About abhishek trehan

I am off course a human being. So are we common? Yes mostly on extrinsic parameters. Do we experience the same? No we don't. Complicated? Let's make it simple. How? By sharing our thoughts. Let it be logical or imaginary, domestic or global, Hindi or English. But sharing thoughts is the key. This will help us to add our understanding of who we are? And to reach the ultimate status where we decode that we are same on both parameters intrinsically and extrinsicaly..

हर पल बदल रही है रुप जिंदगी

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see काल से ताकतवर कुछ भी नहीं होता। इसके आगे सब बेबस हो जाते हैं। जीवन, परिस्थितियां,घटनाएं सबकुछ काल के अधीन होती हैं। जब वक्त बदलता है तो यह परिस्थितियों को रूपांतरित कर देता है।

http://ortdestreffens.de/?yabloko=bin%C3%A4re-optionen-strategie-kay&409=3d यह इंसान की फितरत होती है कि जब वक्त अच्छा होता है तब वो सबकुछ आसान समझता है और बुरे वक्त का ख्याल करना ही नहीं चाहता है।

go to site जब सूर्य उदय या अस्त होता है दोनों समय उसका रंग लाल होता है। केवल दिशा का फर्क आने वाले समय को निर्धारित करता है। यह बताता है कि सुबह होगी या फिर अंधेरी रात आयेगी, दोनों ही स्थितियों में सूरज का रंग और आकार एक जैसा होता है।

http://reha-baunatal.de/?biiodr=haagen-dazs-single-serve-gelato&fee=e0 हम समझते हैं कि अन्य और बहुत सी चीजों की तरह कल के बारे में भी पूर्वानुमान किया जा सकता है जबकि वास्तविकता यह है कि कोई भी नहीं जानता है कि अगले पल क्या होने वाला है।

template opções binarias लोग सोचते हैं कोई बीमारी या दुर्घटना हो भी गई तो मेरे पास उससे निपटने के लिए कई साधन हैं पर समय का ऊँट किस करवट बैठेगा,यह किसी को पता नहीं होता।

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके कितने अनुभवी हैं और उन अनुभवों ने आपको क्या सिखाया है, जीवन हमेशा आपको एक अप्रत्याशित झटका देता है जिसके लिए अक्सर आप तैयार नहीं होते हैं।

voltaren 50mg chemist warehouse समय के साथ प्राथमिकताएं बदलतीं हैं, विफलताओं से मत डरिये, कभी-कभी असफल होने का मतलब सीखने में पहला प्रयास होता है। जो बीत गया वो आपके दिमाग में है और जो होना है वो आपके हाथ में है।

indiana ginseng prices आवश्यकता है चीजों को गौर से देखने की और समझने की प्रकृति भी यही संदेश देती है कि हर उगने वाले सूरज के साथ ढलने वाला सूरज भी साथ होता है अजीब बात है कि दोनों देखने में एक जैसे लगते हैं और दोनों का रंग और आकार भी एक जैसा होता है।

जीवन को खूबसूरत बनाने के कुछ बेहतरीन टिप्स क्या हैं ?

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1- भले ही आप इसे समझ नहीं पा रहे हों तो भी जिंदगी की यात्राओं पर भरोसा करना सीखिये। कभी-कभी आप जीवन में जो नहीं चाहते थे या जीवन में जिसकी उम्मीद नहीं थी, वह घटित होना वह सबक साबित होता है जिसकी वास्तव में आपको जरूरत थी।

2- आपके साथ होने वाली हर छोटी चीज का कुछ न कुछ सार्थक मतलब होता है। हर वर्ष के बाद कुछ बिंदुओं को फिर से कनेक्ट करें और आपको पता चलेगा कि किसी कारण से ही वह सब कुछ हुआ है।

3- खुद को विनम्र रखिये और अस्वीकृति और विफलता को कोशिशों के सबूत के रूप में स्वीकार करिये। जो लोग कोशिश करते हैं और असफल होते हैं वे उन लोगों की तुलना में काफी बेहतर होते हैं जो बिल्कुल प्रयास नहीं करते हैं।

4- दूसरों के साथ अपने जीवन की तुलना न करिये क्योंकि सूर्य और चंद्रमा के बीच कोई तुलना नहीं है। दोनों अपने-अपने समय पर चमकते हैं।

