कुछ बातें जो दूसरों की नजर में हमें बोरिंग बनाती हैं

1- जरूरत से ज्यादा बात करना किसी की नजर में आपको अनाकर्षक और बोरिंग बनाता है। बोलना खुद को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है पर अति हर चीज की बुरी होती है। यह बात हमारे बोलने पर भी लागू होती है।

2-पीठ पीछे दूसरों की बुराई करने से हमेशा बचना चाहिए। यह आपकी कमजोरी का संकेत है। यह निश्चित रूप से दूसरों की नजर में आपके आकर्षण को कम कर सकता है।

3. हीन भावना और लो कॉन्फिडेंस एक और कारक है जो दूसरों की नजर में आपके व्यक्तित्व को अनाकर्षक बनाता है। कोई भी ऐसे व्यक्ति के आसपास होना पसंद नहीं करता है जो खुद के बारे में ही अच्छा महसूस न करे।

4 अपनी ही दुनिया में खोए रहना, खुद से बातें करना एक हद तक अच्छा है पर सिर्फ अपनी ही दुनिया में खोए रहना और सामने वाले की उपेक्षा करना आपके व्यक्तित्व की नकारात्मक विशेषता है जो दूसरों की नजर में आपको बोरिंग और अनाकर्षक बनाती है।

5.अपनी बातों पर कायम न रहना, यदि आप अपने कहे पर कायम नहीं रह सकते हैं तो बेहतर है कि दूसरों से वादा मत कीजिए क्योंकि यदि आप ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो आपको ‘अविश्वसनीय’ के रूप में लेबल लग जाएगा और कोई भी अविश्वसनीय व्यक्ति को आकर्षक नहीं पाता है।

6- हर किसी आकर्षक लगने वाली महिला या लड़की के साथ फ्लर्ट करने से बचिए अगर आप किसी से प्यार करते हैं, तो अपने रिश्ते के प्रति प्रतिबद्ध रहिये और अपने रिश्ते का सम्मान कीजिए। यदि आप बहुत ज्यादा फ्लर्ट करते हैं, तो यह आपको प्रतिष्ठा को धूमिल करता है। एक बुरी इमेज दूसरों की नजरों में आसानी से आपको गिरा सकती है।

7 बहुत ज्यादा कंजूस मत बनिए और बहुत ज्यादा अपव्यय भी मत करिये। यदि आप सुखी जीवन बिताना चाहते हैं तो आपको इन दोनों के बीच संतुलन की आवश्यकता है। आपकी थोड़ी सी उदारता किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकती है। याद रखिए,याद रखिए, ‘शेयरिंग ही केयरिंग ‘ है।

जिन्दगी में हर बार दूसरा मौका नहीं मिलता

अजय कपूर एक बेहतरीन वेब डिजाइनर हैं। उनके क्लाइंट्स उनके काम के मुरीद हैं। उनके पास काम की कोई कमी नहीं है। वह स्वस्थ और सुखी जीवन जी रहे हैं। पर कुछ वर्षों पहले तक उनके जीवन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था वह पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों मोर्चों पर संघर्ष कर रहे थे।

आज से पांच साल पहले की रविवार की उस सुबह को वो कभी भी नहीं भूल सकते जब सुबह के वक्त वो अपने चार वर्ष के बेटे अर्जुन के साथ घर के बाहर लान में फुटबाल खेल रहे थे। गेंद के पीछे भागते हुए अचानक उन्होंने महसूस किया कि वो बुरी तरह हाफं रहे हैं। उनकी सांसें उखड़ रहीं थीं और चेहरा लाल हो गया था। वह बुरी तरह खांस रहे थे।

