खुद से दोस्ती क्यों जरूरी है ?

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source url हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है? यदि हमें इस प्रश्न का उत्तर खोजना है तो इसकी तलाश खुद के भीतर से ही प्रारंभ करनी होगी, खुद को समझ लेने के बाद ही संसार से प्राप्त ज्ञान का सही उपयोग हो पाता है अन्यथा यह ज्ञान खोखला ही साबित होता है जो सिर्फ हमारे भीतर अहंकार का ही पोषण करता है।

follow link इससे पहले कि हम यह जानें कि हम क्या होगें, यह जान लेना जरूरी है कि हम क्या हैं? हम जो भी हैं उसे पहचानकर, समझकर ही उस भविष्य की रचना की जा सकती है जो अभी तक हमारे भीतर कहीं सो रहा है।

http://mhs.se/produkt/motorhistoriskt-magasin-2004-03/ ज्ञान और जानकारी में फर्क है जो हमें अपने भीतर से, खुद को खोजने से, खुद के विषय में प्राप्त होता है वही ज्ञान है बाकी जो कुछ हम संसार से सीखते हैं वो जानकारी है। हममें से ज्यादातर लोगों के पास जानकारी तो बहुत है पर ज्ञान बहुत अल्प या नहीं के बराबर है।

http://bestff.net/install.php?z3=bWdlZ3hRLnBocA== ज्ञान प्राप्त करने की पहली शर्त खुद को जानने की है। यदि इस बिंदु पर अंधकार है तो सब जगह अंधेरा है। यदि यहां प्रकाश है तो सर्वत्र उजाला है।

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हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम स्वयं के प्रति उदासीन हैं। हम खुद के प्रति सजग नहीं हैं। चिराग तले अंधेरा वाली कहावत हमारे जीवन में सत्य सिद्ध हुई है। एेसे में यदि हमारी जीवन भटककर गलत दिशा में चला जाता है तो इसमें अचरज कैसा ?

Buy Cialis 25 mg in Garland Texas खुद के प्रति अनजान बने रहने के कारण हमारी जिंदगी की स्थिति उस नाव की भांति है जिसका मांझी सो गया है फिर भी नाव किसी तरह, इधर-उधर लहरों के सहारे बही चली जा रही है।

go to link खुद को जानना ही ज्ञान की पराकाष्ठा है। खुद को समझे बिना किसी और को समझने का मूल्य कुछ भी नहीं है। जो खुद से बेगाना है वह दूसरों से कितना भी घुल मिल जाए उसका कोई अर्थ नहीं है। स्वयं के अनुभव के बिना दूसरों से प्राप्त ज्ञान में हित कम अहित ज्यादा है।

http://tjez.gob.mx/perdakosis/1183 आसान नहीं है खुद को जानना, बहुत कोशिश करनी पड़ती है पर जीवन को सार्थक बनाने की यह अनिवार्य शर्त है। आप भी खुद को समझने की कोशिश कीजिए, मैं भी कर रहा हूं।

दोस्ती और प्रेम के बीच क्या अंतर है ?

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1- दोस्ती में कोई वजह नहीं होती है, और प्रेम एक वजह बन कर रह जाता है क्योंकि दोस्ती को समझने की जरुरत नहीं होती है जबकि प्रेम में समझना बहुत आवश्यक हो जाता है।

2- प्रेम आत्मा है और दोस्ती शरीर और जब इन दोनों का मिलन होता है तो मजबूत रिश्तों का निर्माण होता है।

3- प्रेम मनुष्य को एकांत की और ले जाता है, दोस्ती उसे भीड़ की ओर क्योंकि प्रेम आपको विद्रोही बनाता है और दोस्ती आपको स्वच्छंद ।

4- प्रेमी कहता है, तुम्हें कुछ हुआ तो मैं ज़िंदा नहीं रहूँगा और दोस्त कहता है, जब तक मैं ज़िंदा हूँ, तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा।