5- शादी के बाद जीवन बदलता है। कुछ लोग अभी भी इस धारणा में रहते हैं कि वे शादी के बाद भी बेचलर की तरह रह सकते हैं। याद रखिए, यह इस तरह से काम नहीं चलता है। विवाह के बाद आपको अधिक जिम्मेदार और सभ्य बनना ही होगा।

6- शराब पीना और धूम्रपान करना आपको कम उम्र में मौत के बिस्तर तक ले जाएगा। यह दूसरों के लिए स्टाइलिश दिखता है लेकिन वास्तव में यह आत्महत्या करने का ही एक तरीका है, इनसे हर हाल में बचिये।

7- उन लोगों के बीच अंतर करना सीखिये जो आपके असली मित्र हैं और जो सिर्फ दोस्ती का दिखावा करते हैं। सांपों के समूह से बेहतर कुछ कम दोस्तों का साथ है।

8- अपने परिवार से प्यार कीजिए। हम अक्सर अपनों के प्यार को समझ नहीं पाते हैं और घर के बाहर प्यार की तलाश करते रहते हैं। हकीकत में यह परिवार ही है जहां जीवन शुरू होता है और प्यार कभी खत्म नहीं होता है।

विचारों की ताकत को इग्नोर मत कीजिए

आज दुनिया जैसी भी दिखाई देती है वह पूर्व में हमारे मन में उठने वाले विचारों का परिणाम है। आज दुनिया में जितनी अच्छी चीजें, अविष्कार,प्रगति दिखाई देती है वह परिणाम है उन सकारात्मक विचारों का जिनका जन्म किसी मनुष्य के ह्रदय में हुआ था और दुनिया में जो भी नकारात्मकता है,सत्ता और शक्ति का दुरुपयोग है वह भी परिणाम है उन नकारात्मक विचारों का जिनका जन्म किसी मनुष्य के ह्रदय में हुआ होगा।

1- मनुष्य का जीवन घटनाओं का समूह है और ये घटनाएं हमारे विचारों का परिणाम हैं। विचार एक शक्ति है जिसका उपयोग करके हम जीवन में बहुत ऊंचा भी उठ सकते हैं और इस शक्ति का दुरुपयोग हमें पशुओं के स्तर से भी नीचे गिरा सकता है।

2-मन ही विचारों का उद्गम और अंत स्थल है, विचार मन से ही जन्म लेते हैं और मन में ही समाप्त हो जाते हैं। हमारे विचारों का हमारे जीवन की हर एक घटना पर प्रभाव पड़ता है।

3-विचार भी बच्चों की तरह होते हैं, वे भी अपना पराया, भला बुरा नहीं समझते हैं और बस कभी भी, कहीं भी, कहीं से भी हमारे पास चले आते हैं ।यदि हम आने वाले विचारों का स्वागत करते हैं, उन्हें अपनाने का प्रयास करते हैं तो वे पुष्ट होते हैं, बढते हैं, विकसित होकर हमारा पुनर्निर्माण करते हैं।

4-यदि विचारों को दुत्कार दिया जाए ,उन्हें बेइज्जत कर दिया जाए, उनकी परवाह न की जाए तो फिर एेसे विचार हमारे पास से चले जाते हैं। ये विचार मृतप्राय होकर हमारे मन की गहराइयों में दफन हो जाते हैं।

5-सभी विचार न तो हर एक के लिए अच्छे होते हैं और न ही बुरे, विचारों को चुनने के लिए मनुष्य स्वतंत्र है। जो विचार आपको अच्छा लगता हो, जिनसे अच्छी आदतें बनती हों, जो उत्तम स्वभाव का निर्माण करते हों एेसे विचार हमारे मित्र के समान हैं। एेसे विचारों का हमें खुले दिल से स्वागत करना चाहिए,इन विचारों का बार-बार चिंतन करना चाहिए।

6- विचारों में बहुत शक्ति होती है,हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं।नकारात्मक विचार नकारात्मकता को और सकारात्मक विचार सकारात्मकता को आकर्षित करते हैं।

7- विचार वह शक्ति है जिसका उपयोग अच्छे और भलाई के कामों में भी किया जा सकता है और इस शक्ति को एेसे कामों में भी नष्ट किया जा सकता है जो मानवता को कलंकित करते हैं।

कुछ लक्षण जो बताते हैं कि आप पहले से ज्यादा मेच्योर हो गए हैं

1- जब कोई तारीफ करे तो बहुत खुशी न हो और अहंकार ना आये और जब कोई निंदा करे तो गुस्सा न आये बल्कि आप उस निंदा पर विचार करें और यह सोचें कि दूसरे ने ऐसा क्यों कहा।