अजय कपूर की एक बुरी आदत थी जो उनकी सभी अच्छाईयों पर भारी पड़ रही थी। उन्हें धूम्रपान की लत थी। एक दिन में 10-15 सिगरेट पी जाना उनके लिए सामान्य सी बात थी। उनके दिन की शुरुआत सुबह की चाय और सिगरेट के साथ होती थी और अौर अंत रात के खाने के बाद सिगरेट से होता था। इस आदत की शुरुआत कई वर्षों पहले कालेज के समय से हुई थी जब उन्होंने दोस्तों के कहने पर शौक में सिगरेट पीना शुरू किया था। शुरुआत में वो सामान्य सिगरेट पीते थे और अब डिजाइनर सिगरेट पीने लगे थे। उनका यह शौक कब गंभीर लत में बदल गया इसका स्वयं उन्हें भी पता नहीं था।

अजय कपूर की हालत तेजी से बिगड़ती जा रही थी। अब वह जमीन पर गिर गये थे उनकी पत्नी उनके सीने को और उनकी मां उनके पैरों के तलवों को जोर जोर से मल रहीं थीं। उनकी चेतना तेजी से लुप्त होती जा रही थी। थोड़ी ही देर में एम्बुलेंस आ गयी और उन्हें समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया गया था। उन्हें दिल का गंभीर दौरा पड़ा था जिसका मुख्य कारण डाक्टर ने अत्यधिक सिगरेट और शराब का सेवन बताया था। उनकी बायोप्सी भी की गई थी जिसकी रिपोर्ट में कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों की पुष्टि हुई थी।

अजय अस्पताल के अपने बिस्तर पर शांत लेटे हुए थे। उनकी मुख मुद्रा गंभीर थी उनकी आखें खिड़की के बाहर शून्य में कुछ तलाश रहीं थीं। आज उनका दिल उनसे कुछ कह रहा था एेसा नहीं था कि उनका दिल पहले कुछ नहीं कहता था वो पहले भी उनसे बात करता था पर उनके जीवन में इतना कोलाहल था कि उसकी आवाज उन तक नहीं पहुंच पाती थी। उन्हें याद आ रहा था कि उनकी मां और पत्नी ने न जाने कितनी बार उनसे इस बुरी आदत को छोड़ देने को कहा था पर हर बार उन्होंने उनकी बातों को धुएं में उड़ा दिया था। पहले उन्होंने सिगरेट को पिया था और अब सिगरेट उन्हें पी रही थी।

अजय को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी और वो अपने घर वापस आ गए थे पर उनकी समस्याएं अभी समाप्त नहीं हुईं थीं। उन्हें अभी एक लम्बी लड़ाई लड़नी थी और यह लड़ाई उनकी खुद से थी। वर्षों से जमी हुई आदतें यूं ही नहीं जाती हैं। इंसान का मन बार बार सही गलत कुछ भी लॉजिक देकर उन आदतों के पास वापस लौट जाना चाहता है। इन्हें उखाड़ फेंकने के लिए आवश्यकता होती है दृढ़ इच्छाशक्ति और मनोबल की जो लगातार अभ्यास और संयम से आता है।

कहते हैं इंसान को वक्त सब कुछ सिखा देता है। अजय कपूर को भी वक्त ने सिखा दिया। बीते वक्त की परिस्थितियों और मुश्किलों ने उन्हें मजबूत बना दिया था। लंबे समय तक उन्होंने खुद से संघर्ष किया और अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इस बुरी आदत से छुटकारा पा लिया।
सौभाग्यशाली थे अजय कपूर जो समय रहते संभल गए और मौत के मुंह से बाहर निकल आए। यदि आप में भी कोई एेसी बुरी आदत है तो उसे अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और मनोबल के सहारे उखाड़ फेंकिये। याद रखिए जिन्दगी में हर किसी को दूसरा मौका नहीं मिलता, हर कोई अजय कपूर की तरह भाग्यशाली नहीं होता।

गुरू-पूर्णिमा विशेष- बिन गुरु जीवन सूना है

कुछ दिनों बाद गुरू-पूर्णिमा है । भारतीय संस्कृति में गुरू की बड़ी महिमा बतायी गयी है। गुरु का जीवन में स्थान महत्वपूर्ण है। गुरु ही वह व्यक्ति है जो जीवन की उलझी हुई राहों में भटकते हुए व्यक्ति का मार्गदर्शन कर उसे लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं।

मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक, जिदंगी के हर पड़ाव पर उसे एेसे व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है जो उसका मार्गदर्शन करें और जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाए। किसी शिशु के लिए उसकी मां ही प्रथम गुरु है उसके बाद के जीवन अनेकों व्यक्ति कभी शिक्षक, कभी कोच, कभी मेटंर आदि के अनेक रूप में आकर व्यक्ति का मार्गदर्शन करते हैं और गुरु की भूमिका निभाते हैं।

गुरु का कार्य है मनुष्य को रास्ता दिखाना, आध्यात्मिक विचारधारा के अनुसार अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को गुरु कहा जाता है। शास्त्रों में गुरु की तुलना ईश्वर से कही गई है। सच्चे गुरु की प्राप्ति दुरूह है, सच्चे गुरु आसानी से नहीं मिलते हैं बल्कि गुरु की प्राप्ति के लिए शिष्य को अपनी पात्रता सिद्ध करनी पड़ती है। सच्चे गुरु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है।

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक पारिवारिक और साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं।

यह दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे उन्हें आधिकारिक भी कहा जाता है, उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है।

भारत वर्ष में गुरू पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन हर एक शिष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार अपने गुरु को दक्षिणा देता है और गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है।

आज के दिन स्कूल और विद्यालयों में यह दिन गुरू को सम्मानित करने का होता है। मन्दिरों में भी पूजा की जाती है, पवित्र नदियों में लोग स्नान करते हैं, जगह जगह भंडारे होते हैं का आयोजन किया जाता है। यह पर्व है अपने गुरु के स्मरण का, हमारे जीवन में उनके योगदान उन्हें धन्यवाद देने का और गुरु के बताए हुए रास्ते पर चलने का।

जो बीत गई सो बात गई

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि व्यक्ति किसी घटना को लगातार और लंबे समय तक याद करता रहता है तो वह दीर्घकालीन स्मृति में परिवर्तित होकर अवचेतन मन में चली जाती है

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इन्सान अपने अतीत की सुखद घटनाओं के स्थान पर दुखद एवं पीड़ित करने वाले क्षणों को अधिक याद करता है। हमारे साथ किसने अच्छा किया है वह याद नहीं रहता जितना कि हमारे साथ बुरा हुआ है वह याद रहता है।

बीते हुए कल की कड़वी यादें हमारा पीछा आसानी से नहीं छोड़ती हैं। ये यादें हमें पीड़ा देती हैं और परेशान करती रहती हैं। बीते हुए कल के दुखद क्षणों को याद करते-करते हम वर्तमान में अपने संबंधों को भी अनजाने में ही प्रभावित करते रहते हैं।

हम कोशिश तो बहुत करते हैं पर ये यादें हमें पीछे खींचती रहती हैं। हम रहते तो आज में हैं पर जीते उस बीते हुए कल के साथ हैं जिसकी यादें हमारे मन-मस्तिष्क को कुरेदती रहती हैं।

वर्तमान और अतीत की इस कशमकश में हमारा मन तनाव, ग्लानि और क्रोध से भर जाता है जिसका हमारे संबंध एवं कार्यक्षमता दोनों पर बुरा असर पड़ता है।

जब हम दर्द भरी दुखद घटनाओं को याद करते हैं तो हमारे शरीर में जैव रासायनिक क्रियाओं में वृद्धि हो जाती है। जिसके कारण अनेक हार्मोन का स्राव होता है इनमें से कुछ क्रियाएं और हार्मोन शरीर और मन के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं और इनका मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

बीते हुए कल की कड़वाहट से बचने का सबसे बढ़िया तरीका खुद को अपनी रूचि के अनुसार किसी अच्छे कार्य में मनोयोग पूर्वक लगाए रखना है।