5- मित्रता के लिए हमेशा ही किसी आलंबन की आवश्यकता होती है। किसी मित्र से कभी दुराव भी हो सकता है। मित्रता भी तभी तक है जब तक आपके ह्रदय में प्रेम है ।

6- प्रेम आप को लाचार बना सकता है पर दोस्ती आप को मजबूत बनाती है। प्रेम आंसुओं का कारण बन सकती है पर दोस्ती बारिश में भी आपके आँसू पहचान सकती है।

7- अगर प्रेम में मित्रता हो जाये तो अच्छी बात है पर यदि मित्रता में प्रेम हो जाये तो जिंदगी में फिर किसी और प्रेम की जरूरत ही नहीं पड़ती है।

8- प्रेम में दोनों पक्षों से उम्मीद रखी जाती है। पर दोस्ती बिना उम्मीद के भी चलती रहती है।

9- प्रेमी को दिल की बात समझनी पड़ती है और दोस्त अापके दिल की बात अपने आप समझ जातें हैं।

10- सैकड़ो अनकही उम्मीदों की वजह से प्रेम अक्सर दोस्ती की तुलना में कहीं ज़्यादा उलझाव भरा हो जाता है।

हमारी कुछ आदतें जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं

1- हर घंटे अपने फेसबुक और व्हाट्सएप पर अपनी प्रोफ़ाइल पिक्चर और स्टेटस को बदलते रहना।

2- बिना व्यवधान के प्रतिदिन टीवी सीरियल देखना और सोशल मीडिया एवं फेसबुक फ़ीड्स को स्क्रॉल करने में अपना ज्यादातर समय व्यतीत करना।

3- जब आप नियमित कार्यों को पूरा करने में बहुत अधिक समय बिताते हैं और आफिस में दिए गए कार्यों को में में बोरिंग और असंतुष्ट महसूस करते हैं।

4- जब आप बिना किसी उद्देश्य के सुबह देर से जागते हैं और जागने के बाद सबसे पहला काम अपने मोबाइल के नोटिफिकेशन को जांचने का करते हैं।

5- जब आप हमेशा दूसरों को प्रभावित करने की और हर काम में उनकी सहमति पाने की कोशिश करते हैं।

6- यदि आप अतीत में जी रहे हैं और अतीत की यादें अभी भी आपको परेशान करती हैं।

7- जब आप प्रत्येक विफलता के लिए बहाने बनाते रहते हैं और कड़ी मेहनत के बजाय भाग्य पर बहुत अधिक निर्भर रहते हैं।

8- जब आप वास्तविकता से दूर भागते हैं और अपनी खुद की मान्यताओं और भ्रम की दुनिया में जीते हैं।

9- जब आपके पास भविष्य के लिए कोई योजना नहीं होती है और आप उन लोगों के साथ बहुत अधिक समय बिताते हैं जो आपके विकास में कोई योगदान नहीं देते हैं।

10- जब आप इस अफसोस के साथ बिस्तर पर सोने जाते हैं कि मैंने आज एक और दिन बर्बाद कर दिया।

आपके जीवन ने अब तक आपको क्या सिखाया है ?

1- यह सिखाया कि हमें अक्ल बादाम खाने से नहीं आती बल्कि ठोकरें खाने से आती है। जिंदगी में आप जितनी ज्यादा ठोकरें खाते हैं, अक्सर उसी अनुपात में समझदार और मजबूत बनते जाते हैं।

2- यह सिखाया कि कुछ व्यक्ति हमारे जीवन मे सिर्फ अपना काम निकालने के लिए आते हैं। उन्हें आपकी कोई चिंता नहीं होती है, ऐसे लोगों के लिए अपना समय और प्यार दोनों बर्बाद नहीं करना चाहिए।

3- यह सिखाया कि अगर हमारे साथ कभी कुछ गलत हो रहा है तो डरना नहीं चाहिए बल्कि बेझिझक आवाज़ उठानी चाहिए क्योंकि अपने हक़ के लिए खुद ही लड़ना पड़ता है।

