चला गया भारतीय राजनीति का शिखर पुरूष

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click श्री अटल बिहारी वाजपेयी को हमेशा एक सज्जन राजनेता, प्रखर वक्ता और एक महान आत्मा के रूप में याद किया जाएगा। इन सबसे बढ़कर वह एक प्रेमपूर्ण, दयालु और महान इंसान थे।

trading on line per principianti संसद में और सार्वजनिक रैलियों में उनके भाषणों को सुनना लोंगों बहुत खुशी देता था। यहां तक कि उनके विरोधियों ने भी हमेशा उनकी प्रशंसा की और सम्मान किया। उनके पास सबसे कठिन मुद्दों पर भी लगभग सभी को साथ लेने और आम सहमति विकसित करने की अद्भुत क्षमता थी।

citas eps sura medellin por internet प्रधानमंत्री के रूप में उनका 1999-2004 तक का कार्य़काल भारत की स्वर्णिम अवधि के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षण से लेकर, कारगिल युद्ध, गोल्डन चतुर्भुज जैसी कई परियोजनाएं शुरू कीं, जिन्होंने भारत के बुनियादी ढांचे को बदल दिया और हर मोर्चे पर मजबूत भारत का निर्माण किया।

mujer soltera con hombre casado उन्हें मानवता के प्रेमी के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने पाकिस्तान के साथ शांति बनाने के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश की और विपक्ष के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखा। उन्होंने सीमावर्ती आतंकवाद और कश्मीर पर चर्चा के लिए 14-16 जुलाई, 2001 से दो दिवसीय आगरा शिखर सम्मेलन की बैठक के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को भारत में आमंत्रित किया।

follow link इसके अलावा, वाजपेयी ने 1 9 फरवरी, 1999 को ऐतिहासिक दिल्ली-लाहौर बस के उद्घाटन के साथ भारत और पाकिस्तान के बीच सड़क कनेक्टिविटी कायम करने का प्रयास किया।

http://josiart.at/rete/7850 हम सब उन्हें बहुत याद करेंगे।

go भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।

भारतीय स्वतंत्रता दिवस के बारे में कुछ रोचक तथ्य जिन्हें आपको जानना चाहिय़े

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1- उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, बहरीन और कांगो गणराज्य भारत के साथ 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस साझा करते हैं।

kytril tablets 2mg 2- जब 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतंत्र हुआा तब देश का कोई राष्ट्रीय गान नहीं था। यद्यपि जन गण मन को बंगाली भाषा में 1911 में लिखा गया था, पर इसे 1950 से पहले तक राष्ट्रीय गान का दर्जा नहीं मिला था।

toprol xl 25 mg cut in half 3- भारत की आजादी के बाद, पुर्तगाल ने अपने संविधान में संशोधन किया और गोवा को पुर्तगाली राज्य घोषित कर दिया। 19 दिसंबर, 1961 को भारतीय सैनिकों ने गोवा पर हमला किया और भारत में वापस इसका विलय किया।

1 mg abilify 4- स्वतंत्रता के मुख्य वास्तुकार महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग नहीं लिया था। इसके बजाए, उन्होनें कलकत्ता में पूरे दिन उपवास किया और दिन भर प्रार्थना की उन्होनें सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में उस दिन उपवास किया था जो देश में व्यापक पैमाने पर हो रही थीं।

5- आजादी के बाद देश के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू को ग्लोबल स्टाइल आइकन के रूप में माना जाता था, उनके प्रसिद्ध नेहरू जैकेट दुनिया भर में हिट बन गए थे। उन्हें प्रसिद्ध फैशन पत्रिका वोग में भी जगह मिली थी।

6- महान क्रांतिकारी भगत सिंह अनेक अलग-अलग भाषाओं में निष्णात थे। उनका अंग्रेजी, अरबी, फ्रेंच, स्वीडिश, हिंदी, पंजाबी और मुल्तानी पर समान रूप से अधिकार था।

7- आजादी के समय भारत में 562 रियासतें थीं। इन राज्यों में से 560 भारत में स्वेच्छा से शामिल हो गए और शेष दो (जूनागढ़ और हैदराबाद) का सेना द्वारा भारत में विलय हुआ था।

8- आजादी के समय भारतीय रूपया $ 1 के बराबर था। पेट्रोल की कीमत 1.8 रुपये प्रति लीटर थी और सोने 88 रुपये, 62 पैसे प्रति 10 ग्राम था।

पुरूष होने के कुछ साइड इफेक्ट क्या हैं ?