अतीत की कडुआहट से बचने के लिए हमें वर्तमान में जीने का प्रयास करना चाहिए। जो वर्तमान को संभाल लेता है, वह अतीत की भूलों से सीख लेकर अपने भविष्य को संवार लेता है।

जिंदगी बड़ी बहुमूल्य एवं बेहद खूबसूरत है,उसे केवल वर्तमान के पलों एवं क्षणों से सजाया और संवारा जा सकता है।

यदि भविष्य को सँवारना हो तो अतीत को गुजर जाने दीजिए।

हमारा वह व्यवहार जो लोगों को हमसे दूर कर देता है

1- नकारात्मक सोच, जब आप हर बार चीजों के सकारात्मक पक्ष को देखने से इन्कार करते हैं और लोगों से केवल संभावित नकारात्मक नतीजों के बारे में बात करते हैं, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

2- हीन भावना, जब आप मानते हैं कि आपका अपने जीवन पर कोई नियंत्रण या प्रभाव नहीं है और आप लगातार बिना किसी स्पष्ट वजह के हर चीज के लिए खुद को दोष देते हैं, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

3- अति संवेदनशीलता, जब आप मानते हैं कि जिंदगी में घटने वाली हर घटना का सीधा संबंध आपसे है और हमेशा उस पर विचार करने में अपना और दूसरों का समय और ऊर्जा बर्बाद करते हैं, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

4- उपेक्षा, जब आपमें दूसरों के प्रति सहानुभूति, चिंता एवं करुणा का आभाव होता है और आप उनकी भावनाओं पर ध्यान न देकर उनकी उपेक्षा करते हैं, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

5- अत्यधिक प्रतिक्रिया, जब आप परिस्थितियों में आवश्यकता से अधिक प्रतिक्रिया करते हैं और लोगों के बीच अपनी भावनाओं विशेष रूप से क्रोध को काबू करने में असफल होते हैं, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

6- हर्ट फील करना, जब आप बहुत जल्दी और बात-बात में हर्ट फील करते हैं, भले ही लोगों ने जानबूझकर या अनजाने में कुछ भी नहीं कहा या किया हो,तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

7- दूसरों को दोष देना,जब आप अपने जीवन की हर समस्या के लिए दूसरों को दोष देते हैं और यह मानते हैं कि सबकुछ किसी और की गलती है, तो आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

8-अपनी सच्चाई छिपाना, जब आप दूसरों से अपनी सच्चाई छिपाते हैं और अपने व्यक्तित्व को दूसरों के सामने नहीं आने देते तो तो लोग आपसे पूरी तरह जुड़ नहीं पाते हैं, आपका यह व्यवहार लोगों को अापके जीवन से दूर करता है।

जीवन की कुछ छोटी पर महत्वपूर्ण बातें क्या हैं

1- पहचान के लिए इंतजार मत करो,जुनून और लगन के साथ अपना काम पूरा कीजिए चाहे उसके लिए आपको मान्यता मिले है या नहीं। दूसरों को इम्प्रेस करने के लिए नहीं बल्कि खुद को एक्सप्रेस करने के लिए काम को करना सीखिए।

2- आपकी सबसे बड़ी कमजोरी भी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। अपनी कमजोरी को स्वीकार कीजिए और अपने आप को कोसने की बजाय बुद्धिमानी से उसका इस्तेमाल करना सीखिये।

3- यदि लोग आपके जुनून या लक्ष्य के बारे में आपकी आलोचना करते हैं, तो उनके साथ बहस मत करिये। कड़ी मेहनत करिए, आपकी सफलता और उपलब्धियां उन्हें चुप करा देंगी।

4- किसी बच्चे की तरह बिना किसी कारण से खुश रहना सीखिये क्योंकि यदि आप किसी कारण से खुश होते हैं तो आप परेशानी में पड़ सकते हैं क्योंकि उस कारण को आपसे वापस भी छीना जा सकता है।

