जीवन के कुछ सरल सत्य क्या हैंं ?

1 – सच्ची दोस्ती अक्सर स्कूल और कॉलेज के दिनों में होती है। बाहर की दुनिया में सब पैसा कमाने की आंधी दौड़ में व्यस्त हैं।

2 – जीवन सुंदर है उन लोगों के लिए जो वास्तव में व्यक्तिगत और प्रोफेशनल जीवन में संतुलन बनाना जानते हैं।

3 – किसी भी कहानी के तीन पक्ष होते हैं, आपका पक्ष,उनका पक्ष और वास्ततविक सच्चाई ।

4 -किसी को परवाह नहीं है कि आपका जीवन कितना मुश्किल है, अपने जीवन की कहानी के लेखक स्वयं आप हैंं।

5 – जीवन में उतार-चढ़ाव अपरिहार्य है और इस प्रक्रिया में हम अक्सर अपने लक्ष्य पर इतना ध्यान देते हैंं कि हम रास्तों की परवाह नहीं करते।

6 -सबसे बुरी चीजें जिनकी आप कल्पना करते हैं अक्सर जीवन में कभी घटित नहीं होती हैं, जीवन में जो सबसे बुरा घटित होता है अक्सर उसकी आपने कल्पना भी नहीं की होती है।

7 – आप लोगों को बदल नहीं सकते हैं,आप केवल उन्हेंं रास्ता दिखा सकते हैं और स्वयं के उदाहरण द्वारा बदलाव के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

8- आपके जीवन में जो भी समस्या है वह प्राथमिक रुप से आपकी जिम्मेदारी है,इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उस समस्या का कारण आप हैं या कोई और।

9- छोटी- छोटी बातें और काम जो आप प्रतिदिन कहते हैं या करते हैं वह कही़ं ज्यादा महत्वपूर्ण है उन बातों और कामों से जो आप कभी-कभार करते हैं।

10- जीवन आसान नहीं होता विशेषकर तब जब आप जिंदगी में कुछ बड़ा करना या पाना चाहते हैं।

11- खाली पेट और मुफलिसी आपको जीवन के सबसे बड़े सबक सिखा देते हैं।

मनोविज्ञान के कुछ दिलचस्प तथ्य जिन्हें आपको जानना चाहिए

1- मनोविज्ञान कहता हैं, जब आपको आफिस छोड़ने में देर हो जाती है तब आपकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता है, जब आप आफिस जल्दी छोड़ते हैं तो अक्सर आपका सामना पार्किंग में बास से हो जाता है।

2 – मनोविज्ञान कहता है कि जैसे ही आप वह करना शुरु करते हैं जो आप हमेशा से करना चाहते थे तो अक्सर आपको लगने लगता है कि आप कुछ और करना चाहते थे।

3- मनोविज्ञान कहता है कि अक्सर जो भी पदार्थ बाहर से सख्त होता है वह सड़ने पर नर्म हो जाएगा जबकि जो शुरुआत में नर्म होगा वह सड़ने पर सख्त हो जाएगा।

4 – मनोविज्ञान कहता है कि अक्सर वेतन वृद्धि का प्रभाव आपके टैक्स पर ज्यादा और सैलरी पर कम होता है।

5 – मनोविज्ञान कहता है कि ग्रुप में आप जिस काम को करने में सबसे कम योगदान देते हैं, उस काम को करने के लिए आपकी अनुपस्थिति उतनी ज्यादा नोटिस की जाती है।

6 – मनोविज्ञान कहता है कि गर्मजोशी से हाथ मिलाना दूसरों की नजरों में आपको अधिक आकर्षक बनाता है।

7 – मनोविज्ञान कहता है कि लोगों की रूचि आपको 5 मिनट से ज्यादा जज करने में नहींं होती है इसलिए दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैंं,यह सोचने में 10 मिनट से ज्यादा मत बर्बाद कीजिए।

8-मनोविज्ञान कहता है कि जब आप किसी बीमार व्यक्ति की तस्वीर देखते हैं या उनके बारे में सोचते हैं तब आपका शरीर इसके प्रति प्रतिक्रिया करता है और अतिरिक्त सफेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन आपकी रक्षा करने के लिए करता है। चित्रों का उपयोग अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।

9- मनोविज्ञान कहता है कि किसी के कान में फुसफुसा के कुछ कहना इस बात की लगभग गारंटी है कि वे भी फुसफुसा के ही जवाब देंगे।

10 – मनोविज्ञान कहता है कि अगर कोई व्यक्ति बात करते समय अपने हाथों का बहुत उपयोग करता है रहा है तो यह इंगित करता है कि वे सच कह रहे हैं और तथ्यों के बारे में बहुत कान्फिडेन्ट हैं।

11- मनोविज्ञान कहता है कि आप जितना अधिक खुश रहते हैं रोजमर्रा की जिंदगी में कार्य करने के लिए आपको उतनी ही कम नींद की आवश्यकता होती है, उदासी से सोने की इच्छा बढ़ती है।

हमेशा कोई न कोई कहीं न कहीं होता है

हर किसी के जीवन में एक एेसा वक्त आता है, जब हमारे जीवन में कुछ भी सही नहीं होता है। आपको हर तरफ से असफलता मिलती है और आप जिंदगी से निराश हो जाते हैं। आपका आत्मविश्वास टूट जाता है और आपको लगता है कि आपका जीवन बेकार है। लेकिन यह सच नहीं है।