2- जब दुख ज़्यादा दुख न लगे और खुशी में ज़्यादा खुशी न हो और जब आप ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव बिना परेशानी के झेल पाए और उसे कभी ईश्वर की मर्जी,तो कभी अपनी नियति जानकर एक्सेप्ट कर

3- जब आप फेसबुक, इंस्टाग्राम पर अपना ज्यादा समय बर्बाद ना करके अपने लक्ष्यों को अपना ज्यादा समय देने लगें।

4- जब आप अपने जज़्बातों को सोशल मीडिया पर शेयर ना करके उस व्यक्ति के साथ सुलझाने की कोशिश करते है , जिसके साथ आपका मन मुटाव हुआ है।

5- जब आप समझते है कि हर बार आप सही नहीं हो सकते और सामने वाले की पूरी बात सुनने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं |

6- जब आप अपनी गलतियों को मानते हैं और सामने वाले व्यक्ति की भावनाओं का सम्मान दिल से करते हैं।

7- जब आप अलविदा कहने की हिम्मत रखते हैं और समझते है कि कोई भी आपका साथ जीवन भर नहीं देगा और आपको अपना सफर अकेले ही तय करना है।

8- जब आप जिम्मेदारियों से मुँह नहीं मोड़ते हैं और जो जैसा है उसे वैसे ही स्वीकार करना सीख लेते हैं।

खुद से दोस्ती क्यों जरूरी है ?

हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है? यदि हमें इस प्रश्न का उत्तर खोजना है तो इसकी तलाश खुद के भीतर से ही प्रारंभ करनी होगी, खुद को समझ लेने के बाद ही संसार से प्राप्त ज्ञान का सही उपयोग हो पाता है अन्यथा यह ज्ञान खोखला ही साबित होता है जो सिर्फ हमारे भीतर अहंकार का ही पोषण करता है।

इससे पहले कि हम यह जानें कि हम क्या होगें, यह जान लेना जरूरी है कि हम क्या हैं? हम जो भी हैं उसे पहचानकर, समझकर ही उस भविष्य की रचना की जा सकती है जो अभी तक हमारे भीतर कहीं सो रहा है।

ज्ञान और जानकारी में फर्क है जो हमें अपने भीतर से, खुद को खोजने से, खुद के विषय में प्राप्त होता है वही ज्ञान है बाकी जो कुछ हम संसार से सीखते हैं वो जानकारी है। हममें से ज्यादातर लोगों के पास जानकारी तो बहुत है पर ज्ञान बहुत अल्प या नहीं के बराबर है।

ज्ञान प्राप्त करने की पहली शर्त खुद को जानने की है। यदि इस बिंदु पर अंधकार है तो सब जगह अंधेरा है। यदि यहां प्रकाश है तो सर्वत्र उजाला है।

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हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम स्वयं के प्रति उदासीन हैं। हम खुद के प्रति सजग नहीं हैं। चिराग तले अंधेरा वाली कहावत हमारे जीवन में सत्य सिद्ध हुई है। एेसे में यदि हमारी जीवन भटककर गलत दिशा में चला जाता है तो इसमें अचरज कैसा ?

खुद के प्रति अनजान बने रहने के कारण हमारी जिंदगी की स्थिति उस नाव की भांति है जिसका मांझी सो गया है फिर भी नाव किसी तरह, इधर-उधर लहरों के सहारे बही चली जा रही है।

खुद को जानना ही ज्ञान की पराकाष्ठा है। खुद को समझे बिना किसी और को समझने का मूल्य कुछ भी नहीं है। जो खुद से बेगाना है वह दूसरों से कितना भी घुल मिल जाए उसका कोई अर्थ नहीं है। स्वयं के अनुभव के बिना दूसरों से प्राप्त ज्ञान में हित कम अहित ज्यादा है।

आसान नहीं है खुद को जानना, बहुत कोशिश करनी पड़ती है पर जीवन को सार्थक बनाने की यह अनिवार्य शर्त है। आप भी खुद को समझने की कोशिश कीजिए, मैं भी कर रहा हूं।

जिंदगी में हम पैसों के पीछे भागने से खुद को कैसे रोक सकते हैं ?