5- हमारे चरित्र का सही परीक्षण यह नहीं है कि हम अपने अच्छे दिनों में कैसे व्यवहार करते हैं, बल्कि यह है कि हम अपने सबसे खराब दिनों में कैसे प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।

6- जीवन में त्रासदी आपके लक्ष्य तक न पहुंच पाने में नहीं है, वास्तविक त्रासदी तो जीवन में कहीं पहुंचने के लिए किसी लक्ष्य का नहीं होना है।

7- कभी-कभी उन्हें छोड़ दो, कहीं और जाओ, कहीं और मन लगाओ क्योंकि बार-बार छूने से घाव कभी नहीं भरते हैं।

8- एक सार्थक चुप्पी हमेशा अर्थहीन शब्दों से बेहतर होती है।

9- आपके सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती, गहरी सांस लीजिए और एक बार फिर अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कीजिए।

10- कुछ लोग जिंदगी में आपको छोड़ कर चले जाएंगे, लेकिन यह आपकी कहानी का अंत नहीं है.. यह आपकी कहानी में उनके हिस्से का अंत है ।

हम सबको पंसद क्यों नहीं होते हैं

1- यह दुनिया एेसे लोगों से भरी पड़ी है जिन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या करते हैं, या क्या चाहते हैं? आप चाहे जितनी भी कोशिश कर लीजिये वे आपको पसंद नहीं करेंगे।

2- हालांकि यह दुनिया उन लोगों से भी भरी है जो आप को हर बात के लिए जज नहीं करते हैं, वे बिना शर्त आपसे से प्यार करते हैं। एेसे लोग आपके अपने होते हैं।

3- उन लोगों को मनाने की कोशिश में अपने समय और ऊर्जा को बर्बाद मत करिये जो आपके अपने लोग नहीं हैं।

4- एेसे लोग आपकी पहल को पूरी तरह से गलत समझेंगे और आप जो भी पेशकश कर रहे हैं उस पर विचार नहीं करेंगे।

5- उन्हें अपने रास्ते पर चलने के लिए मनाने की कोशिश मत करिये क्योंकि एेसा करके आप केवल अपना समय और भावनात्मक स्वास्थ्य बर्बाद कर लेंगे।

6- आप उनके लिए नहीं हैं और वे आपके लिए नहीं हैं। नियति ने आप दोनों को जीवन के अलग-अलग रास्तों पर चलने के लिए चुना है।

7- उदारता पूर्वक एेसे लोगों को अपने जीवन से जानें दीजिये और साथ ही आप भी जिंदगी में आगे बढ़िये।

8- जिंदगी की राहों पर अपने साथ चलने के लिए उन लोगों की तालाश करिये जो आपकी कोशिशों को पहचानते हों और उनकी सराहना करते हों।

9- आप जैसे हैं वैसे ही रहिए, आप सबकी पंसद नहीं हो सकते और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

कुछ बातें जिन्हें हमें समझना होगा

जिस तरह घड़ी चलती रहती है और समय गुजरता रहता है, लेकिन सुईयां घूम-घूमकर उसी कांटे पर वापस आ जाती हैं उसी तरह हमारा जीवन भी उन्हीं पड़ावों से बार – बार गुजरता है जिनसे वह पहले भी गुजर चुका है।

जिंदगी का एक पहलू यह भी है जिसे हमें समझना चाहिये-

1- इस दुनिया में दो तरह के लोग हैं- कुछ लोग जीने के लिए काम करते हैं और कुछ लोग काम करने के लिए जीते हैं। हममें से ज्यादातर लोग पहली श्रेणी में आते हैं।

2- हम पहले कामना करते हैं, उसमें अपना लाभ देखते हैं और फिर कदम आगे बढ़ाते हैं। यदि किसी काम में लाभ नहीं दिखता है तो उसे नहीं करते हैं।