1- एक 27 वर्षीय बेरोजगार भारतीय महिला के पास विकल्प है, घर पर रहने का और किसी एेसे व्यक्ति से शादी करने का जो उसे लक्जरी लाइफ दे सके वहीं दूसरी तरफ एक 27 वर्षीय बेरोजगार भारतीय पुरूष, उसे बहुत चिंता करने की जरूरत है और शायद अगले कुछ सालों के लिए उसे शादी को भूल जाना चाहिए।

2- एक पति के रूप में, एक पिता के रूप में, एक बेटे के रूप में और एक भाई के रूप में आम तौर पर एक पुरुष को परिवार में हर किसी की इच्छा पूरी करनी होती है और खुद की इच्छाओं को मारना पड़ता है।

3- कॉर्पोरेट कल्चर में मौजूद समानता के बावजूद आमतौर पर पुरुषों से अपने महिला समकक्षों की तुलना में कठिन परिस्थितियों में काम करने की उम्मीद जाती है।

4- बारह घंटे काम करना अपने परिवार के लिए दूसरे शहर, देश , दुनिया भर में काम के सिलसिले में भटकते फिरना फिर भी पुरूष को उनके काम के लिए कोई मान्यता नहीं मिलती। कोई भी पुरुष दिवस नहीं मनाता है।

5- यदि आप घर के कामों में हाथ बंटाते हैं तो समाज आपको जज करता है। यदि आप घर घर के कामों में हाथ नहीं बंटाते हैं, तो आपकी पत्नी आपको जज करती है।

6- पिता का जन्मदिन आमतैर पर परिवार में किसी को याद नहीं रहता, भले ही वह सबके जन्मदिन पर हमेशा सर्वश्रेष्ठ उपहार देते हों।

7- पुरूषों को अपने आंसुओं को सबसे कठिन परिस्थितियों में छिपाना होता है ताकि दूसरे अपने सिर को उनके कंधे पर रख कर रो सकें।

8- पुरूषों पर आरोप लगाकर उनके जीवन को बर्बाद करना आसान है, कई बार यह देखा गया है कि उन्हें उन चीज़ों के लिए दोषी ठहराया जाता है जिन्हें उन्होंने किया ही नहीं है।

मनोविज्ञान के कुछ रोचक तथ्य

1- ह्यूमन साइक्लोजी के अनुसार यदि आप दाहिनी करवट की तरफ सोते हैं तो आपको अपने बाएं करवट की तरफ सोने की तुलना में ज्यादा जल्दी नींद आएगी।

2- ह्यूमन साइक्लोजी के अनुसार सिर्फ यह मान लेना कि आप अच्छी तरह से सोए हैं, भले ही आप ठीक तरह से न सोए हों, आपके काम-काज में सुधार लाने के लिए काफी है।

3- ह्यूमन साइक्लोजी के अनुसार दिन में कम से कम 5-10 मिनट के लिए संगीत सुनना प्रतिदिन के भावनात्मक तनावों से निपटने में सहायक है।

4- ह्यूमन साइक्लोजी के अनुसार शारीरिक स्पर्श आपको स्वस्थ बनाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि हाथ मिलाने, गले लगने और हाथों में हाथ लेने से तनाव कम होता है और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है।

5- ह्यूमन साइक्लोजी के अनुसार यदि आपकी मनोदशा अक्सर बिना किसी कारण खुशी से गम में बदलती रहती है, तो यह इस बात का संकेत है कि आप किसी को मिस कर रहे हैं।

6- ह्यूमन साइक्लोजी के अनुसार यदि आप किसी को बहुत प्यार करते हैं तो केवल उस व्यक्ति की तस्वीर को देखना ही आपको बहुत से दर्द से छुटकारा पाने में मदद करता है।

7- ह्यूमन साइक्लोजी के अनुसार जो लोग सार्वजनिक व भीड़ वाले स्थानों में घूमते समय अपनी जेब में अपना हाथ रखते हैं वे आम तौर पर अंतर्मुखी या शर्मीले होते हैं।

