जीवन में आत्मसम्मान का होना क्यों जरूरी है

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Binary option methods time measurement begin एक भिखारी एक स्टेशन पर कटोरा लेकर बैठा हुआ था उसके पास में एक बांसुरी भी ऱखी हुई थी। लोग आते और उनमें से कुछ रूक कर कटोरे में पैसा डालकर आगे बढ़ जाते। एक युवा व्यवसायी उधर से गुजरा और उसने कटोरे मे 50 रूपये डाल दिये, उसके बाद वह ट्रेन मे बैठ गया। ट्रेन चलने ही वाली थी वह कि वह व्यवसायी एकाएक ट्रेन से उतर कर भिखारी के पास लौटा और बांसुरी उठा कर बोला, “मै कुछ धुन सुनूंगा। तुम्हारी बांसुरी की धुनों की कुछ कीमत है, आखिरकार तुम भी एक व्यापारी हो और मै भी।” उसके बाद वह युवा तेजी से ट्रेन मे चढ़ गया।

rencontre en ligne gratuit sans abonnement कुछ वर्षों बाद, वह युवा व्यवसायी एक बिजनेस समारोह में हिस्सा लेने दूसरे शहर गया। उस समारोह में वह भिखारी भी मौजूद था। भिखारी ने उस व्यवसायी को देखते ही पहचान लिया, वह उसके पास जाकर बोला- आप शायद मुझे नही पहचान रहे है, लेकिन मै आपको पहचानता हूँ। उसके बाद उसने उसके साथ घटी उस घटना का जिक्र किया। व्यवसायी ने कहा- तुम्हारे याद दिलाने पर मुझे याद आ रहा है कि तुम स्टेशन पर भीख मांग रहे थे। लेकिन तुम यहाँ सूट और टाई मे क्या कर रहे हो?

http://docimages.fi/?dereter=bin%C3%A4re-optionen-chartanalyse&abd=a5 भिखारी ने जवाब दिया, आपको शायद मालूम नही है कि आपने मेरे लिए उस दिन क्या किया। मुझे पर दया करने की बजाय आप मेरे साथ सम्मान के साथ पेश आये। आपने मेरी बांसुरी उठाकर कहा कि मेरी धुनों की कुछ कीमत है, आपके जाने के बाद मैँने बहूत सोचा, मै यहाँ क्या कर रहा हूँ? मै भीख क्योँ माँग रहा हूँ? मैने अपनी जिदगी को सँवारने के लिये कुछ अच्छा काम करने का फैसला लिया। मैने अपनी बांसुरी उठायी और घूम-घूम कर अपनी प्रस्तुति देने लगा। धीरे -धीरे मेरी मेहनत रंग लायी, पारखी लोगों की नजर मुझ पर पड़ी और मुझे अच्छा काम मिलने लगा। आज मैं यहां इस समारोह में अपनी प्रस्तुति देने आया हूँ।

click मुझे मेरा सम्मान लौटाने के लिये मै आपका तहेदिल से धन्यवाद क्योंकि उस घटना ने मेरी जिंदगी को ही बदल दिया।

enter आप अपने बारे मे क्या सोचते है? खुद के लिये आप स्वयं क्या राय रखते हैं ? इन सारी चीजो को ही हम अप्रत्यक्ष रूप से आत्मसम्मान कहते हैं। दुसरे लोग हमारे बारे मे क्या सोचते है ये बाते उतनी मायने नहीँ रखती लेकिन आप अपने बारे में क्या सोचते हैं ये बात बहूत मायने रखती है।

the real free dating sites यह बात सत्य है कि हम अपने बारे मे जो भी सोचते हैँ, उसका एहसास जाने अनजाने मे दुसरो को भी करा ही देते हैं और इसमे कोई भी शक नही कि इसी कारण की वजह से दूसरे लोग भी हमारे साथ उसी ढंग से पेश आते हैं।

https://www.tuseguro.com/kambjasie/1810 आत्म-सम्मान ही वह वजह है जिससे हमारे अंदर प्रेरणा पैदा होती है। इसलिए आवश्यक है कि हम अपने बारे मे एक बेहतर राय बनाएं और आत्मसम्मान के साथ जीवन जिएं।