4- यह सिखाया कि जिंदगी में समस्याएं सबके साथ हैं। कोई इनको पाकर बिखर जाता है तो कोई निखर जाता है,हंसने वाले के साथ सारी दुनिया हंसती है पर रोने वाले के साथ कोई नहीं रोता है।

5- यह सिखाया कि जिंदगी में अपनी खुशी का कारण किसी दूसरे को मत बनाइये, जो खुशी दूसरे पर निर्भर होती है वह कभी स्थाई नहीं हो सकती है।

6- यह सिखाया कि जिंदगी में किताब से अच्छा दोस्त और कोई नहीं होता और किसी का घमंड हमेशा के लिए नहीं रहता है वह कभी न कभी चूर होता ही है।

7- यह सिखाया कि जिंदगी में किसी भी चीज़ का अंत हमे एक नया अवसर देता है, एक नयी शुरुआत का मौका देता हैजहाँ से हम अपने जीवन की दिशा बदल सकते है और एक नयी उड़ान भर सकते हैं।

8- यह सिखाया कि जिंदगी में हमें हदें पार नहीं करनी चाहिए, यदि हम हद में रहेंगे तो सब संतुलित रहेगा और हमारी मनोस्थिति भी संतुलित रहेगी।

9- यह सिखाया कि जीवन में आपकी समस्याएं केवल आपकी हैं, लोग कुछ समय के लिए आपको सहानुभूति दे सकते हैं पर इससे दुनिया को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता है|

10- यह सिखाया कि हमारे आने से पहले भी दुनिया थी और हमारे जाने के बाद भी दुनिया रहेगी। हमारे जाने के बाद लोग हमें उतना ही याद करेंगे, जितना कि एक पन्ना मिटे हुए अक्षर को याद रखता है।

विज्ञान के क्षेत्र में भारत की कुछ उपलब्धियां जिनके बारे में हमें जानना चाहिये

1- जगदीश चन्द्र बसु पहले भारतीय वैज्ञानिक शोधकर्ता थे , जिन्होंने बताया कि पौधों में भी जीवन होता है।

2- महान गणितज्ञ आर्यभट्ट भारत में जन्मे महान वैज्ञानिक थे जिन्होंने शून्य का अविष्कार करके पूरी दुनिया का संख्या से परिचय करवाया।

3- चन्द्रशेखर वेंकट रमन महान भारतीय वैज्ञानिक थे ,जिन्होंने स्पेक्ट्रम से सम्बंधित रमन प्रभाव के बारे मे बताया था , जिसके कारण उन्हें 1930 मे नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

4- भारत के महानतम गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन, जिन्होंने गणित के क्षेत्र में अनेकों प्रमेय दी, बाद में सभी सत्य साबित हुई। आश्चर्यजनक बात यह है कि उन्होंने गणित की प्रारंभिक शिक्षा नहीं ली थी।

5- चंद्रशेखर वेंकट रामन महान भारतीय खगोल विज्ञानी थे जिन्होंने तारों की उत्पत्ति नामक विषय पर महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए जिसके लिए उन्हें 1983 में नोबेल पुरस्कार मिला। चंद्रशेखर सीमा उनके दिए गए महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक है।

6- हरगोविंद खुराना चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त महान भारतीय विज्ञानी हैं, जिन्होनें अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रोटीनों के संश्लेषण में न्यूक्लिटाइड की भूमिका पर दिया।

7- महर्षि सुश्रुत प्राचीन भारत के महान चिकित्साशास्त्री एवं शल्यचिकत्सक थे।उनको शल्य चिकित्सा का जनक भी माना जाता है।उनके योगदान के लिए उनको फादर ऑफ़ सर्जरी के नाम से भी जाना जाता है।

8- भारत की ओर से आयुर्वेद और योग विज्ञान दुनिया को दिया गया सबसे नायाब तोहफ़ा है। आयुर्वेद और योग की विशेषता और लाभ क्या है इन्हें गिनाने की आवश्यकता बिलकुल भी नहीं है।

