खुशियां कम और अरमान बहुत हैं

खुशियां कम और अरमान बहुत हैं
इस शहर में हर कोई परेशान बहुत है
करीब जाकर देखा तो मिलीं उनमें भी कमियां
दूर से तो उसकी शख्शियत आलीशान बहुत है।

कहने को तो नहीं है सच का कोई मुकाबला
लेकिन आज की दुनिया में झूठ की जान-पहचान बहुत है
जरुरत पड़ी उन्हें तो हर शख्श मुकर गया
कहने को तो इस शहर में उनके कद्रदान बहुत हैं।

मुमकिन है वक्त मिटा दे यादों को उनकी
लेकिन कैसे भुला दें उनको जिसके मुझ पर अहसान बहुत हैं
मुश्किल से मिलता है वो जिसे कह सकें हमारा
वैसे तो इस शहर में इन्सान बहुत हैं।

सुना था मिलती हैं मोहब्त के बदले मोहब्तें
जब मेरी बारी आयी तो यें जम़ाना क्यों हैरान बहुत है
जिस शहर में था इश्क का आशियाना
उस शहर में पत्थर के ख़रीदार बहुत हैं।

ऐसा लगता है जैसे जिंदगी मुझे पहचानती नहीं

ऐसा लगता है जैसे जिंदगी मुझे पहचानती नहीं,
ऐसे देखती है मानो बरसों से मुझे जानती नहीं।

नहीं है किसी से शिकायत न किसी बात का रोना है,
पत्थर की दुनिया में शीशे सा दिल तो बस एक खिलौना है।

क्या हुआ जो दूसरों से ज्यादा मैनें पाया नहीं,
बहुत धोखे खाए लेकिन दूसरों को गिराया नहीं।

खत्म नहीं हुआ है खेल कुछ हिस्सा अभी बाकी है,
चेहरे के पीछे छिपे चेहरों को अभी बेनकाब होना बाकी है।

देखो मेरा दिल अपनी बेबसी तुमसे कहता नहीं,
कहने को तो मेरा है लेकिन बिन तुम्हारे रहता नहीं।

बहुत थक गये है हम, कुछ देर और सोने दो,
थोड़ी सी रात बाकी है सुबह तो होने दो।

इस वर्ष खुद को और बेहतर बनाइये

हर वर्ष हम यह सोचते तो हैं कि इस साल हम कुछ बड़ा काम करेंगे एवं दूसरों की भलाई एवं सहायता करेंगे पर कर नहीं पाते हैं।

हम दूसरों की तरह बनना तो चाहते हैं पर स्वयं को और अपनी अादतों को बदल नहीं पाते हैंं। अच्छी बात यह है कि गलत राहों को छोडकर सही मार्ग पर चलने में कभी देर नहीं होती । सुबह का भूला शाम को लौट आए तो वह भूला नहीं कहलता है। जीवन में आने वाला हर नया साल भी हमें यही पैगाम देता है कि जब जागो तभी सवेरा।

कुछ छोटी – छोटी बातों को अपनाकर एक नई शुरूआत की जा सकती है और इस नई शुरूआत को करने के लिए नये वर्ष से बेहतर दूसरा कोई अवसर नहीं हो सकता है।

अच्छी ऊर्जा संक्रामक होती है। लोगों को छोटी- छोटी खुशियां देने की कोशिश कीजिए। कभी अपनी माँ के लिए एक कप चाय बनाइये, कभी अपने किसी पुराने दोस्त जिससे लंबे समय से बात न की हो उसे फोन कीजिए, या फिर मुस्कुराकर लोगों का अभिवादन कीजिए। यह सब आप को सकारात्मक ऊर्जा से भर देगा।

छोटी-छोटी जीत पर खुद को शाबाशी भी दीजिए। जिन कामों को आप बेहतर ढंग से अंजाम नहीं दे पा रहें उन पर अत्यधिक ऊर्जा व समय नष्ट करने से बेहतर है आप उन कामों को पहले कीजिए जिसमें आप निपुण हों। ऐसा करने से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आपको मुश्किल कामों को अंज़ाम देने के लिए आवश्यक उर्जा भी हासिल होगी।