हमारे जीवन के कुछ कठोर सच क्या हैं

1- अभी वर्तमान में आप जो जीवन जी रहे हैं वह कई लोगों के लिए एक सपना है। हर किसी के पास अपने जीवन का गुजारा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। हर किसी के पास परिवार और मित्र नहीं हैं जो उनकी परवाह करते हों। हमारे देश में बहुत सारे लोग हैं जो अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करते हैं।

2- हम चीजों को वैसे नहीं देखते हैं जैसी वे हैं बल्कि हम चीजें को वैसे देखते हैं जैसे हम हैं। सब कुछ हमारी धारणा पर निर्भर करता है। एक ही चीज किसी के लिए सुख तो किसी के लिए दुख का कारण बनती है।

3- जीवन में दूसरों को सलाह देना आसान है पर किसी को विपरीत स्थिति से बाहर निकलने में मदद करना मुश्किल है। किसी को मुश्किल परिस्थितियों से निकालने के लिए सलाह से अधिक भी बहुत कुछ करना पड़ता है।

4- जीवन में सब-कुछ फेयर नहीं होता। यदि आप किसी चीज़ में अच्छे हैं तो हमेशा आपसे भी बेहतर कोई जरूर होगा। इस सत्य को स्वीकार कीजिए और इसके साथ जीना सीखिये।

5- यह दुनिया स्वार्थी है। अधिकांश लोग केवल उसमें रुचि रखते हैं जो वह आपसे प्राप्त कर सकते हैं या फिर जिससे किसी भी तरह से लाभ उठा सकते हैं।

6- आपका बाहरी पर्सनाल्टी बहुत महत्वपूर्ण है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अंदर से कितने अच्छे हैं। चाहे आपके रिश्तेदार हों या फिर आफिस के सहयोगी, लोग आपको आपके बाहरी व्यक्तित्व के आधार पर जज करेंगे।

7- लोग आपको अपनी प्राथमिकता सूची में बदलते रहते हैं । समय, दूरियां और परिस्थितियां लोगों को प्रभावित करती हैं। इस बात को हम दिल पर ले सकते हैं, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, यह जीवन है जहां सब-कुछ परिवर्तनशील है।

8- आप अपने जीवन के सबसे कठिन समय में अकेले होंगे और यह समय आपको बुद्धिमान, परिपक्व और निडर बना देगा।

9- कुछ भी हमेशा के लिए रहता है आपकी समस्याएं, आपके आस-पास के लोग, आपका काम, नए रिश्ते सब कुछ किसी न किसी दिन खत्म हो जाएगा।

10- जिंदगी में अक्सर आपका दिमाग क्या सोचता है और आपका दिल क्या चाहता है, वह पूरी तरह से अलग हो सकता है।

सोशल साइक्लोजी के कुछ रोचक तथ्य क्या हैं

1- अपनी आवाज ऊंची मत कीजिए बल्कि अपना तर्क सुधारिए। किसी बहस में सफल होने का सबसे शक्तिशाली तरीका सही प्रश्न पूछना है। यह लोगों को उनके तर्क में त्रुटियों को देखने पर मजबूर कर देता है।

2- लोग आम तौर पर ऐसी चीजों की तलाश करते हैं जो उनकी मौजूदा मान्यताओं की पुष्टि करती है और उन जानकारियों को अनदेखा करते हैं जो उनकी सोच के विपरीत हैं। समाजिक मनोविज्ञान में इसे उम्मीद की पुष्टि के रूप में जाना जाता है।

3- अन्य लोगों की उपस्थिति हमारे व्यवहार पर शक्तिशाली प्रभाव डालती है। जब लोगों को पता होता है कि उन्हें देखा जा रहा है, तो वे बेहतर व्यवहार करते हैं। यहां तक कि दूसरों द्वारा देखे जाने का भ्रम भी लोगों को बेहतर व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है।

4- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार एेसे लोग जो सार्वजनिक स्थानों या भीड़ भरी जगहों पर घूमते समय अपनी जेब में हाथ डाले रखना पसंद करते हैं वे आम तौर पर अंतर्मुखी या शर्मीले होते हैं।

5- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार शर्मीले और अन्तरमुखी स्वभाव के लोगों के पास दूसरों को आब्जर्व करने का महान कौशल होता है, जिसके कारण किसी समस्या के मूल को पहचानने में वे दूसरों की तुलना में अधिक कुशल होते हैं।

6- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार हम सफल और अमीर लोगों को अधिक समझदार और बुद्धिमान मानते हैं और इसके विपरीत को भी सच समझते हैं।

7- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार दूसरों से हमारी उम्मीदें इस बात को प्रभावित करती हैं कि हम दूसरों को कैसे देखते हैं और सोचते हैं कि उन्हें कैसे व्यवहार करना चाहिए।

8- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार दूसरों के बारे में कोई व्यक्ति आपसे क्या बोलता है उस पर ध्यान दीजिए क्योंकि दूसरोंं से वह आपके बारे में ठीक वैसे ही बात करेंगे।

9- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार दूसरों की आकर्षक वेशभूषा और व्यवहार आपको आसानी से भ्रमित कर सकता है क्योंकि आमतौर पर लोग ईमानदारी से अधिक भरोसा वाह्य वेशभूषा और बातों पर करते हैं।

10- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार सोशल मीडिया पर दूसरों की पोस्ट की गयी तस्वीरों को देखने से लोग को उदास महसूस होता है क्योंकि इससे उन्हें विश्वास होता है कि उनके मित्र और परिवार के लोग उनसे ज्यादा खुश हैं। हालांकि तथ्य यह है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले लोग भी ऐसा ही महसूस करते हैं।

जिन्दगी में हर बार दूसरा मौका नहीं मिलता

अजय कपूर एक बेहतरीन वेब डिजाइनर हैं। उनके क्लाइंट्स उनके काम के मुरीद हैं। उनके पास काम की कोई कमी नहीं है। वह स्वस्थ और सुखी जीवन जी रहे हैं। पर कुछ वर्षों पहले तक उनके जीवन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था वह पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों मोर्चों पर संघर्ष कर रहे थे।

आज से पांच साल पहले की रविवार की उस सुबह को वो कभी भी नहीं भूल सकते जब सुबह के वक्त वो अपने चार वर्ष के बेटे अर्जुन के साथ घर के बाहर लान में फुटबाल खेल रहे थे। गेंद के पीछे भागते हुए अचानक उन्होंने महसूस किया कि वो बुरी तरह हाफं रहे हैं। उनकी सांसें उखड़ रहीं थीं और चेहरा लाल हो गया था। वह बुरी तरह खांस रहे थे।

अजय कपूर की एक बुरी आदत थी जो उनकी सभी अच्छाईयों पर भारी पड़ रही थी। उन्हें धूम्रपान की लत थी। एक दिन में 10-15 सिगरेट पी जाना उनके लिए सामान्य सी बात थी। उनके दिन की शुरुआत सुबह की चाय और सिगरेट के साथ होती थी और अौर अंत रात के खाने के बाद सिगरेट से होता था। इस आदत की शुरुआत कई वर्षों पहले कालेज के समय से हुई थी जब उन्होंने दोस्तों के कहने पर शौक में सिगरेट पीना शुरू किया था। शुरुआत में वो सामान्य सिगरेट पीते थे और अब डिजाइनर सिगरेट पीने लगे थे। उनका यह शौक कब गंभीर लत में बदल गया इसका स्वयं उन्हें भी पता नहीं था।

अजय कपूर की हालत तेजी से बिगड़ती जा रही थी। अब वह जमीन पर गिर गये थे उनकी पत्नी उनके सीने को और उनकी मां उनके पैरों के तलवों को जोर जोर से मल रहीं थीं। उनकी चेतना तेजी से लुप्त होती जा रही थी। थोड़ी ही देर में एम्बुलेंस आ गयी और उन्हें समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया गया था। उन्हें दिल का गंभीर दौरा पड़ा था जिसका मुख्य कारण डाक्टर ने अत्यधिक सिगरेट और शराब का सेवन बताया था। उनकी बायोप्सी भी की गई थी जिसकी रिपोर्ट में कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों की पुष्टि हुई थी।

अजय अस्पताल के अपने बिस्तर पर शांत लेटे हुए थे। उनकी मुख मुद्रा गंभीर थी उनकी आखें खिड़की के बाहर शून्य में कुछ तलाश रहीं थीं। आज उनका दिल उनसे कुछ कह रहा था एेसा नहीं था कि उनका दिल पहले कुछ नहीं कहता था वो पहले भी उनसे बात करता था पर उनके जीवन में इतना कोलाहल था कि उसकी आवाज उन तक नहीं पहुंच पाती थी। उन्हें याद आ रहा था कि उनकी मां और पत्नी ने न जाने कितनी बार उनसे इस बुरी आदत को छोड़ देने को कहा था पर हर बार उन्होंने उनकी बातों को धुएं में उड़ा दिया था। पहले उन्होंने सिगरेट को पिया था और अब सिगरेट उन्हें पी रही थी।

