कुछ चीजें जो जीवन में ज्यादा महत्व नहीं रखती हैं

1- फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर लाइक्स की संख्या, आपके अधिकांश फालोअर्स लाइक बटन पर क्लिक इसलिए करते हैं क्योंकि जब वे सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं तो वह आपके द्वारा लाइक पाने की उम्मीद करते हैं। यह कड़वा है लेकिन सच है।

2- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप स्कूल की परीक्षा में शीर्ष पर हैं या विफल हैं। अंक वास्तव में आपके जीवन में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाते हैं। आत्म- विकास पर ध्यान केंद्रित करना कहीं ज्यादा बेहतर है। एेसे बहुत से उदाहरण हैं जिन्होने स्कूल में बहुत अच्छा नहीं किया पर जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल किया।

3- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जीवन में आपका कोई ब्वाय फ्रेंड या गर्ल फ्रेंड है या नहीं , ब्वाय फ्रेंड या गर्ल फ्रेंड का होना जीवन में अनिवार्य नहीं है। इनके बिना भी जिंदगी में बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।

4- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप लंबे या छोटे, मोटा या पतले, काले या गोरे हैं। आपके शरीर की आकृति आपकी आंतरिक सुंदरता को परिभाषित नहीं करती है।

5- ब्रेकअप का मतलब जीवन का अंत नहीं है। आगे बढ़ना सीखिये, आप हमेशा किसी बेहतर को पा सकते हैं।

6- आप लोगों को उनकी जाति और भाषा से जज नहीं कर सकते हैं। कोई भी इंसान जाति या भाषा के आधार पर श्रेष्ठ या निम्न नहीं होता है, इंसानों के साथ केवल इंसानियत का व्यवहार कीजिए।

7- इंटरव्यू में खारिज होना या कॉलेज प्लेसमेंट में सेलेक्ट नहीं होना जीवन का अंत नहीं है, हो सकता है कुछ बड़ा आपके लिए इंतजार कर रहा हो।

बस चलते रहना जरूरी है

जब भी इन्सान कोई निर्णय लेता है तो वह यह सोच के नहीं लेता कि यह गलत साबित होगा। दरअसल निर्णय आज की परिस्थितियों में लिए जाते हैं जबकि कल की बदली हुई परिस्थितियां उन्हें सही या गलत साबित करती हैं। कल किसी ने नहीं देखा है पर इंसान की फितरत होती है अनुमान लगाने की और इसी आधार पर वह निर्णय लेता है।

जीवन ताश के खेल की तरह है। हमने खेल का आविष्कार नहीं किया है और न ताश के पत्तों के नमूने ही हमने बनाये हैं। हमने इस खेल के नियम भी खुद नहीं बनाये और न हम ताश के पत्तों के बँटवारे पर ही नियंत्रण रख सकते हैं। पत्ते हमें बाँट दिये जाते हैं, चाहे वे अच्छे हों या बुरे। इस सीमा तक नियति या भाग्य की भूमिका है।

पर हम खेल को अच्छे या खराब ढंग से खेल सकते हैं। हो सकता है कि किसी कुशल खिलाड़ी के पास खराब पत्ते आये हों और फिर भी वह खेल में जीत जाये। यह भी संभव है कि किसी खराब खिलाड़ी के पास अच्छे पत्ते आये हों और फिर भी वह खेल को बिगाड़ करके रख दे। हमारी जिंदगी किस्मत और चुनाव का मिश्रण है।

कल किसी ने नहीं देखा है पर इंसान की फितरत होती है अनुमान लगाने की और इसी आधार पर वह निर्णय लेता है।आप कितनी सटीकता से भविष्य का अनुमान लगा सकते हैं यह आपकी दूरदर्शिता को निर्धारित करता है और आपकी दूरदर्शिता निर्धारित करती है आपके निर्णय के सफल या असफल होने की संभावना को। अनुमान तो कोई भी लगा सकता है पर अनुभव के साथ अनुमान लगाने की संभावना बढ़ जाती है।

यदि हमारा वर्तमान मुश्किल परिस्थितियों में घिरा है तो इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि हमारा भविष्य भी अन्धकारमय होगा। हमारा भविष्य भी उज्ज्वल हो सकता है। आवश्यकता है ध्यानपूर्वक यह देखने की कि जो कुछ हमारे पास है उसका सबसे अच्छा उपयोग हम कर पा रहे हैं अथवा नहीं?