कृतज्ञता का अभ्यास कीजिए। रोज सोने से पहले उन बातों के बारे में सोचिए जिनके प्रति आप कृतज्ञ हैं। जब आप उन चीजों की गिनती करने के लिए समय लेते हैं,जो आपको हासिल हैं तो आप यह महसूस करते हैं कि आपका जीवन वास्तव में बहुत सी चीजों से भरा हुआ है। बस आपका दिमाग ही बहुत व्यस्त है यह सब देख पाने के लिए।

कुछ नया सीखिए और अपने साथ पहले से अधिक समय व्यतीत कीजिए पहली बार में यह थोड़ा अजीब सकता है लेकिन अपनी खुद की कंपनी का आनंद लेने के लिए यह सीखना महत्वपूर्ण है । यह अपने स्वयं के विचारों और जरूरतों को जानने और समझने का एक अच्छा तरीका है।

यह कुछ उपाय हैं जिनकी सहायता से अच्छी आदतों को अपनाकर सही रास्ते पर वापस लौटा जा सकता है। जीवन अनमोल है इसकी परवाह कीजिए। जो सोचते हैं उस पर अमल भी कीजिए। उम्मीद है यह साल आपके लिए और खुशियां लाएगा एवं इस वर्ष मिलने वाले अनुभवों से आप और अधिक निखरेंगे और बेहतर बनेंगे।

हर वर्ष कुछ कहता है

इस साल के समाप्त होने में अब कुछ घंटे ही शेष हैं। सारी दुनिया पलकें बिछाकर नये साल के स्वागत में लगी हुई है। सभी के मन में बीते साल से बिछुड़ने की पीड़ा भी है और नये साल की नयी उम्मीदों से मिलने का उत्साह भी। एेसे में शायद यह सही समय है इस बात का अवलोकन करने का कि बीते हुए साल में हमने क्या खोया और क्या पाया।

कहते हैं कि समय इंसान को सब कुछ सिखा देता है बीते हुए साल ने भी बहुत कुछ सिखाया जिसे यहां साझा करके गुजरते हुए साल को विदा करना चाहता हूं।

इस वर्ष ने सिखाया है कि चीजें हमेशा वैसी नहीं होती हैं जैसा कि आप सोचते और चाहते हैं। यह भी अनुभव मिला है कि गलतियां होने का अर्थ यह नहीं है कि आपकी कोशिशें व्यर्थ थीं। यह भी सीखा कि कुछ टूटी हुई चीजें फिर दुबारा नहीं जुड़ती हैं। और मुश्किल वक्त से निकलने में आपके सच्चे मित्र एवं आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति ही सहायक साबित होती है।

इस साल ठोकरें खा कर यह भी सीखा कि जब आपको स्वयं अपनी क्षमताओं पर संदेह होने लगे तो बस पीछे मुड़कर यह देख लीजिए कि आपने अब तक क्या और कैसे हासिल किया है? एेसे समय पर खुद को याद दिलाइये उन लड़ाइयों के बारे में जिन्हें आपने जीता है और उन डरों को याद कीजिए जिन पर विजय प्राप्त करके आप यहां तक पहुंचे हैं।

यह साल जाते-जाते यह भी बता गया कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं बल्कि उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप स्वयं अपने विषय में क्या विचार रखते हैं। इस साल यह भी जाना कि अंत में यह महत्व नहीं रखता कि आपने क्या खोया और क्या पाया बल्कि महत्व यह रखता है कि आपने किसी को कैसे खोया,और किसी को कैसे पाया

कुछ ही घंटों में यह वर्ष घड़ी एवं कैलेण्डरों में हमेशा के लिए गुजर जाएगा। उम्मीद है कि इस वर्ष के खट्टे-मीठे अनुभवों से आपने बहुत कुछ सीखा होगा और यह कामना है कि आने वाला वर्ष के अनुभव आपको और बेहतर बनाएंगे।

द रूटीन लाइफ

रोज हमारे जीवन में एक ही तरह का रूटीन, एक ही तरह की बातें, वही चिंता, वही शिकायतें, वही पुराने विचार आते हैं. हम भी उनसे न तो पीछा छुड़ा पाते हैं और न ही कुछ उससे आगे सोच पाते हैं. क्या यही हमारा जीवन है? जिसमें कुछ नया नहीं है, जिसमे कोई रचनात्मकता, कोई खासियत, कोई विशेषता नहीं है. कब तक हमारी जिंदगी में कुछ नया नहीं होगा, कब तक हम इस बेहोशी की जिदंगी से होश में नहीं आएंगे ? क्या हम इसी बंधी हुई जिन्दगी से गुजर जाएंगें और जीवन में कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे।