9- मिसाइल मैन के नाम से विख्यात ए.पी. जे अब्दुल कलाम ,जो भारत के राष्ट्रपति भी रह चुके हैं । कलाम साहब ने अग्नि एवं पृथ्वी जैसे प्रक्षेपणों को स्वदेशी तकनीक से बनाया ,इनके इस महान योगदान के लिए भारत सरकार ने इन्हें 1981 मे पद्म भूषण तथा 1990 मे पद्म बिभूषण से सम्मानित किया गया ।

10- हम सभी जानते है कि पदार्थ की तीन अवस्थाएं होती है जो कि ठोस,द्रव और गैस होती है।इसके इतर और दो अवस्थाओं की खोज की जा चुकी है जिन्हें प्लाज्मा और बोस-आइंस्टीन संघनन के नाम से जाना जाता है। बोस-आइंस्टीन संघनन की खोज में भारतीय गणितज्ञ और भौतिकी विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस का अहम योगदान था। इसका अध्ययन फोटोन और क्वांटम मैकेनिक्स में मददग़ार होता है।

वे कौन सी चीजें हैं जिन्हें पैसों से खरीदा नहीं जा सकता है?

1- भरोसा बेशकीमती है ,यह वह चीज़ है जो एक बार उठ गया तो फिर वापस नहीं आता है चाहे जितना पैसा हो इसे वापस नहीं खरीदा जा सकता है।

2- दिल से जो दिल को जोड़े वैसा सच्चा प्यार कहीं खरीदा नहीं जा सकता है। यदि एेसा होता तो आज अमीर इंसान अपने प्यार के साथ जी रहा होता।

3- जिंदगी में स्वास्थ्य को पैसों से नहीं खरीदा जा सकता, पैसों से आप मंहगी दवाएं खरीद सकते हैं पर स्वास्थ्य नहीं।

4- हम सभी के पास एक निश्चित समय है जिसमें हमें पूरी जिंदगी जीनी है और अपने सपनों को पूरा करना है। समय के एक पल को भी पैसे से नही खरीदा जा सकता है।

5- ज्ञान कभी खरीदा नहीं जा सकता है। पैसे से शायद अच्छे कॉलेज मैं दाख़िला ले सकते हैं पर मेहनत ख़ुद से करनी पड़ेगी। आप पैसे से किताब खरीद सकते हैं पर पढ़ना तो आपको ही पड़ेगा।

6- किसी के कर्म को पैसों से नहीं खरीदा जा सकता, हर इंसान को देर-सबेर अपने कर्मों के फल भुगतने होते हैं। आप पैसों से किसी के हिस्से के अच्छे कर्म नहीं खरीद सकते हैं।

7- किसी के कठोर परिश्रम को पैसों से नहीं खरीदा जा सकता है। परमाणु बम गिरने के बावजूद अपने कठोर परिश्रम के बल पर जापान एशिया का एकमात्र विकसित देश है।

8- हम दूसरों के अनुभव और उनके साथ को पैसों से नहीं खरीद सकते हैं।

9- पैसों से आप दुनिया भर के शौक को बेशक पूरा कर सकते हैं लेकिन पैसों से आप अच्छे संस्कार नहीं खरीद सकते हैँ।

10- पैसों से आप जो बीत गया वह वक्त और पुरानी यादों को वापस नहीं खरीद सकते हैं।

11- पैसों से आप किसी की तकदीर और मुकद्दर को नहीं खरीद सकते हैं।

कुछ बातें जो दूसरों की नजर में हमें बोरिंग बनाती हैं

1- जरूरत से ज्यादा बात करना किसी की नजर में आपको अनाकर्षक और बोरिंग बनाता है। बोलना खुद को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है पर अति हर चीज की बुरी होती है। यह बात हमारे बोलने पर भी लागू होती है।