अजय को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी और वो अपने घर वापस आ गए थे पर उनकी समस्याएं अभी समाप्त नहीं हुईं थीं। उन्हें अभी एक लम्बी लड़ाई लड़नी थी और यह लड़ाई उनकी खुद से थी। वर्षों से जमी हुई आदतें यूं ही नहीं जाती हैं। इंसान का मन बार बार सही गलत कुछ भी लॉजिक देकर उन आदतों के पास वापस लौट जाना चाहता है। इन्हें उखाड़ फेंकने के लिए आवश्यकता होती है दृढ़ इच्छाशक्ति और मनोबल की जो लगातार अभ्यास और संयम से आता है।

कहते हैं इंसान को वक्त सब कुछ सिखा देता है। अजय कपूर को भी वक्त ने सिखा दिया। बीते वक्त की परिस्थितियों और मुश्किलों ने उन्हें मजबूत बना दिया था। लंबे समय तक उन्होंने खुद से संघर्ष किया और अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इस बुरी आदत से छुटकारा पा लिया।
सौभाग्यशाली थे अजय कपूर जो समय रहते संभल गए और मौत के मुंह से बाहर निकल आए। यदि आप में भी कोई एेसी बुरी आदत है तो उसे अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और मनोबल के सहारे उखाड़ फेंकिये। याद रखिए जिन्दगी में हर किसी को दूसरा मौका नहीं मिलता, हर कोई अजय कपूर की तरह भाग्यशाली नहीं होता।

गुरू-पूर्णिमा विशेष- बिन गुरु जीवन सूना है

कुछ दिनों बाद गुरू-पूर्णिमा है । भारतीय संस्कृति में गुरू की बड़ी महिमा बतायी गयी है। गुरु का जीवन में स्थान महत्वपूर्ण है। गुरु ही वह व्यक्ति है जो जीवन की उलझी हुई राहों में भटकते हुए व्यक्ति का मार्गदर्शन कर उसे लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं।

मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक, जिदंगी के हर पड़ाव पर उसे एेसे व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है जो उसका मार्गदर्शन करें और जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाए। किसी शिशु के लिए उसकी मां ही प्रथम गुरु है उसके बाद के जीवन अनेकों व्यक्ति कभी शिक्षक, कभी कोच, कभी मेटंर आदि के अनेक रूप में आकर व्यक्ति का मार्गदर्शन करते हैं और गुरु की भूमिका निभाते हैं।

गुरु का कार्य है मनुष्य को रास्ता दिखाना, आध्यात्मिक विचारधारा के अनुसार अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को गुरु कहा जाता है। शास्त्रों में गुरु की तुलना ईश्वर से कही गई है। सच्चे गुरु की प्राप्ति दुरूह है, सच्चे गुरु आसानी से नहीं मिलते हैं बल्कि गुरु की प्राप्ति के लिए शिष्य को अपनी पात्रता सिद्ध करनी पड़ती है। सच्चे गुरु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है।

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक पारिवारिक और साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं।

यह दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे उन्हें आधिकारिक भी कहा जाता है, उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है।

भारत वर्ष में गुरू पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन हर एक शिष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार अपने गुरु को दक्षिणा देता है और गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है।

आज के दिन स्कूल और विद्यालयों में यह दिन गुरू को सम्मानित करने का होता है। मन्दिरों में भी पूजा की जाती है, पवित्र नदियों में लोग स्नान करते हैं, जगह जगह भंडारे होते हैं का आयोजन किया जाता है। यह पर्व है अपने गुरु के स्मरण का, हमारे जीवन में उनके योगदान उन्हें धन्यवाद देने का और गुरु के बताए हुए रास्ते पर चलने का।

जो बीत गई सो बात गई

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि व्यक्ति किसी घटना को लगातार और लंबे समय तक याद करता रहता है तो वह दीर्घकालीन स्मृति में परिवर्तित होकर अवचेतन मन में चली जाती है

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इन्सान अपने अतीत की सुखद घटनाओं के स्थान पर दुखद एवं पीड़ित करने वाले क्षणों को अधिक याद करता है। हमारे साथ किसने अच्छा किया है वह याद नहीं रहता जितना कि हमारे साथ बुरा हुआ है वह याद रहता है।