हमेशा कोई न कोई, कहीं न कहीं, होता है, जो आपके साथ रहने की इच्छा रखता है।

हमेशा कोई न कोई, कहीं न कहीं, होता है, जो आपके चेहरे पर एक मुस्कान देखने के लिए घंटों इंतजार करता है।

हमेशा कोई न कोई, कहीं न कहीं होता है, जो आपके लिए मुश्किलों से भरे पहाड़ों को पार करने के लिए खुशी से तैयार रहता है।

हमेशा कोई न कोई, कहीं न कहीं होता है, जो आपसे मिलने के लिए हजारों मीलों के फासले पार करने में भी संकोच नहीं करता है।

उनके लिए जीना सीखिये। अपने जीवन को व्यर्थ समझने की भूल कभी मत कीजिए,क्योंकि कोई आपको देखकर अपने जीवन को जीने की बात करता है।

हो सकता है कि वे आपके साथ हों, हो सकता है कि वे आपके माता-पिता हों, हो सकता है कि वे आपके भाई बहन हों, हो सकता है कि वो आपकी पत्नी या पति हों या फिर कोई एेसा हो जिससे आपका कोई सांसारिक रिश्ता न हो।

यह भी हो सकता है कि आपके जीवन में ऐसा कोई व्यक्ति न हो। फिर उनके लिए प्रतीक्षा कीजिये। निश्चित रूप से वे आपके जीवन में एक न एक दिन जरूर आ जाएंगे।

किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जिंदगी को जीना शुरू कीजिए जो आपके लिए जीना चाहता है। एेसा करने से आपकी जिंदगी निश्चित रूप से पहले से सुंदर हो जाएगी और आपको खोया हुआ आत्मविश्वास फिर मिल जाएगा।

आपने अब तक अपनी ज़िन्दगी से क्या सीख हासिल की है?

1-चाहे कोई कितना भी आपसे वादा कर ले कि वो आपको कभी नहीं छोड़ेगा या फिर आपके बिना जीवन की कल्पना तक नहीं कर सकता है, पर वो भी एक दिन आपका साथ छोड़ देंगे। जिंदगी में कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता है। लोग आपके बिना भी जीवन की बहुत अच्छी तरह से कल्पना कर सकते हैं और जितना कि आप सोचते हैं उससे कहीं बेहतर तरीके से जीवन बिता सकते हैं।

2- लोग गलतियां करते हैं और आपकी भावनाओं के प्रति उदासीन हो सकते हैं। वे कहते हैं, ठीक है, जो मैंने किया था ,मैं उन सब के लिए माफी चाहता हूँ । और वे इसे बहुत ही सामान्य ढंग से लेते हैं जैसे कि कुछ भी हुआ ही नहीं हो। लेकिन फिर भी आप के लिए यह बहुत मुश्किल होता है और आप जिंदगी में आगे बढ़ने में कठिनाई महसूस करते हैं।

3- किसी भी रिश्ते में आवश्यकता से अधिक प्यार या समर्पण जरूरी नहीं है। अधिकता हर चीज़ की बुरी होती है। रिलेशनशिप में कब और कहाँ रूकना है और कहां अपने आप को सीमित करना है यह सीखना बहुत जरूरी है। किसी को भी अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण और एकमात्र प्राथमिकता मत बनाइये।

4- लोग बदलते हैं, भावनाएं बदलती हैं और प्राथमिकताएं बदलती हैं ।आप कभी भी किसी व्यक्ति से ये अपेक्षा नहीं कर सकते हैं कि वह भी आपके उतना ही समझता है जितना कि आप उसे समझते हैं। कोई आपको अपनी लाइफ से कब रिप्लेस कर देगा कुछ कहा नहीं जा सकता है।

5- लोग हमेशा एक मुखौटा पहनते हैं। एक ही इंसान विभिन्न लोगों को अपना अलग-अलग पक्ष दिखा सकता है। इसलिये यदि आप सोचते हैं कि किसी इंसान के साथ कुछ समय बिताने के बाद आप उन्हें शत प्रतिशत समझते हैं तो यह सही नहीं है। किसी भी इंसान के व्यक्तित्व के बहुत से पहलू होते हैं ,अभी भी बहुत कुछ है जो आपको पता नहीं है।

6- यहां तक कि जब लोग पकड़े जाते हैं या फिर वे गलती को स्वीकार कर सत्य प्रकट करते हैं, तो आप विश्वास कर सकते हैं कि वह कम से कम अपनी गलती तो स्वीकार कर रहा है और मुझे सब कुछ बता रहा है। पर यहां आपको सावधान रहना चाहिये क्योंकि लोग आपको उतनी ही सच्चाई बताते हैं जितना कि वे आपको विश्वास में लेने के लिए जरूरी समझते हैं। अधिकांश मामलों में आपको पूरी सच्चाई नहीं बताएंगे क्योंकि कोई भी पूरी तरह से एक्सपोज़ नहीं होना चाहता है वह सिर्फ एक झटके में अपना मुखौटा गिरने नहीं देना चाहता है, यदि आप अधिक खोदते हैं तो आप अधिक हैरान हो सकते हैं।

7- अंतिम सत्य यही है कि हर इंसान को अपनी लड़ाई खुद लड़नी पड़ती है।