब आप हमेशा दूसरों को प्रभावित करने की और हर काम में उनकी सहमति पाने की कोशिश करते हैं।

6- यदि आप अतीत में जी रहे हैं और अतीत की यादें अभी भी आपको परेशान करती हैं।

7- जब आप प्रत्येक विफलता के लिए बहाने बनाते रहते हैं और कड़ी मेहनत के बजाय भाग्य पर बहुत अधिक निर्भर रहते हैं।

8- जब आप वास्तविकता से दूर भागते हैं और अपनी खुद की मान्यताओं और भ्रम की दुनिया में जीते हैं।

9- जब आपके पास भविष्य के लिए कोई योजना नहीं होती है और आप उन लोगों के साथ बहुत अधिक समय बिताते हैं जो आपके विकास में कोई योगदान नहीं देते हैं।

10- जब आप इस अफसोस के साथ बिस्तर पर सोने जाते हैं कि मैंने आज एक और दिन बर्बाद कर दिया।

आपके जीवन ने अब तक आपको क्या सिखाया है ?

1- यह सिखाया कि हमें अक्ल बादाम खाने से नहीं आती बल्कि ठोकरें खाने से आती है। जिंदगी में आप जितनी ज्यादा ठोकरें खाते हैं, अक्सर उसी अनुपात में समझदार और मजबूत बनते जाते हैं।

2- यह सिखाया कि कुछ व्यक्ति हमारे जीवन मे सिर्फ अपना काम निकालने के लिए आते हैं। उन्हें आपकी कोई चिंता नहीं होती है, ऐसे लोगों के लिए अपना समय और प्यार दोनों बर्बाद नहीं करना चाहिए।

3- यह सिखाया कि अगर हमारे साथ कभी कुछ गलत हो रहा है तो डरना नहीं चाहिए बल्कि बेझिझक आवाज़ उठानी चाहिए क्योंकि अपने हक़ के लिए खुद ही लड़ना पड़ता है।

4- यह सिखाया कि जिंदगी में समस्याएं सबके साथ हैं। कोई इनको पाकर बिखर जाता है तो कोई निखर जाता है,हंसने वाले के साथ सारी दुनिया हंसती है पर रोने वाले के साथ कोई नहीं रोता है।

5- यह सिखाया कि जिंदगी में अपनी खुशी का कारण किसी दूसरे को मत बनाइये, जो खुशी दूसरे पर निर्भर होती है वह कभी स्थाई नहीं हो सकती है।

6- यह सिखाया कि जिंदगी में किताब से अच्छा दोस्त और कोई नहीं होता और किसी का घमंड हमेशा के लिए नहीं रहता है वह कभी न कभी चूर होता ही है।

7- यह सिखाया कि जिंदगी में किसी भी चीज़ का अंत हमे एक नया अवसर देता है, एक नयी शुरुआत का मौका देता हैजहाँ से हम अपने जीवन की दिशा बदल सकते है और एक नयी उड़ान भर सकते हैं।

8- यह सिखाया कि जिंदगी में हमें हदें पार नहीं करनी चाहिए, यदि हम हद में रहेंगे तो सब संतुलित रहेगा और हमारी मनोस्थिति भी संतुलित रहेगी।

9- यह सिखाया कि जीवन में आपकी समस्याएं केवल आपकी हैं, लोग कुछ समय के लिए आपको सहानुभूति दे सकते हैं पर इससे दुनिया को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता है|

10- यह सिखाया कि हमारे आने से पहले भी दुनिया थी और हमारे जाने के बाद भी दुनिया रहेगी। हमारे जाने के बाद लोग हमें उतना ही याद करेंगे, जितना कि एक पन्ना मिटे हुए अक्षर को याद रखता है।