8- ह्यूमन साइक्लोजी के अनुसार लोगों का आकर्षक और झूठा व्यवहार हमें आसानी से भ्रमित कर सकता है क्योंकि लोग ईमानदारी से अधिक भरोसा व्यवहार और उसके दिखावे की प्रस्तुति पर करते हैं।

9- ह्यूमन साइक्लोजी के अनुसार नकारात्मक विचारों को लिखना और उन्हें कूड़ेदान में फेंकना आपके मूड को बेहतर बनाने का एक मनोवैज्ञानिक उपाय है।

10- ह्यूमन साइक्लोजी के अनुसार लोग दूसरों के पीठ पीछे जैसी बातें आपसे करते हैं वे ठीक वैसी ही बातें अन्य लोगों से आपके बारे में करते हैं।

कुछ तुम जैसा कुछ मुझ जैसा

यादों की थोड़ी सी मिट्टी लेकर ,
आज उनसे दो दोस्त बनाना,
कुछ तुम जैसा, कुछ मुझ जैसा।

आज दोस्तों की महफिल में,
फिर से कुछ रंग जमाना,
कुछ तुम जैसा, कुछ मुझ जैसा।

फिर तोड़कर पुतलों की मिट्टी मिला देना,
उससे फिर दो दोस्त बनाना,
कुछ तुम जैसा, कुछ मुझ जैसा।

ताकि तुम में कुछ-कुछ मैं रह जाऊँ,
और मुझ में कुछ-कुछ तुम रह जाओ,
कुछ तुम जैसा, कुछ मुझ जैसा।

आज फिर से पुरानी यादों को खोलकर,
उसमें से दो चेहरे निकालना,
कुछ तुम जैसा कुछ मुझ जैसा।

जिंदगी के कुछ मुश्किल सच क्या हैं

1- जीवन में जितनी अधिक असफलताओं का अनुभव आप करेंगे आप उतने ही अधिक परिपक्व हो जाएंगे।

2- भारत जैसे हमारे देश में जहां लोगों का एक बड़ा वर्ग गरीबी और बुनियादी सुविधाओं के बिना रहता है, वहां सबके साथ न्याय होना एक सपने जैसा है।

3- हर जगह कुछ एेसी महिलाएं हैं जो अन्य पुरुष सहकर्मियों से अपना काम निकालने के लिए अपनी सुंदरता और आकर्षण का उपयोग करती हैं।

4- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी अच्छी चीजें करते हैं, हमेशा कुछ ऐसे लोग होते हैं जो आपको परेशान और पीड़ित देखना चाहते हैं।

5- लोग कभी भी उनके द्वारा दूसरों को पंहुचाए गए नुकसान को नहीं समझेंगे जब तक कि उनके साथ ऐसा नहीं हो जाता है।

6- आप जिस तरह से योजना बनाते हैं, जीवन वैसे कभी नहीं चलता है। यह आपको सर्वोत्तम पुरस्कार प्रदान करने से पहले कठिनतम स्तर पर आपकी परीक्षा लेता है।

7- अधिकांश लोग जीवन के युद्ध के मैदान से तब भागते हैं जब वे अपनी जीत के करीब होते हैं क्योंकि उस समय उनके विश्वास, धैर्य, धीरज और लगन उच्चतम स्तर पर टेस्ट किए जाते हैं।

8- प्रत्येक व्यक्ति के पास अपनी कहानी कहने के लिए होती है, लेकिन हर कोई अपनी कहानी दुनिया को बताने में सक्षम नहीं होता है।

9- झूठ बोलना हमेशा गलत नहीं होता है। कभी-कभी आप किसी को चोट न पहुंचाने के लिए झूठ बोलते हैं।

10- लोग सोचते हैं स्मार्ट काम करने का मतलब कड़ी मेहनत को कम करना है,लेकिन जिंदगी में कुछ भी आसान नहीं होता है कड़ी मेहनत का महत्व कभी कम नहीं होता है।

हम जीवन में प्यार क्यों चाहते हैं

लड़का- मुझे लगता है कि मैं प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा नहीं कर पाउंगा और मुझे अच्छा स्कोर नहीं मिलेगा।