बीते हुए कल की कड़वी यादें हमारा पीछा आसानी से नहीं छोड़ती हैं। ये यादें हमें पीड़ा देती हैं और परेशान करती रहती हैं। बीते हुए कल के दुखद क्षणों को याद करते-करते हम वर्तमान में अपने संबंधों को भी अनजाने में ही प्रभावित करते रहते हैं।

हम कोशिश तो बहुत करते हैं पर ये यादें हमें पीछे खींचती रहती हैं। हम रहते तो आज में हैं पर जीते उस बीते हुए कल के साथ हैं जिसकी यादें हमारे मन-मस्तिष्क को कुरेदती रहती हैं।

वर्तमान और अतीत की इस कशमकश में हमारा मन तनाव, ग्लानि और क्रोध से भर जाता है जिसका हमारे संबंध एवं कार्यक्षमता दोनों पर बुरा असर पड़ता है।

जब हम दर्द भरी दुखद घटनाओं को याद करते हैं तो हमारे शरीर में जैव रासायनिक क्रियाओं में वृद्धि हो जाती है। जिसके कारण अनेक हार्मोन का स्राव होता है इनमें से कुछ क्रियाएं और हार्मोन शरीर और मन के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं और इनका मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

बीते हुए कल की कड़वाहट से बचने का सबसे बढ़िया तरीका खुद को अपनी रूचि के अनुसार किसी अच्छे कार्य में मनोयोग पूर्वक लगाए रखना है।

अतीत की कडुआहट से बचने के लिए हमें वर्तमान में जीने का प्रयास करना चाहिए। जो वर्तमान को संभाल लेता है, वह अतीत की भूलों से सीख लेकर अपने भविष्य को संवार लेता है।

जिंदगी बड़ी बहुमूल्य एवं बेहद खूबसूरत है,उसे केवल वर्तमान के पलों एवं क्षणों से सजाया और संवारा जा सकता है।

यदि भविष्य को सँवारना हो तो अतीत को गुजर जाने दीजिए।

हमारा वह व्यवहार जो लोगों को हमसे दूर कर देता है

1- नकारात्मक सोच, जब आप हर बार चीजों के सकारात्मक पक्ष को देखने से इन्कार करते हैं और लोगों से केवल संभावित नकारात्मक नतीजों के बारे में बात करते हैं, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

2- हीन भावना, जब आप मानते हैं कि आपका अपने जीवन पर कोई नियंत्रण या प्रभाव नहीं है और आप लगातार बिना किसी स्पष्ट वजह के हर चीज के लिए खुद को दोष देते हैं, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

3- अति संवेदनशीलता, जब आप मानते हैं कि जिंदगी में घटने वाली हर घटना का सीधा संबंध आपसे है और हमेशा उस पर विचार करने में अपना और दूसरों का समय और ऊर्जा बर्बाद करते हैं, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

4- उपेक्षा, जब आपमें दूसरों के प्रति सहानुभूति, चिंता एवं करुणा का आभाव होता है और आप उनकी भावनाओं पर ध्यान न देकर उनकी उपेक्षा करते हैं, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

5- अत्यधिक प्रतिक्रिया, जब आप परिस्थितियों में आवश्यकता से अधिक प्रतिक्रिया करते हैं और लोगों के बीच अपनी भावनाओं विशेष रूप से क्रोध को काबू करने में असफल होते हैं, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

6- हर्ट फील करना, जब आप बहुत जल्दी और बात-बात में हर्ट फील करते हैं, भले ही लोगों ने जानबूझकर या अनजाने में कुछ भी नहीं कहा या किया हो,तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

7- दूसरों को दोष देना,जब आप अपने जीवन की हर समस्या के लिए दूसरों को दोष देते हैं और यह मानते हैं कि सबकुछ किसी और की गलती है, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

8-अपनी सच्चाई छिपाना, जब आप दूसरों से अपनी सच्चाई छिपाते हैं और अपने व्यक्तित्व को दूसरों के सामने नहीं आने देते तो तो लोग आपसे पूरी तरह जुड़ नहीं पाते हैं, आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