जीवन हर पल कुछ नया सिखाता है यदि हम सीखना चाहें. कुछ नया करने की जीवन को बदलने की जितनी छटपटाहट हमारे विचारों में, हमारी बातों में होती है उतनी हमारे कार्यों में क्यों नहीं दिखती. क्यों हमारी अधिकतर ऊर्जा यों ही व्यर्थ चली जाती है।

खुद को अपने जीवन में मौजूद सब से महत्वपूर्ण चीज़ों की याद दिलाते रहना चाहिए कभी-कभी हमारे मन में कुछ ऐसे विचार भी जन्म लेते हैं, जो शायद हमारे लिए बिल्कुल भी महत्वपूर्ण नहीं होते. हो सकता है, कि आपकी नौकरी जा चुकी हो, किसी ने आपका साथ छोड़ दिया हो, या किसी ने धोखा दिया हो, या किसी के व्यवहार ने चोट पहुंचाई हो. फिर भी हमें यह विचार करना ही होगा कि सच में ये सारी बातें कितने समय तक मायने रखेंगी।

निराशा से बचने के लिए हमें अपने मन को हर वक़्त सिर्फ़ महत्वपूर्ण बातों की याद दिलाते रहना चाहिए जैसे कि हमारे मित्र और अपना परिवार, अपना स्वास्थ्य और सुरक्षा, अपना घर और खाना अवसर और स्वतंत्रता आदि की याद दिलाती रहनी चाहिए।

सफलता पाने की उम्मीद रखना अच्छी बात है लेकिन इस बात को भी हो समझना कि आप असफल भी हो सकते हैं उतना ही महत्वपूर्ण है. इस तरह का संतुलन पाना बहुत कठिन है, लेकिन असफलता का अनुभव होने के बाद भी यह आप को स्वस्थ रखेगा। शोध दर्शाते हैं, कि आप सफल होंगे या असफल इस विचार का आप के इस लक्ष्य को पाने की मेहनत पर प्रभाव पड़ेगा और कहीं ना कहीं इस का प्रभाव आप के प्रदर्शन पर भी पड़ेगा। आप सफल होंगे, इस बात पर विश्वास करने से आप को और अधिक मेहनत करने में मदद मिलेगी. हालाँकि, इस बात को याद रखें, कि आप के सफल होने या विफल होने, का दृष्टिकोण आप की असली सफलता को प्रभावित नहीं करेगा, इसे सिर्फ़ आप की मेहनत ही प्रभावित कर सकती है।

इन सभी बातों का सार बस एक ही है कि हम कितने ही असहाय, लाचार क्यूं न हो, राहें कितनी भी अँधेरी और परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यूं न हों. भीतर कुछ एेसा होता है जो मरता नहीं है. भीतर की आवाज को सुन पाना मुश्किल है क्योंकि हमारी कोशिश हमारा ध्यान बाहर की आवाज को सुनने में लगा हुआ है. यदि हम उस आवाज को सुन पाते हैं तो हमें रास्ता मिल जाता है. शेष लोगों के लिए रूटीन लाइफ तबतक जारी रहती है।

जब मन उदास होता है




कुछ नया करने की जीवन को बदलने की जितनी छटपटाहट हमारे विचारों में, हमारी बातों में होती है उतनी हमारे कार्यों में क्यों नहीं दिखती। क्यों हमारी अधिकतर ऊर्जा यों ही व्यर्थ चली जाती है?

रोज हमारे जीवन में एक ही तरह का रूटीन, एक ही तरह की बातें, वही चिंता, वही शिकायतें, वही पुराने विचार आते हैं। हम भी उनसे न तो पीछा छुड़ा पाते हैं और न ही कुछ उससे आगे सोच पाते हैं। क्या यही हमारा जीवन है?