पिता- निश्चित रूप से, तुम अच्छा करोगे। खुद में विश्वास करो, सभी अनावश्यक गतिविधियों से ध्यान को हटाओ, कड़ी मेहनत करो और सोशल साइट्स एवं टी.वी.पर कम समय बिताओ।

लड़की- मुझे इस खतरनाक बांस के पुल को पार करने से डर लगता है।

लड़का- चिंता मत करो, बस मजबूती से मेरा हाथ पकड़ो हम इस पुल को एक साथ पार कर लेंगे।

लड़की- मैं इस अजनबी शहर में बहुत अकेला महसूस करती हूँ। यहां हर कोई अपने जीवन में व्यस्त है। मुझे अपने शहर और घर की बहुत याद आती है।

मां– कभी अकेला महसूस मत करना, मैं हमेशा तुम्हारे पास हूं चाहे तुम याद करो या न करो तुम हमेशा मेरे ध्यान में रहती हो।

पत्नी- मैं घर और आफिस के दबाव को संभाल नहीं पा रही हूं। मुझे लगता है कि मैं पागल हो जाउंगी।

पति- आफिस से थोडे दिन का ले लो। एक रूटीन तैयार करो। जरूरी काम को प्राथमिकता दो। ध्यान और योग का अभ्यास करो। तुम दबाव का सामना करने में सक्षम होगी।

प्रेमी- मैं एक और नौकरी के इंटरव्यू में असफल रहा हूं। यह हालत बहुत तकलीफ देती है। क्या तुम इस बेरोजगार लड़के के लिए अगले दो वर्षों तक इंतजार करोगी?

प्रेमिका- तुमको अपने सपनों का काम बहुत जल्द मिल जाएगा। मैं सारा जीवन यहां तक कि मरने के बाद भी तुम्हारा इंतज़ार करूँगी।

लड़का- आज रिजल्ट आ गया है। मुझे नौकरी मिल गयी है। जब बेरोजगारी के दौरान पूरी दुनिया मेरे खिलाफ थी, तो तुम अकेली थी जिसे मुझ पर विश्वास था। आज मैंने खुद को साबित कर दिया है।

लड़की- मुझे पता था कि तुम्हें अच्छी नौकरी मिल जाएगी। तुम्हारे पास प्रतिभा, दृढ़ता, रचनात्मकता और सकारात्मक दृष्टिकोण है। तुम जिम्मेदार, केयरिंग और अच्छे इंसान हो।

यह अद्भभुत है जब आप जानते हैं कि आपके जीवन में हमेशा कोई ऐसा व्यक्ति है जो आपकी निराशा को सुनने और आपकी खुशी को साझा करने के लिए हमेशा तैयार होता है। प्यार दिल की धड़कन की तरह है जो आपको जिंदा बनाए रखता है, यह आपको विनम्र बनाता है और जीवन में कुछ हासिल करने के लिए प्रेरित करता है। यह तथ्य है कि इसके आभाव में जीवन मुरझा जाता है। शायद यही कारण है कि जिंदगी में हमें हमेशा प्यार की ज़रूरत पड़ती है।

जीवन में आत्मसम्मान का होना क्यों जरूरी है

एक भिखारी एक स्टेशन पर कटोरा लेकर बैठा हुआ था उसके पास में एक बांसुरी भी ऱखी हुई थी। लोग आते और उनमें से कुछ रूक कर कटोरे में पैसा डालकर आगे बढ़ जाते। एक युवा व्यवसायी उधर से गुजरा और उसने कटोरे मे 50 रूपये डाल दिये, उसके बाद वह ट्रेन मे बैठ गया। ट्रेन चलने ही वाली थी वह कि वह व्यवसायी एकाएक ट्रेन से उतर कर भिखारी के पास लौटा और बांसुरी उठा कर बोला, “मै कुछ धुन सुनूंगा। तुम्हारी बांसुरी की धुनों की कुछ कीमत है, आखिरकार तुम भी एक व्यापारी हो और मै भी।” उसके बाद वह युवा तेजी से ट्रेन मे चढ़ गया।

कुछ वर्षों बाद, वह युवा व्यवसायी एक बिजनेस समारोह में हिस्सा लेने दूसरे शहर गया। उस समारोह में वह भिखारी भी मौजूद था। भिखारी ने उस व्यवसायी को देखते ही पहचान लिया, वह उसके पास जाकर बोला- आप शायद मुझे नही पहचान रहे है, लेकिन मै आपको पहचानता हूँ। उसके बाद उसने उसके साथ घटी उस घटना का जिक्र किया। व्यवसायी ने कहा- तुम्हारे याद दिलाने पर मुझे याद आ रहा है कि तुम स्टेशन पर भीख मांग रहे थे। लेकिन तुम यहाँ सूट और टाई मे क्या कर रहे हो?