यदि हम उपलब्ध साधनों का दुरुपयोग करते हैं, तो चाहे वह कितने ही तुच्छ और सारहीन क्यों न हो, हम उसके भी अधिकारी नहीं रहेंगे। यह साधन भी हमसे दूर चले जायेंगे या छीन लिए जाएंगे।

खुद के सुधार के बिना परिस्थितियाँ नहीं सुधर सकतीं। अपना दृष्टिकोण बदले बिना जीवन की गतिविधियाँ नहीं बदली जा सकती हैं। इस बात को इंसान जितनी जल्दी समझ ले उसके लिए उतना ही अच्छा है।

हम जीवन में इतना कन्फ्यूज क्यों रहते हैं

उमंग बहुत महत्वाकांक्षी युवक था,वह जीवन में सब कुछ पा लेना चाहता था। वह बहुत बड़ा आदमी बनना चाहता था, पहले वो सोचता था कि बस एक अच्छी नौकरी मिल जाए तो फिर कुछ नहीं मांगूगा। वह रात दिन उसी के सपने देखने लगा, मेहनत करने लगा, उसी के बारे में सोचने लगा। जिन्दगी ने इम्तिहान लिया, कई बार लिया फिर वो सफल हो गया। उसे मिल गयी थी वह नौकरी जिसके बारे में वो सोचता था।

थोड़े दिनों बाद उसे लगने लगा कि उसे जो मिला है वो अधूरा है और लोगों की तुलना में कम है। उसने नौकरी छोड़ दी और बिजनेस शुरू किया। उसकी समझ में अब दुनियादारी की मिलावट थी।

इस बार उसने मेहनत कम की और चालाकी एवं होशियारी पर ज्यादा ध्यान दिया और अपनी अधूरी जिन्दगी को पूरा करने की कोशिश करने लगा। अब उसे कर्मफल पर कम और अपनी होशियारी पर ज्यादा भरोसा हो गया था।

दुनिया की नजर में उसमें आत्मविश्वास आ गया था। उसे इस बार संघर्ष कम करना पड़ा और काफ़ी हद तक वो अपने इरादों में सफल भी हुआ था उसके पास पैसा और रूतबा सब कुछ था।

फिर भी न जाने क्यों जिदंगी का अधूरापन दूर नहीं हुआ बार बार ध्यान उन चीजों की तरफ जाता था जो उसने हासिल नहीं की थी। उसकी बेचैनी बढ़ी तो उसने दिमाग दौड़ाया और अधूरे को पूरा करने का प्लान बनाया।

इस बार उसने पूरा ध्यान होशियारी पर दिया, उसे अब ईश्वर,सत्य,नियति पर बस दिखावे के लिए भरोसा था। अब उसकी नज़र में सब जायज़ था। दूसरों की नजर में अब उसमें अहंकार आ गया था। उसे इस बार जो मिला वो पहले से ज्यादा था। वह दुनिया की नजर में बहुत सफल हो गया था।

थोड़े दिनों बाद उसे लगने लगा कि वह अभी भी सन्तुष्ट नहीं है। अपने शिखर पर पहुंच कर वो अकेला था। उसकी नजर में होशियारी ही सर्वोपरि थी।

वक्त के अपने नियम होते हैं जो किसी के लिए नहीं बदलते कुछ पलों के लिए लगता है कि जीवन और वक्त हमारे नियन्त्रण में है और हम जो चाहें वो कर सकते हैं और हमारी होशियारी हमें बचा लेगी पर वक्त के नियम नहीं बदलते।

उसका भी वक्त बदल रहा था, जिन्दगी के नियम लागू हो रहे थे पर बुद्धि को लाजिक नहीं समझ आ रहा था। वक्त के नियम लाजिक के परे थे। बहुत मुश्किल था अहंकार के लिए वक्त के आगे झुकाना उन रास्तों पर वापस लौटना जिन्हें वो पीछे छोड़ चुका था।

जब बेबसी ज्यादा बढ़ी तब उसने ईश्वर को पुकारा। अब उसे होशियारी पर कम और ईश्वर पर ज्यादा भरोसा था। अब वह वापस मुड़ गया था जिसकी दिशा केन्द्र की ओर थी, उसे जीवन का लक्ष्य स्प्षट हो गया था, उसके जीवन का सारा कन्फ्यूजन समाप्त हो गया था।

क्योंकि हर शुरूआत के लिए नये सवेरे की आवश्यकता नहीं होती है

1- आपको हर बार शुरू करने के लिए एक नये दिन की आवश्यकता नहीं होती है, कभी-कभी आपको केवल अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत होती है जिसके बदलते ही परिणाम भी बदल जाते हैं।

2- आज का दिन सिर्फ एक और दिन नहीं है, यह आपके लिए अपने सपनों को सच करने का एक और मौका है।

3- कुछ खास आपका हर दिन इंतजार कर रहा है, आपको बस इसे पहचानना है और इस मौके को पूरी तरह भुनाना है।

4- प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत आपके विचार हैं, इसलिए अच्छा सोचिए और खुद को जीतने के लिए प्रेरित करिए।

5- आपकी पिछली गलतियां आपको परिभाषित नहीं करती हैं। इनका होने मतलब बस आगे के रास्तों पर चलने के लिए आपके मार्गदर्शन करने के लिए है।

6- जो आपने कल पूरा नहीं किया उसके पछतावा में आज मत जागिए, आज आप जो हासिल करेंगे उसके बारे में सोचते हुए जागिए।

7- सब कुछ आपके दिमाग से शुरू होता है और वहीं पर समाप्त होता है। आप जो सोचतें हैं वही आप पर राज करता है।