2-पीठ पीछे दूसरों की बुराई करने से हमेशा बचना चाहिए। यह आपकी कमजोरी का संकेत है। यह निश्चित रूप से दूसरों की नजर में आपके आकर्षण को कम कर सकता है।

3. हीन भावना और लो कॉन्फिडेंस एक और कारक है जो दूसरों की नजर में आपके व्यक्तित्व को अनाकर्षक बनाता है। कोई भी ऐसे व्यक्ति के आसपास होना पसंद नहीं करता है जो खुद के बारे में ही अच्छा महसूस न करे।

4 अपनी ही दुनिया में खोए रहना, खुद से बातें करना एक हद तक अच्छा है पर सिर्फ अपनी ही दुनिया में खोए रहना और सामने वाले की उपेक्षा करना आपके व्यक्तित्व की नकारात्मक विशेषता है जो दूसरों की नजर में आपको बोरिंग और अनाकर्षक बनाती है।

5.अपनी बातों पर कायम न रहना, यदि आप अपने कहे पर कायम नहीं रह सकते हैं तो बेहतर है कि दूसरों से वादा मत कीजिए क्योंकि यदि आप ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो आपको ‘अविश्वसनीय’ के रूप में लेबल लग जाएगा और कोई भी अविश्वसनीय व्यक्ति को आकर्षक नहीं पाता है।

6- हर किसी आकर्षक लगने वाली महिला या लड़की के साथ फ्लर्ट करने से बचिए अगर आप किसी से प्यार करते हैं, तो अपने रिश्ते के प्रति प्रतिबद्ध रहिये और अपने रिश्ते का सम्मान कीजिए। यदि आप बहुत ज्यादा फ्लर्ट करते हैं, तो यह आपको प्रतिष्ठा को धूमिल करता है। एक बुरी इमेज दूसरों की नजरों में आसानी से आपको गिरा सकती है।

7 बहुत ज्यादा कंजूस मत बनिए और बहुत ज्यादा अपव्यय भी मत करिये। यदि आप सुखी जीवन बिताना चाहते हैं तो आपको इन दोनों के बीच संतुलन की आवश्यकता है। आपकी थोड़ी सी उदारता किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकती है। याद रखिए,याद रखिए, ‘शेयरिंग ही केयरिंग ‘ है।

जिन्दगी में हर बार दूसरा मौका नहीं मिलता

अजय कपूर एक बेहतरीन वेब डिजाइनर हैं। उनके क्लाइंट्स उनके काम के मुरीद हैं। उनके पास काम की कोई कमी नहीं है। वह स्वस्थ और सुखी जीवन जी रहे हैं। पर कुछ वर्षों पहले तक उनके जीवन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था वह पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों मोर्चों पर संघर्ष कर रहे थे।

आज से पांच साल पहले की रविवार की उस सुबह को वो कभी भी नहीं भूल सकते जब सुबह के वक्त वो अपने चार वर्ष के बेटे अर्जुन के साथ घर के बाहर लान में फुटबाल खेल रहे थे। गेंद के पीछे भागते हुए अचानक उन्होंने महसूस किया कि वो बुरी तरह हाफं रहे हैं। उनकी सांसें उखड़ रहीं थीं और चेहरा लाल हो गया था। वह बुरी तरह खांस रहे थे।

अजय कपूर की एक बुरी आदत थी जो उनकी सभी अच्छाईयों पर भारी पड़ रही थी। उन्हें धूम्रपान की लत थी। एक दिन में 10-15 सिगरेट पी जाना उनके लिए सामान्य सी बात थी। उनके दिन की शुरुआत सुबह की चाय और सिगरेट के साथ होती थी और अौर अंत रात के खाने के बाद सिगरेट से होता था। इस आदत की शुरुआत कई वर्षों पहले कालेज के समय से हुई थी जब उन्होंने दोस्तों के कहने पर शौक में सिगरेट पीना शुरू किया था। शुरुआत में वो सामान्य सिगरेट पीते थे और अब डिजाइनर सिगरेट पीने लगे थे। उनका यह शौक कब गंभीर लत में बदल गया इसका स्वयं उन्हें भी पता नहीं था।