जिसमें कुछ नया नहीं है, जिसमे कोई रचनात्मकता, कोई खासियत, कोई विशेषता नहीं है। कब तक हमारी जिंदगी में कुछ नया नहीं होगा, कब तक हम इस बेहोशी की जिदंगी से होश में नहीं आएंगे ? क्या हम इसी बंधी हुई जिन्दगी से गुजर जाएंगें और जीवन में कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे।

संसार के सफल व्यक्तियों की, एक विशेषता अनिवार्य रूप से रही है, कि वे अपने मस्तिष्क पर काबू प्राप्त किये रहते हैं। जो निश्चय कर लिया उसी पर अविचल भाव से चलते रहे हैं, बीच में मन को डगमगाने नहीं दिया है। यदि उनका मन अस्त-व्यस्त या डाँवाडोल रहा होता तो शायद ही किसी कार्य में सफल हो सके होते।

खुद को अपने जीवन में मौजूद सब से महत्वपूर्ण चीज़ों की याद दिलाते रहना चाहिए कभी-कभी हमारे मन में कुछ ऐसे विचार भी जन्म लेते हैं, जो शायद हमारे लिए बिल्कुल भी महत्वपूर्ण नहीं होते। हो सकता है, कि आपकी नौकरी जा चुकी हो, किसी ने आपका साथ छोड़ दिया हो, या किसी ने धोखा दिया हो, या किसी के व्यवहार ने चोट पहुंचाई हो, फिर भी हमें यह विचार करना ही होगा कि सच में ये सारी बातें कितने समय तक मायने रखेंगी।

निराशा से बचने के लिए हमें अपने मन को हर वक़्त सिर्फ़ महत्वपूर्ण बातों की याद दिलाते रहना चाहिए जो वर्तमान में आपके पास हैंं जैसे कि हमारे मित्र और अपना परिवार, अपना स्वास्थ्य और सुरक्षा, अपना घर और खाना, उपलब्ध अवसर और स्वतंत्रता आदि की याद दिलाती रहनी चाहिए।

हम कितने ही असहाय, लाचार क्यूं न हो, राहें कितनी भी अँधेरी और परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यूं न हों, भीतर कुछ ऐसा होता है जो मरता नहीं है।

भीतर की आवाज को सुन पाना मुश्किल है क्योंकि हमारी कोशिश हमारा ध्यान बाहर की आवाज को सुनने में लगा हुआ है। यदि हम उस आवाज को सुन पाते हैं तो हमें रास्ता मिल जाता है। शेष लोगों के लिए रूटीन लाइफ तब तक जारी रहती है।

सफलता पाने की उम्मीद रखना अच्छी बात है लेकिन इस बात को भी हो समझना कि आप असफल भी हो सकते हैं उतना ही महत्वपूर्ण है। इस तरह का संतुलन पाना बहुत कठिन है, लेकिन असफलता का अनुभव होने के बाद भी यह आप को स्वस्थ रखेगा।
शोध दर्शाते हैं, कि आप सफल होंगे या असफल इस विचार का आप के इस लक्ष्य को पाने की मेहनत पर प्रभाव पड़ेगा और कहीं ना कहीं इस का प्रभाव आप के प्रदर्शन पर भी पड़ेगा। आप सफल होंगे, इस बात पर विश्वास करने से आप को और अधिक मेहनत करने में मदद मिलेगी।

हालाँकि, इस बात को याद रखें, कि आप के सफल होने या विफल होने, का दृष्टिकोण आप की असली सफलता को प्रभावित नहीं करेगा, इसे सिर्फ़ आप की मेहनत ही प्रभावित कर सकती है।

जिन्हें फिक्र थी कल की वो रोए रात भर

जिन्हें फिक्र थी कल की
वो रोए रात भर
जिन्हें यकीन था खुदा पर
वो सोए रात भर।

हालात ने जैसे चाहा
वैसे हम ढल गए
बहुत संभल कर चले थे
लेकिन पैर फिसल गए।

चलते रहे जिंदगी की राहों पर
बहते पानी की तरह
जीवन में लोग आते- जाते रहे
सफर के मुसाफिर की तरह।

जो न कहना था लबों को
वो नज़रों ने कह दिया
करवां गुजर चुका था
अकेला मैं रह गया।

जब चले सच की राह पर
तो उसूल कुछ तोड़ने पड़े
जहां पर मेरी गलती न थी
वहां भी हाथ मुझे जोड़ने पड़े।

सजदे पर झुकने की वजह भी
क्या कमाल होती है
झुकता है सिर जमीन पर
दुआ कुबूल आसमान में होती है।

भावनात्मक दर्द आपके जीवन को कैसे बदल देता है?