जीवन के कुछ महत्वपूर्ण सबक क्या हैं जिन्हें जिंदगी ने अब तक सिखाया है

1- आपके माता-पिता ही वह शख्स हैं जो आपको सारा जीवन समान रूप से प्रेम करते रहेंगें, भले ही आप कितनी गलतियां भी करते हों या फिर उनका अपमान करते हों।

2- जीवन अप्रत्याशित है। चीजें हमेशा वैसी नहीं होती हैं जैसी कि हमने योजना बनाई है। जीवन में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कीजिए और अप्रत्याशित परिणामों के लिए तैयार रहिये।

3- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने अच्छे हैं, लोग हमेशा आपको अपने नजरिये के अनुसार जज करेंगे और लोगों के नजरिये को बदल पाना बहुत मुश्किल है।

4- याद रखिये कि जीवन मेंं हर चीज किसी कारण से होती है, उम्मीदों का साथ कभी मत छोड़िए, आपका कड़ी मेहनत एक दिन अवश्य रंग लाएगी।

5- जिंदगी में कभी-कभी आगे बढ़ना बहुत मुश्किल होता है लेकिन एक बार जब आप आगे बढ़ जाते हैं, तब आपको पता चलता है कि शायद यह आपके द्वारा लिया गया सबसे अच्छा निर्णय था।

6- इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके कितने अनुभवी हैं और उन अनुभवों ने आपको क्या सिखाया है, जीवन हमेशा आपको एक अप्रत्याशित झटका देता है जिसके लिए अक्सर आप तैयार नहीं होते हैं।

7- जीतने के लिए हिम्मत कभी मत खोइये। आप हमेशा एक नई शुरुआत कर सकते हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह कितना मुश्किल लगता है।

8- लोगों में विश्वास रखिये आपका प्यार उन्हें बदल सकता है।

9- लोगों को जज मत कीजिए उनके अपने कुछ कारण हैं, यहां तक कि एक अशिक्षित व्यक्ति भी आपको बहुत कुछ सिखा सकता है।

10- जीवन के सबसे साधारण पलों में अक्सर सबसे बड़ी खुशियां छिपी होती हैं।

11- जो बीत गया वो आपके दिमाग में है और जो होना है वो आपके हाथ में है।

12- समय के साथ प्राथमिकताएं बदलतीं हैं, विफलताओं से मत डरिये, कभी-कभी असफल होने का मतलब सीखने में पहला प्रयास होता है।

खुद पर यकीन होना क्यों जरूरी है

आज जो हमारे पास है वह कल हमारे पास नहीं होने की संभावना ही सारे भय की जड़ है। अपने बुने हुए भय के जाल से बचने की कोशिश हम जीवन भर करते रहते हैं, पूरे जीवन भागदौड़ करते हैं पर अपने बुने हुए भय के बाहर निकल नहीं पाते।

एक दिन रास्ते में सड़क के किनारे बंधे एक हाथी को देखा,उसके पैरों में रस्सी बंधी थी। यह देखकर आश्चर्य हुआ कि हाथी जैसा विशाल जानवर केवल एक छोटी सी रस्सी से बंधा था। हाथी इस बंधन को जब चाहे तब तोड़ सकता था, लेकिन वो ऐसा नहीं कर रहा था।

जब हाथी के ट्रेनर से पूछा कि तो उसने बताया एेसे हाथियों को बचपन से ही रस्सियों से बांधा जाता है। उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती कि वे इन रस्सियों को तोड़ सकें। बार-बार प्रयास करने के बाद जब ये रस्सियों नहीं टूटती तो इन्हें यकीन हो जाता है कि वे इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते और बड़े होने के बाद भी उनका यह यकीन बना रहता है इसलिए वो रस्सी तोडऩे का प्रयास ही नहीं करते हैं।

दूसरी तरफ विज्ञान का ऐसा मानना है कि भंवरे उड़ नहीं सकते, लेकिन भंवरे को लगता है कि वो उड़ सकता है, इसलिए वह लगातार कोशिश करता है और बार-बार असफल होने पर भी वह हार नहीं मानता। आखिरकार भंवरा उडऩे में सफल हो ही जाता है।

लोग हमें बताते हैं कि यह मत करो, वो मत करो, तुमसे ये नहीं होगा, वो नहीं होगा। कभी-कभी हम कोशिश भी करते हैं और अगर असफल हो गए तो हमें यकीन हो जाता है कि यह काम नहीं हो पाएगा। फिर धीरे-धीरे यही बातें हमारे विचारों और बिहेवियर को कंट्रोल करने लगती हैं और हम प्रयास करना छोड़ देते हैं।