3- दुनिया में बहुत असमानता है। हर जगह सत्य उपेक्षित है, आज की दुनिया में सही रास्ते पर चलने का धैर्य बहुत कम लोगों मे है, ज्यादातर लोग शार्टकट लेकर मंजिल तक पहुंचना चाहते हैं।

4- यह सच है कि यह दुनिया कठोर है और बुरे लोगों से भरी पड़ी है, यहां हर कदम पर असमानता है और सत्य यहां परेशान होता है।

5- यह दुनिया बड़ी अजीब है। यहां जो जिंदगी भर भिखारियों की तरह मांगता रहता है उसे बहुत कम मिलता है। इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें कुछ खास नहीं करना पड़ता है और जिदंगी उन्हें इतना कुछ दे देती है कि संभाले नहीं संभालता है।

जिस तरह हर सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी तरह इस जिंदगी का दूसरा पहलू भी है जिसे हमें समझना चाहिये-

1- हर बुरे इंसान के पास भी अच्छा ह्रदय हो सकता है।

2- हर स्वार्थी नेता में एक अच्छा लीडर बनने की संभावना छिपी होती है।

3- मेहनत से मिलने वाला एक रूपया भी सड़क पर मिलने वाले पांच सौ के नोट से ज्यादा कीमती होता है।

4- सत्य यहां परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं।

5- यहां भरोसा टूटता भी है लेकिन खुद पर और दूसरों पर भरोसा किये बिना यहां किसी को सफलता भी नहीं मिलती है।

यह सब समझनें में वक्त लगेगा क्योंकि ये बातें गहरी हैं पर इन्हें जितना जल्दी समझ लिया जाए हमारे लिए उतना ही अच्छा होगा।

जिन्दगी यूं ही चलती रहे

रूद्राक्ष के जीवन में सबसे मुश्किल पल तब आए थे जब डाक्टरों ने उसे बताया था कि उसका ट्यूमर कैंसरस हो चुका है। हालांकि कैंसर अभी प्रारंभिक अवस्था में था जिसका इलाज सर्जरी और कीमोथेरेपी द्वारा संभव था। रूद्राक्ष के लिए जीवन के इस कटु सत्य को स्वीकार कर लेना आसान नहीं था और उसने कुछ महीनों तक यह बात अपने परिवार से छुपाए रक्खी थी। पर सत्य तो भावनाओं के परे होता है और लाख छिपाने पर भी एक दिन बाहर आ ही जाता है।

रूद्राक्ष का एक छोटा-सा हँसता खेलता हुआ परिवार था। उसकी पत्नी वेदिका स्कूल में पढ़ाती थी उसी स्कूल में उसका दस वर्ष का बेटा प्रखर और पांच साल की बेटी ऊर्जा भी पढते थे। उनके जीवन की गाड़ी हंसी खुशी निर्बाध गति से आगे बढ़ रही थी पर रूद्राक्ष की बीमारी ने मानों खुशियों पर अचानक ब्रेक लगा दिये थे।

कैंसर की इस बीमारी ने रूद्राक्ष को शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से तोड़ दिया था। अपनी परेशानी में परेशान रूद्राक्ष थोड़ा चिड़चिड़ा भी हो गया था और छोटी छोटी बातों पर बच्चों को झिड़क देता था। कुछ दिन अस्पताल में रहकर कीमोथेरेपी कराकर रूद्राक्ष जब घर वापस आया तब बच्चों ने देखा कि उनके पापा बेहद थके हुए और उदास लग रहे हैं और उनके सिर के बाल भी झड़ गए हैं।

कुछ दिनों बाद प्रखर का जन्मदिन था। उस दिन सुबह रूद्राक्ष ने प्रखर को अपने पास बुलाकर ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद दिया और कुछ रुपये देते हुए कहा बेटा शाम को माँ के साथ जाकर केक और गिफ्ट ले आना। रूद्राक्ष जानता था कि घर में पैसों की कितनी किल्लत है, उसने उसमें से 100 रूपये लेकर अपनी जेब में रख लिए और बाकी पैसे लेकर वह वेदिका के पास गया और बोला मां ये पैसे रख लो इस बार हम केक की जगह हलवे से काम चला लेगें, यह पैसा पापा की दवा में काम आ जाएगा। यह कहकर वह चला गया।