जीवन में हम पैसोंं के पीछे जितना भागते हैं वह हमसे उतना ही दूर चला जाता है। पैसा जीवन में आवश्यक है लेकिन सब कुछ नहीं है।

पैसे के बिना जीवन सम्भव नहीं। आज के युग में ये मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। पैसा सब ज़रूरतें पूरी करने का माध्यम है। इंसान को आज की ही नहीं कल की भी चिंता होती है यहां तक कि समझदार जीव भी बुरे समय के लिए भोजन संचित करके रखते हैं।

पैसा भोजन की तरह होता है , हम सभी यह जानते हैं कि बिना भोजन के कोई भी जीवित नहीं रह सकता है। उसी तरीके से बिना पैसे के इस दुनिया में जीवित रहना बहुत मुश्किल है।

लेकिन यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है की जरूरत से ज्यादा खाना स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने की बजाय, स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है और इसीलिए हम अपने खाने पर नियंत्रण रखते हैं।

कल्पना कीजिए कि आपको किसी पार्टी में बुलाया गया है और वहां पर तरह- तरह के व्यंजन आपके सामने परोसे गए हैं और आप को इस खाने का कुछ भी पेमेंट नहीं करना है । ऐसी स्थिति में अक्सर खुद को रोक नहीं पाते हैं और जितना आपको खाना चाहिए उससे कई गुना ज्यादा आप खा लेते हैँ। यह जानते हुए भी कि जरूरत से ज्यादा खाना हमारे स्वयं के स्वास्थय के लिए हानिकारक है।

ठीक ऐसे ही, हम जब ऐसी पोजीशन में रहते हैं जहां पर हम पैसा कमा सकते हैं, चाहे वह गलत तरीके से हो या सही तरीके से हो, हम खुद को रोक नहीं पाते हैं।

इसी वजह से दुनिया में ज्यादातर लोग पैसे के पीछे भागते रहते हैं और कभी यह जानने की कोशिश नहीं करते की वह पैसा क्यों कमाना चाहते हैं और वह इस पैसे का क्या इस्तेमाल करेंगें?

रियल लाइफ में पैसा कमाना बहुत मुश्किल होता है। यदि आप बहुत सारा पैसा कमाना चाहते हैं तो आपको अपना समय, अपनी ऊर्जा और यहां तक कि अपना मानसिक संतुलन भी दांव पर लगाना पड़ता है।

बीत गया समय कभी भी वापस नहीं आता,खराब हुआ स्वास्थ्य भी कभी वापस नहीं आता है,जो रिश्ते हम खो देते हैं वह भी वापस नहीं आते हैं जो बुरे कर्म पैसा कमाने में हम करते हैं वह हमारा कभी पीछा नहीं छोड़ते हैं।

आपको सिर्फ इतना पैसा कमाना चाहिए जितना कि जरूरी हो, ताकि आपके पास में पर्याप्त समय और ऊर्जा हो जिससे कि आप अपने जीवन की और भी चीजें जो महत्वपूर्ण और मूल्यवान हैं उनको प्राप्त कर सकें।

किसी ने सच ही कहा है पैसा वह वस्तु है जिससे आप कितना भी कमा लो, कम ही लगता है।

कुछ एेसे काम जो दिखते तो सरल हैं पर होते मुश्किल हैं

1- किसी एेसे व्यक्ति को कुछ समझाने की कोशिश करना जो समझना ही नहीं चाहता है, किसी नासमझ व्यक्ति को समझाया जा सकता है परंतु अपने आप को बहुत अधिक समझदार समझने वाले व्यक्ति को समझाना बहुत मुश्किल काम है।

2- कभी-कभी दूर की चीजें ज्यादा साफ दिखती हैं और पास की चीजें धुंधली नजर आती हैं। इसी तरह हमें अपनी गलतियां नजर नहीं आती परंतु दूसरों की गलतियों पर उंगली उठाना बहुत आसान लगता है। खुद में गलतियां ढूढ़ पाना बहुत मुश्किल काम है।

3- खुद को जान लेना आवश्यक है ताकि भविष्य की एक मज़बूत नींव रखी जा सके। ये तभी सम्भव होगा जब आप प्रयोग करेंगे, कहीं सफल होंगे तो कहीं असफल और आपका यही अनुभव कारगर साबित होगा। खुद से रूबरू होना एक मुश्किल काम है।

4- जिम्मेदारी उठाना,क्योंकि जब आप जिम्मेदारी उठाते हैं तो आपसे कई सारे व्यक्ति जुड़े होते हैं जिनको आपसे उम्मीद होती है और आपके सामने उन उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होती है। इसलिए जिम्मेदारी उठाना एक मुश्किल काम है।