1.भावनात्मक दर्द का व्यक्तिव पर असर शारीरिक दर्द से अधिक गहरा होता है और आपके व्यवहार पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता है।

2.कभी-कभी लोग भावनात्मक चोट की तुलना में शारीरिक रूप से चोट खाना अधिक पसंद करते हैं क्योंकि आप शारीरिक चोट पर मरहम लगा सकते हैं लेकिन आपके दिल पर लगी चोट के लिए कोई मरहम नहीं होती है।

3. सबसे अधिक दर्द का सामना करने वाले अक्सर वह लोग होते हैं जो हमेशा दूसरों को खुश रखने की कोशिश कर रहे होते हैं।

4. भावनात्मक दर्द के दौरान आप अक्सर महसूस करते हैं कि आप अकेले हैं और आपको हर जगह इसके साक्ष्य मिलेते भी रहते हैं।

5. दर्द के खिलाफ गुस्सा एक प्राकृतिक ढाल है। जब कोई कहता है कि ‘मैं तुमसे नफरत करता हूं’ तो उनका वास्तव में मतलब है ‘आपने मुझे चोट पहुंचायी है’।

6. दर्द लोगों को बदलता है जिससे वह दूसरों पर कम विश्वास करते हैंं और अधिक सोचते हैं और खामोश रहना ज्यादा पसंद करते हैं।

7. जब आप बहुत लंबे समय तक दर्द को दिल में रखते हैं तो यह आपके मनोभावों को प्रभावित करता है, फिर जब आपके साथ कुछ बुरा होता है तो आप रोते या शिकायत नहीं करते हैं, आप बस वहां बैठे रहते हैं और कुछ भी महसूस नहीं करते हैं।

8. कभी-कभी दर्द होने पर खुश होने का नाटक करना सिर्फ एक उदाहरण है कि आप एक व्यक्ति के तौर पर कितने मजबूत हैं।

9. दूरियां हमेशा खराब नहीं होती हैं। कभी-कभी थोड़ी दूरी बनाने से लोगों को यह पहचानने में मदद मिलती है कि आप वास्तव में उनके लिए कितना मतलब रखते थे।

10. भावनात्मक दर्द हमेशा सजा नहीं होता या फिर ऐसा कुछ नहीं होता जिसे हमने अनजाने में अपने जीवन में आकर्षित कर लिया हो। कभी-कभी इसके होने का मकसद बस इतना होता है कि जीवन में हम कुछ सीखें और आगे बढें।

दिल ने मांगी है दुआ

जब जीवन में घना अंधेरा होता है और कोई राह नहीं सूझती है तब प्रार्थना से फूटती है प्रकाश की किरण जो डूबते को तिनके का सहारा साबित होकर हमारे टूटे हुए आत्मविश्वास को धीरे-धीरे फिर से जोड़ने का काम करती है।

प्रार्थना हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है। शोध से पता चला है कि सर्जरी के बाद होने वाले घावों के भरने में प्रार्थना मरहम का काम करती है। यह हमारे दिल को मजबूत बनाकर हमारी धड़कनों को सामान्य करती है। प्रार्थना करने से हमारा इम्यूनिटी सिस्टम बेहतर होता है।

प्रार्थना करने से न केवल हमारी एकाग्रता बढ़ती है बल्कि इससे हमें अपने मन में झांकने का मौका मिलता है। इससे हममें सही-गलत में फर्क करने की समझ बढ़ती है और बेचैनी से निजात मिलती है। एक शोध से पता चला है कि जो लोग नियमित रूप से प्रार्थना करते हैं उनमें अवसाद की समस्या कम होती है और वे दूसरों की तुलना में अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर पाते हैं।

प्रार्थना इंसान द्वारा उत्पन्न की जाने वाली ऊर्जा का सबसे सशक्त रूप है। दिल से निकली हुई प्रार्थना कभी निरर्थक नहीं जाती है। विज्ञान भी प्रार्थना की ताकत को मानता है और जिदंगी के अनेक अवसरों पर यह साबित भी हुआ है कि इंसान को दवा के साथ-साथ दुआ की भी जरूरत होती है

जरूरी नहीं है कि प्रार्थना अपने लिए ही की जाए, हम प्रार्थना दूसरों के लिए भी कर सकते हैं। कहते हैं कि दूसरों के लिए की गई दुआ जल्दी कुबूल होती है। प्रार्थना हमें यह अहसास दिलाती है कि हम अकेले नहीं हैं, कहीं कोई है जो हमारा बोझ उठाने में हमारी मदद कर रहा है।