शाम को प्रखर जब घर आया तो उसने सिर पर एक बड़ी सी कैप लगा रखी थी। जब वेदिका ने पूछा यह कैप कहां से आयी? तो प्रखर ने मुस्कराते हुए कहा मां यही मेरा बर्थडे गिफ्ट है फिर उसने माँ से मोबाइल मांगा और बोला पापा के साथ एक सेल्फी लेनी है। वह रूद्राक्ष के कमरे में गया उसने देखा कि वो गहरी नींद में सो रहे हैं उसने चुपचाप सेल्फी ली और उसे फेसबुक पर अपलोड कर दिया।

कुछ देर बाद वेदिका ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर देखा कि प्रखर ने अपने पापा के साथ जो सेल्फी ली थी उसमें रूद्राक्ष के सिर पर वही कैप है जो कुछ देर पहले प्रखर लाया था ,पिछले साल की फोटो के साथ उसने इस फोटो को अपलोड किया था और लिखा था कि ” मेरे पापा आज भी उतने ही अच्छे लगते हैं जितने पहले लगते थे , मैं और मेरी बहन उनसे आज भी उतना ही प्यार करते हैं, मैं आज भी उनकी तरह बनाना चाहता हूं.. गेट वेल सून पापा.. भगवान करे मेरे पापा को मेरी भी उमर लग जाए।”

वेदिका मोबाइल लेकर रूद्राक्ष को दिखाने के लिए कमरे में गयी उसने देखा प्रखर वहीं बेड पर सो गया था। वह कैप रूद्राक्ष अपने हाथों में लिए अपने मोबाइल पर पोस्ट पढ रहे थे। उनकी आखों से आंसू लगातार बह रहे थे, यह बेस्ट गिफ्ट था जो अपने जन्मदिन पर प्रखर ने अपने पापा को दिया था।

ताकत बड़ी है या प्यार

किसी से अपनी बात मनवाने के लिये हमारे पास प्रायः दो ही साधन उपलब्ध होते हैं। एक ताकत तथा दूसरा प्रेम।

ताकत से किसी को अपने नियंत्रण में किया जा सकता है, उससे अपना आदेश मनवाया जा सकता है। किन्तु यह विजय अस्थायी है, इससे किसी के दिल पर अधिकार नहीं किया सकता है।

हारा हुआ इंसान तभी तक अपने को हारा हुआ समझता है जब तक वह कमजोर है और उसके पास ईंट का जवाब पत्थर से देने के साधन नहीं है।

वह अंदर ही अंदर ऐसे मौके की प्रतीक्षा में रहता है जब वह खुद बदला लेने में अपने को समर्थ समझ सके। और एक न एक दिन उसे ऐसा मौकी मिल ही जाता है।

प्रेम से मिलने वाली जीत स्थायी होती है। जीतने वाला जीत कर भी अपना दिल हारता है और हारने वाला हारकर भी दूसरे का दिल जीत लेता है। वे सदा के लिये एक-दूसरे के हो जाते हैं। एक के दिल पर दूसरे का अधिकार हो जाता है।

शक्तिशाली लोग ताकत का प्रयोग इसलिये करते हैं ताकि दूसरों की शक्ति को अपने काम में ला सकें। यह कार्य प्रेम से भी हो सकता है। राम से लकर गांधी तक इस बात के साक्षी हैं कि प्रेम का बन्धन तलवार के भय से बड़ा है।

यदि आप दूसरों को जीतना चाहते हैं, उनकी शक्ति को अपने उपयोग में लाना चाहते हैं तो प्रेम को अपनाइये यह तलवार की अपेक्षा सैंकड़ों गुनी शक्ति रखता है।