भिखारी ने जवाब दिया, आपको शायद मालूम नही है कि आपने मेरे लिए उस दिन क्या किया। मुझे पर दया करने की बजाय आप मेरे साथ सम्मान के साथ पेश आये। आपने मेरी बांसुरी उठाकर कहा कि मेरी धुनों की कुछ कीमत है, आपके जाने के बाद मैँने बहूत सोचा, मै यहाँ क्या कर रहा हूँ? मै भीख क्योँ माँग रहा हूँ? मैने अपनी जिदगी को सँवारने के लिये कुछ अच्छा काम करने का फैसला लिया। मैने अपनी बांसुरी उठायी और घूम-घूम कर अपनी प्रस्तुति देने लगा। धीरे -धीरे मेरी मेहनत रंग लायी, पारखी लोगों की नजर मुझ पर पड़ी और मुझे अच्छा काम मिलने लगा। आज मैं यहां इस समारोह में अपनी प्रस्तुति देने आया हूँ।

मुझे मेरा सम्मान लौटाने के लिये मै आपका तहेदिल से धन्यवाद क्योंकि उस घटना ने मेरी जिंदगी को ही बदल दिया।

आप अपने बारे मे क्या सोचते है? खुद के लिये आप स्वयं क्या राय रखते हैं ? इन सारी चीजो को ही हम अप्रत्यक्ष रूप से आत्मसम्मान कहते हैं। दुसरे लोग हमारे बारे मे क्या सोचते है ये बाते उतनी मायने नहीँ रखती लेकिन आप अपने बारे में क्या सोचते हैं ये बात बहूत मायने रखती है।

यह बात सत्य है कि हम अपने बारे मे जो भी सोचते हैँ, उसका एहसास जाने अनजाने मे दुसरो को भी करा ही देते हैं और इसमे कोई भी शक नही कि इसी कारण की वजह से दूसरे लोग भी हमारे साथ उसी ढंग से पेश आते हैं।

आत्म-सम्मान ही वह वजह है जिससे हमारे अंदर प्रेरणा पैदा होती है। इसलिए आवश्यक है कि हम अपने बारे मे एक बेहतर राय बनाएं और आत्मसम्मान के साथ जीवन जिएं।

हमारे जीवन के कुछ कठोर सच क्या हैं

1- अभी वर्तमान में आप जो जीवन जी रहे हैं वह कई लोगों के लिए एक सपना है। हर किसी के पास अपने जीवन का गुजारा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। हर किसी के पास परिवार और मित्र नहीं हैं जो उनकी परवाह करते हों। हमारे देश में बहुत सारे लोग हैं जो अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करते हैं।

2- हम चीजों को वैसे नहीं देखते हैं जैसी वे हैं बल्कि हम चीजें को वैसे देखते हैं जैसे हम हैं। सब कुछ हमारी धारणा पर निर्भर करता है। एक ही चीज किसी के लिए सुख तो किसी के लिए दुख का कारण बनती है।

3- जीवन में दूसरों को सलाह देना आसान है पर किसी को विपरीत स्थिति से बाहर निकलने में मदद करना मुश्किल है। किसी को मुश्किल परिस्थितियों से निकालने के लिए सलाह से अधिक भी बहुत कुछ करना पड़ता है।

4- जीवन में सब-कुछ फेयर नहीं होता। यदि आप किसी चीज़ में अच्छे हैं तो हमेशा आपसे भी बेहतर कोई जरूर होगा। इस सत्य को स्वीकार कीजिए और इसके साथ जीना सीखिये।

5- यह दुनिया स्वार्थी है। अधिकांश लोग केवल उसमें रुचि रखते हैं जो वह आपसे प्राप्त कर सकते हैं या फिर जिससे किसी भी तरह से लाभ उठा सकते हैं।