यह सच है कि जीवन में सब कुछ हमारे हाथ में नहीं होता है पर जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है उन बातों पर ध्यान देना जो हमारे हाथ में हैं प्रयास करना ही हमारे वश में है इसलिए हमें ज्यादा सोचना छोड़कर बस प्रयास करते रहना चाहिए और खुद हर परिस्थिति में खुद पर यकीन बनाए रखना चाहिये।

भंवरा मानता है कि वह उड़ सकता है, इसलिए वह उड़ पाता है जबकि हाथी मानता है कि वह रस्सी नहीं तोड़ सकता, इसलिए वह रस्सी को नहीं तोड़ पाता है। यही बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है।

शर्मीला स्वभाव होने के कुछ साइड-इफेक्ट क्या हैं

1- दूसरों के लिए आपको और आपके विकल्पों को समझना मुश्किल होता है। यहां तक कि आपके परिवार के निकटतम सदस्यों और दोस्तों को भी आपके दिमाग के अंदर क्या चल रहा है, इसका पता नहीं होता।

2- किसी चीज़ को जरूरत से ज्यादा सोचना अंतर्मुखी स्वभाव के व्यक्तियों की सबसे बुरी आदतों में से एक है। अधिकतम समय आपके दिमाग में कुछ न कुछ चलता रहता है। आप हमेशा अपने भविष्य, करियर, आदतों और कई दूसरी चीजों के बारे में सोचते रहते हैं।

3- अंतर्मुखी स्वभाव के लोग अपना समय एकांत में बिताना पसंद करते हैं और अक्सर कम बोलने वाले होते हैं। अधिकांश समय इन्हें दूसरों को समक्ष अपनी भावनाओं को व्यक्त करने या कहने में हिचकिचाहट महसूस होती है।

4- दूसरों से मदद लेने के मामले में शर्मीले स्वभाव के लोगों की स्थिति अत्यंत दयनीय होती है। दूसरों की मदद लेने में वे बुरा महसूस करते हैं और कई बार सोचते हैं।

5- जब अंतर्मुखी स्वभाव के लोगों के मन में कोई संदेह होता है तो वे सीधे सवाल नहीं पूछते हैं, वे केवल यह सोचते हैं कि उन्हें पूछना चाहिए या नहीं, फिर कुछ बार सोचने के बाद वे इसे छोड़ने का फैसला करते हैं और अन्य स्रोतोंं के माध्यम से अपने डाउट क्लीयर करते हैं।

6- अंतर्मुखी स्वभाव के लोग जानते हैं कि लोग उन्हें छोटी-छोटी बातों में बेवकूफ बनाने की कोशिश करते हैं फिर भी वे इसे लेकर चिंतित नहीं होते क्योंकि वे बहस करना पसंद नहीं करते हैं। दूसरों से धोखा खाना उनकी अक्षमता नहीं है बल्कि यह दूसरों पर हर बार भरोसा करने और माफ कर देने की उनके दिल की दयालुता है।

7- शर्मीले स्वभाव के लोग सबसे दुर्भाग्यशाली एक तरफा प्रेमी होते हैं। यहां तक कि उनके सबसे अच्छे दोस्त को भी पता नहीं होता कि वो प्यार में हैं।

8- अंतर्मुखी और शर्मीले स्वभाव वालों के पास कई भावनाओं के लिए एक ही चेहरा होता है क्योंकि ये अंदर ही रोते हैं, अंदर ही हंसते हैं, अंदर ही प्यार करते हैं और अंदर ही नफरत करते हैं।

9- अंतर्मुखी और शर्मीले स्वभाव के लोगों के जीवन की कहानी में हर भूमिका के लिए उनके पास बहुत कम लोग होते हैं और जब वे उनमें से किसी को खो देते हैं, तो उन्हें बहुत गहराई से दर्द देता है और उन घावों को ठीक होने में कई साल लग जाते हैं।

10- अंतर्मुखी और शर्मीले स्वभाव के लोगों को असमाजिक,अपनी दुनिया में केंद्रित,अहंकारी और ऐसे अन्य विशेषणों से नवाजा जाता है क्योंकि वे ज्यादा कुछ बोलते नहीं हैं और सामाजिक घटनाओं में शरीक होने से बचते हैं।