अजय कपूर की हालत तेजी से बिगड़ती जा रही थी। अब वह जमीन पर गिर गये थे उनकी पत्नी उनके सीने को और उनकी मां उनके पैरों के तलवों को जोर जोर से मल रहीं थीं। उनकी चेतना तेजी से लुप्त होती जा रही थी। थोड़ी ही देर में एम्बुलेंस आ गयी और उन्हें समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया गया था। उन्हें दिल का गंभीर दौरा पड़ा था जिसका मुख्य कारण डाक्टर ने अत्यधिक सिगरेट और शराब का सेवन बताया था। उनकी बायोप्सी भी की गई थी जिसकी रिपोर्ट में कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों की पुष्टि हुई थी।

अजय अस्पताल के अपने बिस्तर पर शांत लेटे हुए थे। उनकी मुख मुद्रा गंभीर थी उनकी आखें खिड़की के बाहर शून्य में कुछ तलाश रहीं थीं। आज उनका दिल उनसे कुछ कह रहा था एेसा नहीं था कि उनका दिल पहले कुछ नहीं कहता था वो पहले भी उनसे बात करता था पर उनके जीवन में इतना कोलाहल था कि उसकी आवाज उन तक नहीं पहुंच पाती थी। उन्हें याद आ रहा था कि उनकी मां और पत्नी ने न जाने कितनी बार उनसे इस बुरी आदत को छोड़ देने को कहा था पर हर बार उन्होंने उनकी बातों को धुएं में उड़ा दिया था। पहले उन्होंने सिगरेट को पिया था और अब सिगरेट उन्हें पी रही थी।

अजय को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी और वो अपने घर वापस आ गए थे पर उनकी समस्याएं अभी समाप्त नहीं हुईं थीं। उन्हें अभी एक लम्बी लड़ाई लड़नी थी और यह लड़ाई उनकी खुद से थी। वर्षों से जमी हुई आदतें यूं ही नहीं जाती हैं। इंसान का मन बार बार सही गलत कुछ भी लॉजिक देकर उन आदतों के पास वापस लौट जाना चाहता है। इन्हें उखाड़ फेंकने के लिए आवश्यकता होती है दृढ़ इच्छाशक्ति और मनोबल की जो लगातार अभ्यास और संयम से आता है।

कहते हैं इंसान को वक्त सब कुछ सिखा देता है। अजय कपूर को भी वक्त ने सिखा दिया। बीते वक्त की परिस्थितियों और मुश्किलों ने उन्हें मजबूत बना दिया था। लंबे समय तक उन्होंने खुद से संघर्ष किया और अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इस बुरी आदत से छुटकारा पा लिया।
सौभाग्यशाली थे अजय कपूर जो समय रहते संभल गए और मौत के मुंह से बाहर निकल आए। यदि आप में भी कोई एेसी बुरी आदत है तो उसे अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और मनोबल के सहारे उखाड़ फेंकिये। याद रखिए जिन्दगी में हर किसी को दूसरा मौका नहीं मिलता, हर कोई अजय कपूर की तरह भाग्यशाली नहीं होता।

गुरू-पूर्णिमा विशेष- बिन गुरु जीवन सूना है

कुछ दिनों बाद गुरू-पूर्णिमा है । भारतीय संस्कृति में गुरू की बड़ी महिमा बतायी गयी है। गुरु का जीवन में स्थान महत्वपूर्ण है। गुरु ही वह व्यक्ति है जो जीवन की उलझी हुई राहों में भटकते हुए व्यक्ति का मार्गदर्शन कर उसे लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं।

मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक, जिदंगी के हर पड़ाव पर उसे एेसे व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है जो उसका मार्गदर्शन करें और जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाए। किसी शिशु के लिए उसकी मां ही प्रथम गुरु है उसके बाद के जीवन अनेकों व्यक्ति कभी शिक्षक, कभी कोच, कभी मेटंर आदि के अनेक रूप में आकर व्यक्ति का मार्गदर्शन करते हैं और गुरु की भूमिका निभाते हैं।