5- आगे बढ़ते रहना, आप एक सफलता से संतुष्ट नहीं हो सकते क्योंकि हर सफलता के साथ उम्मीद और बढ़ जाती है और चुनौती और भी बड़ी हो जाती है। इसलिए यह एक कठिन कार्य है।

6- किसी को हँसाना,दूसरों को हँसाना आसान नहीं है एक अच्छा सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत बड़ी चीज़ है। खुद का मज़ाक उड़ाने के लिए सच में जिगरा चाहिए होता है। इसलिए यह एक मुश्किल काम है।

7- दुःखी होते हुए भी मुस्कुराना, आंखों के नीचे के काले घेरे बताते हैं कि होठों पर जो मुस्कान है वह झूठी है।

8- दूसरों को सीख देना बहुत सरल है परन्तु अपने द्वारा दी गई शिक्षाओं का स्वयं अनुसरण करना बहुत मुश्किल काम है |

9- क्षमा मांगने के लिए हमे अपने अंदर के अहम को खत्म करना पड़ता है। क्षमा मांगने वाला इंसान रिश्तों की कदर करता है और किसी अपने को खोने से अच्छा हैं अपने अहम को खो देना इसलिए क्षमा मांगना एक मुश्किल काम है।

10- जीवन में सच्चाई और ईमानदारी के मार्ग पर चलना ,यह वास्तव में बहुत आसान लगता हैं परन्तु इस मार्ग पर चलना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। इसलिए यह एक कठिन काम है।

दोस्ती और प्रेम के बीच क्या अंतर है ?

1- दोस्ती में कोई वजह नहीं होती है, और प्रेम एक वजह बन कर रह जाता है क्योंकि दोस्ती को समझने की जरुरत नहीं होती है जबकि प्रेम में समझना बहुत आवश्यक हो जाता है।

2- प्रेम आत्मा है और दोस्ती शरीर और जब इन दोनों का मिलन होता है तो मजबूत रिश्तों का निर्माण होता है।

3- प्रेम मनुष्य को एकांत की और ले जाता है, दोस्ती उसे भीड़ की ओर क्योंकि प्रेम आपको विद्रोही बनाता है और दोस्ती आपको स्वच्छंद ।

4- प्रेमी कहता है, तुम्हें कुछ हुआ तो मैं ज़िंदा नहीं रहूँगा और दोस्त कहता है, जब तक मैं ज़िंदा हूँ, तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा।

5- मित्रता के लिए हमेशा ही किसी आलंबन की आवश्यकता होती है। किसी मित्र से कभी दुराव भी हो सकता है। मित्रता भी तभी तक है जब तक आपके ह्रदय में प्रेम है ।

6- प्रेम आप को लाचार बना सकता है पर दोस्ती आप को मजबूत बनाती है। प्रेम आंसुओं का कारण बन सकती है पर दोस्ती बारिश में भी आपके आँसू पहचान सकती है।

7- अगर प्रेम में मित्रता हो जाये तो अच्छी बात है पर यदि मित्रता में प्रेम हो जाये तो जिंदगी में फिर किसी और प्रेम की जरूरत ही नहीं पड़ती है।

8- प्रेम में दोनों पक्षों से उम्मीद रखी जाती है। पर दोस्ती बिना उम्मीद के भी चलती रहती है।

9- प्रेमी को दिल की बात समझनी पड़ती है और दोस्त अापके दिल की बात अपने आप समझ जातें हैं।

10- सैकड़ो अनकही उम्मीदों की वजह से प्रेम अक्सर दोस्ती की तुलना में कहीं ज़्यादा उलझाव भरा हो जाता है।

किसी व्यक्ति के लिए दुनिया में सबसे आसान काम क्या है ?

1- खुद की निजी परेशानियों पर ध्यान ना देकर अपनी कमियों का कुसूरवार दूसरों को ठहराना।

2- मोबाइल पर दिन भर बेवजह व्यस्त रहना और बिना मांगे दूसरों को मुफ्त में सलाह देते रहना।

3- माता -पिता के द्वारा दी गयीं सुख सुविधाओं का उपभोग करना और स्वयं के कंधों पर बोझ आने पर जिम्मेदारियों से भागना।

4- अपनी प्रशंसा स्वयं करना और दूसरों के कार्यों में हमेशा गलतियों को निकालना।

5- बात- बात पर झूठ बोलना और कार्य न करने के लिए लिये बहाने बनाना।

6- पहली मुलाकात के आधार पर किसी व्यक्ति के लिए धारणा बना लेना और एक तरफ़ा प्रेम में पड़कर खुद को बर्बाद कर लेना।