कुछ बातें जो बहुत कीमती हैं

एक 05 वर्ष का लड़का अपनी 3 वर्ष की छोटी बहन के साथ मेले में घूम रहा था। मेले में खिलौने की दुकान के सामने उसकी बहन रूक गई और दुकान की शेल्फ में रखी हुई एक सुंदर सी गुड़िया को निहारने लगी।

लड़का अपनी बहन का हाथ पकड़कर दुकान के अंदर जाकर काउंटर पर बैठे हुए व्यक्ति से बोला अँकल वहां जो गुडिया रखी है न वो मेरी बहन को बहुत पसंद है क्या कीमत है उस गुड़िया की? फिर उसने अपनी जेब में हाथ डालकर 5 रू. का सिक्का निकाला और कहने लगा कि अंकल मेरे पास बस इतने ही पैसे हैं, दुकानदार ने जब कोई जवाब नहीं दिया तो वह लड़का कुछ सोचते हुए अपनी बहन से बोला मुन्नी तुम यहीं रूको मैं अभी आता हूँ।

थोड़ी देर बाद वह लड़का जब वापस आया तो उसके हाथ में एक थैला था उसने आते ही थैला दुकान के काउंटर पर पलट दिया। उस थैले से निकले हुए कागज के छोटे-छोटे टुकड़े काउंटर पर बिखर गए। दुकान का मालिक जो दूर से ही यह सब देख रहा था काउंटर के पास आया और लड़के से बोला कि बेटा ये सब क्या है? लड़के ने कहा अकंल ये नये पैसे हैं जिन्हें मैंने अभी बनाया है।

दुकान का मालिक अधेड़ उम्र का एक सुलझा हुआ व्यक्ति जिसने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे थे । वह काउंटर पर बैठकर उन कागज के टुकड़ों को एेसे गिनने लगा मानो वो असली के नोट हों, उस लड़के ने उससे पूछा कि अकंल क्या पैसे अभी भी कम हैं?

दुकानदार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया नहीं बेटा ये पैसे तो गुड़िया की कीमत से भी ज्यादा हैं। एेसा कहते हुए उसने कुछ कागज के टुकड़ों को अपनी जेब में रख लिया और छोटी बच्ची को वह गुड़िया दे दी।

गुड़िया पाकर वह बच्ची खिलखिला उठी, अपनी बहन को खुश देखकर उस लड़के के चेहरे पर प्रसन्नता और सुकुन दिखने लगा उसने दुकानदार का शुक्रिया किया और अपनी बहन का हाथ पकड़कर दुकान से चला गया।

दुकान का मुनीम आश्चर्यचकित होकर यह सारा घटनाक्रम देख रहा था। जब वह छोटा लड़का और उसकी बहन वहां से चले गये तो वह मालिक के पास आया और बोला सेठजी आपने इतनी महंगी गुड़िया केवल कागज के कुछ टुकड़ों के बदले मे दे दी?

सेठजी हंसते हुए बोले मुनीम जी, हमारे लिये ये केवल कागज के टुकड़े हैं पर उस पांच साल के बच्चे के लिये उसका बहुत मूल्य है पांच साल का वह बच्चा समझता है कि कागज के इन टुकड़ों के बदले वह दुनिया में कुछ भी खरीद सकता है, इस उम्र में वो नहीं जानता, कि पैसे क्या होते हैं?

पर जब वह बडा होगा ना, और जब उसे याद आयेगा कि उसने अपने बनाए हुए कागज के टुकड़ों के बदले बहन के लिए गुड़िया खरीदकर दी थी। तब उसे मेरी याद जरुर आयेगी, और फिर वह सोचेगा कि इस दुनिया में अच्छे इंसान भी हैं ।

वह समझेगा का कि जिदंगी में कुछ बातें पैसे भी ज्यादा कीमती होती हैं, यही बात उसके अंदर सकारात्मक सोच बढानेे में मदद करेगी वह भी दूसरों की जरूरत के समय उनकी मदद करेगा और एक अच्छा इंन्सान बनने के लिये प्रेरित होगा। इस तरह यह दुनिया पहले से और बेहतर बन जाएगी।