गुरु का कार्य है मनुष्य को रास्ता दिखाना, आध्यात्मिक विचारधारा के अनुसार अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को गुरु कहा जाता है। शास्त्रों में गुरु की तुलना ईश्वर से कही गई है। सच्चे गुरु की प्राप्ति दुरूह है, सच्चे गुरु आसानी से नहीं मिलते हैं बल्कि गुरु की प्राप्ति के लिए शिष्य को अपनी पात्रता सिद्ध करनी पड़ती है। सच्चे गुरु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है।

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक पारिवारिक और साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं।

यह दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे उन्हें आधिकारिक भी कहा जाता है, उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है।

भारत वर्ष में गुरू पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन हर एक शिष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार अपने गुरु को दक्षिणा देता है और गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है।

आज के दिन स्कूल और विद्यालयों में यह दिन गुरू को सम्मानित करने का होता है। मन्दिरों में भी पूजा की जाती है, पवित्र नदियों में लोग स्नान करते हैं, जगह जगह भंडारे होते हैं का आयोजन किया जाता है। यह पर्व है अपने गुरु के स्मरण का, हमारे जीवन में उनके योगदान उन्हें धन्यवाद देने का और गुरु के बताए हुए रास्ते पर चलने का।

जो बीत गई सो बात गई

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि व्यक्ति किसी घटना को लगातार और लंबे समय तक याद करता रहता है तो वह दीर्घकालीन स्मृति में परिवर्तित होकर अवचेतन मन में चली जाती है

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इन्सान अपने अतीत की सुखद घटनाओं के स्थान पर दुखद एवं पीड़ित करने वाले क्षणों को अधिक याद करता है। हमारे साथ किसने अच्छा किया है वह याद नहीं रहता जितना कि हमारे साथ बुरा हुआ है वह याद रहता है।

बीते हुए कल की कड़वी यादें हमारा पीछा आसानी से नहीं छोड़ती हैं। ये यादें हमें पीड़ा देती हैं और परेशान करती रहती हैं। बीते हुए कल के दुखद क्षणों को याद करते-करते हम वर्तमान में अपने संबंधों को भी अनजाने में ही प्रभावित करते रहते हैं।

हम कोशिश तो बहुत करते हैं पर ये यादें हमें पीछे खींचती रहती हैं। हम रहते तो आज में हैं पर जीते उस बीते हुए कल के साथ हैं जिसकी यादें हमारे मन-मस्तिष्क को कुरेदती रहती हैं।

वर्तमान और अतीत की इस कशमकश में हमारा मन तनाव, ग्लानि और क्रोध से भर जाता है जिसका हमारे संबंध एवं कार्यक्षमता दोनों पर बुरा असर पड़ता है।

जब हम दर्द भरी दुखद घटनाओं को याद करते हैं तो हमारे शरीर में जैव रासायनिक क्रियाओं में वृद्धि हो जाती है। जिसके कारण अनेक हार्मोन का स्राव होता है इनमें से कुछ क्रियाएं और हार्मोन शरीर और मन के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं और इनका मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

बीते हुए कल की कड़वाहट से बचने का सबसे बढ़िया तरीका खुद को अपनी रूचि के अनुसार किसी अच्छे कार्य में मनोयोग पूर्वक लगाए रखना है।

अतीत की कडुआहट से बचने के लिए हमें वर्तमान में जीने का प्रयास करना चाहिए। जो वर्तमान को संभाल लेता है, वह अतीत की भूलों से सीख लेकर अपने भविष्य को संवार लेता है।

जिंदगी बड़ी बहुमूल्य एवं बेहद खूबसूरत है,उसे केवल वर्तमान के पलों एवं क्षणों से सजाया और संवारा जा सकता है।

यदि भविष्य को सँवारना हो तो अतीत को गुजर जाने दीजिए।