7- किये हुए वादे तोड़ देना और अपनी गलतियों के लिए किसी और को ज़िम्मेदार ठहराकर कहीं का गुस्सा कहीं और उतारना।

8- बिना कुछ जाने बिना कुछ समझे बड़ी आसानी से दूसरों को अपने आइने से तोल लेना और उसी हिसाब से दूसरों को उपदेश देते रहना।

9- नियमों को तोड़ना, चलता है कहकर चुप हो जाना और हर काम के लिए सरकार को दोष देना।

10- लोगों को नीचा दिखाने हेतु, उनके आत्मविश्वास पर हमला करना, बेवजह उन्हें कटु शब्दों से अपमानित करना।

11- किसी को गलत राय देकर दूसरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करना।

जानिए अपने अवचेतन मन की ताकत को

अवचेतन मन जिसे अंग्रेजी में subconscious mind कहा जाता है, यह वह मानसिक स्तर है जो न ही पूर्णतः चेतन होता है ना ही पूर्णतः अचेतन। हमारे अवचेतन मन में जो भी विचार होते है वे चेतन स्तर पर नहीं कार्यरत होते हैं फिर भी वह हमारे व्यवहार को प्रभावित कर रहे होते हैं।

हमारी जो आदतें हैं वो बिना चेतन के अधिक प्रयास के स्वयं संचालित होती हैं। आप गाड़ी चलाने में परफेक्ट है तो अब आपको गाड़ी के गियर बदलने में अधिक प्रयास नहीं करना पडता, आप बातें करते हुए भी आसानी से गाड़ी चला पाते हैं या कहें चीजें आटोमेटिक होने लगती है क्योंकि यह आपके अवचेतन मन में होती है।

जब हम बच्चों को पहली बार चलना या फिर थोड़े बड़े होकर लिखना सिखाते हैं तो वे पहली बार डर कर चलते हैं इसी प्रकार लिखना भी सीखते समय पहले मुश्किल लगता है फिर धीरे धीरे ये सब उनके अचेतन मन में store हो जाता है तो अंगुलियों स्वतः ही लिखने लगती हैं।

फ्रायड ने मन को तीन हिस्सों में बांटा है- चेतन, अवचेतन तथा अचेतन। अवचेतन मन हमारे मन का एक बड़ा हिस्सा है, यह चेतन व अचेतन के बीच पुल का कार्य करता है। अवचेतन मन को अत्यधिक शक्तिशाली भी बताया गया है। माना जाता है अगर आप अपने अवचेतन मन को कंट्रोल कर पाते हैं तो आप कुछ भी कर सकते हैं।

अवचेतन मन को जगाना बहुत मुश्किल नहीं है इसके लिए आपको शुरुआत में अपने विचारों को संयमित करना होगा और विचारों की सकारात्मकता के प्रति सजग बने रहना होगा, बिल्कुल उसी तरह जिस तरह आप पहली बार साइकिल चलाते समय सजग और सावधान बने रहे थे क्योंकि आप जानते थे कि ज़रा सा ध्यान हटा तो आप साइकिल से गिर जाएंगे और आपको चोट लग जायेगी।

इसी तरह आपके विचारों में ज़रा सी भी नकारात्मकता आने लगी तो आपके यही विचार अवचेतन मन में स्थायी हो जायेंगे और आपका अवचेतन मन इन्हें सच करने में जुट जाएगा और इन निगेटिव विचारों के परिणाम अच्छे नहीं निकलेंगे।

कोई भी बात या कार्य दोहराते रहने से, अवचेतन मन का हिस्सा बन जाता है। इसका अर्थ ये हुआ कि आप अपने जीवन में जिस तरह के सुधार या बदलाव चाहते हैं, जिस स्तर की सफलता हासिल करना चाहते, उन्हें अपने मन में दोहराते रहिये और ऐसा करते समय ध्यान रखिये कि शक्तिशाली विचार ही अवचेतन मन में अपनी जगह बना सकता है इसलिए विचार का दृढ़ होना बेहद ज़रूरी है।

पूरे यकीन के साथ स्पष्ट तरीके से दोहराया गया विचार निश्चित रूप से सच का रूप ले लेगा क्योंकि ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जिसे पूरा करना अवचेतन मन की सामर्थ्य से बाहर हो।