6- आपका बाहरी पर्सनाल्टी बहुत महत्वपूर्ण है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अंदर से कितने अच्छे हैं। चाहे आपके रिश्तेदार हों या फिर आफिस के सहयोगी, लोग आपको आपके बाहरी व्यक्तित्व के आधार पर जज करेंगे।

7- लोग आपको अपनी प्राथमिकता सूची में बदलते रहते हैं । समय, दूरियां और परिस्थितियां लोगों को प्रभावित करती हैं। इस बात को हम दिल पर ले सकते हैं, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, यह जीवन है जहां सब-कुछ परिवर्तनशील है।

8- आप अपने जीवन के सबसे कठिन समय में अकेले होंगे और यह समय आपको बुद्धिमान, परिपक्व और निडर बना देगा।

9- कुछ भी हमेशा के लिए रहता है आपकी समस्याएं, आपके आस-पास के लोग, आपका काम, नए रिश्ते सब कुछ किसी न किसी दिन खत्म हो जाएगा।

10- जिंदगी में अक्सर आपका दिमाग क्या सोचता है और आपका दिल क्या चाहता है, वह पूरी तरह से अलग हो सकता है।

सोशल साइक्लोजी के कुछ रोचक तथ्य क्या हैं

1- अपनी आवाज ऊंची मत कीजिए बल्कि अपना तर्क सुधारिए। किसी बहस में सफल होने का सबसे शक्तिशाली तरीका सही प्रश्न पूछना है। यह लोगों को उनके तर्क में त्रुटियों को देखने पर मजबूर कर देता है।

2- लोग आम तौर पर ऐसी चीजों की तलाश करते हैं जो उनकी मौजूदा मान्यताओं की पुष्टि करती है और उन जानकारियों को अनदेखा करते हैं जो उनकी सोच के विपरीत हैं। समाजिक मनोविज्ञान में इसे उम्मीद की पुष्टि के रूप में जाना जाता है।

3- अन्य लोगों की उपस्थिति हमारे व्यवहार पर शक्तिशाली प्रभाव डालती है। जब लोगों को पता होता है कि उन्हें देखा जा रहा है, तो वे बेहतर व्यवहार करते हैं। यहां तक कि दूसरों द्वारा देखे जाने का भ्रम भी लोगों को बेहतर व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है।

4- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार एेसे लोग जो सार्वजनिक स्थानों या भीड़ भरी जगहों पर घूमते समय अपनी जेब में हाथ डाले रखना पसंद करते हैं वे आम तौर पर अंतर्मुखी या शर्मीले होते हैं।

5- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार शर्मीले और अन्तरमुखी स्वभाव के लोगों के पास दूसरों को आब्जर्व करने का महान कौशल होता है, जिसके कारण किसी समस्या के मूल को पहचानने में वे दूसरों की तुलना में अधिक कुशल होते हैं।

6- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार हम सफल और अमीर लोगों को अधिक समझदार और बुद्धिमान मानते हैं और इसके विपरीत को भी सच समझते हैं।

7- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार दूसरों से हमारी उम्मीदें इस बात को प्रभावित करती हैं कि हम दूसरों को कैसे देखते हैं और सोचते हैं कि उन्हें कैसे व्यवहार करना चाहिए।

8- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार दूसरों के बारे में कोई व्यक्ति आपसे क्या बोलता है उस पर ध्यान दीजिए क्योंकि दूसरोंं से वह आपके बारे में ठीक वैसे ही बात करेंगे।

9- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार दूसरों की आकर्षक वेशभूषा और व्यवहार आपको आसानी से भ्रमित कर सकता है क्योंकि आमतौर पर लोग ईमानदारी से अधिक भरोसा वाह्य वेशभूषा और बातों पर करते हैं।

10- समाजिक मनोविज्ञान के अनुसार सोशल मीडिया पर दूसरों की पोस्ट की गयी तस्वीरों को देखने से लोग को उदास महसूस होता है क्योंकि इससे उन्हें विश्वास होता है कि उनके मित्र और परिवार के लोग उनसे ज्यादा खुश हैं। हालांकि तथ्य यह है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले लोग भी ऐसा ही महसूस करते हैं।