8- यह दिन कभी भी आपके जीवन में कभी वापस नहीं आएगा, उठिए और इससे सर्वश्रेष्ठ हासिल करने का प्रयास कीजिए।

9- हम जो सबसे बड़ी गलती करते हैं, वह यह है कि अन्य लोग भी उसी तरह से सोचते हैं, जिस तरह से हम सोचते हैं।

हर पल बदल रही है रुप जिंदगी

काल से ताकतवर कुछ भी नहीं होता। इसके आगे सब बेबस हो जाते हैं। जीवन, परिस्थितियां,घटनाएं सबकुछ काल के अधीन होती हैं। जब वक्त बदलता है तो यह परिस्थितियों को रूपांतरित कर देता है।

यह इंसान की फितरत होती है कि जब वक्त अच्छा होता है तब वो सबकुछ आसान समझता है और बुरे वक्त का ख्याल करना ही नहीं चाहता है।

जब सूर्य उदय या अस्त होता है दोनों समय उसका रंग लाल होता है। केवल दिशा का फर्क आने वाले समय को निर्धारित करता है। यह बताता है कि सुबह होगी या फिर अंधेरी रात आयेगी, दोनों ही स्थितियों में सूरज का रंग और आकार एक जैसा होता है।

हम समझते हैं कि अन्य और बहुत सी चीजों की तरह कल के बारे में भी पूर्वानुमान किया जा सकता है जबकि वास्तविकता यह है कि कोई भी नहीं जानता है कि अगले पल क्या होने वाला है।

लोग सोचते हैं कोई बीमारी या दुर्घटना हो भी गई तो मेरे पास उससे निपटने के लिए कई साधन हैं पर समय का ऊँट किस करवट बैठेगा,यह किसी को पता नहीं होता।

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके कितने अनुभवी हैं और उन अनुभवों ने आपको क्या सिखाया है, जीवन हमेशा आपको एक अप्रत्याशित झटका देता है जिसके लिए अक्सर आप तैयार नहीं होते हैं।

समय के साथ प्राथमिकताएं बदलतीं हैं, विफलताओं से मत डरिये, कभी-कभी असफल होने का मतलब सीखने में पहला प्रयास होता है। जो बीत गया वो आपके दिमाग में है और जो होना है वो आपके हाथ में है।

आवश्यकता है चीजों को गौर से देखने की और समझने की प्रकृति भी यही संदेश देती है कि हर उगने वाले सूरज के साथ ढलने वाला सूरज भी साथ होता है अजीब बात है कि दोनों देखने में एक जैसे लगते हैं और दोनों का रंग और आकार भी एक जैसा होता है।

जीवन को खूबसूरत बनाने के कुछ बेहतरीन टिप्स क्या हैं ?

1- भले ही आप इसे समझ नहीं पा रहे हों तो भी जिंदगी की यात्राओं पर भरोसा करना सीखिये। कभी-कभी आप जीवन में जो नहीं चाहते थे या जीवन में जिसकी उम्मीद नहीं थी, वह घटित होना वह सबक साबित होता है जिसकी वास्तव में आपको जरूरत थी।

2- आपके साथ होने वाली हर छोटी चीज का कुछ न कुछ सार्थक मतलब होता है। हर वर्ष के बाद कुछ बिंदुओं को फिर से कनेक्ट करें और आपको पता चलेगा कि किसी कारण से ही वह सब कुछ हुआ है।

3- खुद को विनम्र रखिये और अस्वीकृति और विफलता को कोशिशों के सबूत के रूप में स्वीकार करिये। जो लोग कोशिश करते हैं और असफल होते हैं वे उन लोगों की तुलना में काफी बेहतर होते हैं जो बिल्कुल प्रयास नहीं करते हैं।

4- दूसरों के साथ अपने जीवन की तुलना न करिये क्योंकि सूर्य और चंद्रमा के बीच कोई तुलना नहीं है। दोनों अपने-अपने समय पर चमकते हैं।

5- शादी के बाद जीवन बदलता है। कुछ लोग अभी भी इस धारणा में रहते हैं कि वे शादी के बाद भी बेचलर की तरह रह सकते हैं। याद रखिए, यह इस तरह से काम नहीं चलता है। विवाह के बाद आपको अधिक जिम्मेदार और सभ्य बनना ही होगा।

6- शराब पीना और धूम्रपान करना आपको कम उम्र में मौत के बिस्तर तक ले जाएगा। यह दूसरों के लिए स्टाइलिश दिखता है लेकिन वास्तव में यह आत्महत्या करने का ही एक तरीका है, इनसे हर हाल में बचिये।

7- उन लोगों के बीच अंतर करना सीखिये जो आपके असली मित्र हैं और जो सिर्फ दोस्ती का दिखावा करते हैं। सांपों के समूह से बेहतर कुछ कम दोस्तों का साथ है।

8- अपने परिवार से प्यार कीजिए। हम अक्सर अपनों के प्यार को समझ नहीं पाते हैं और घर के बाहर प्यार की तलाश करते रहते हैं। हकीकत में यह परिवार ही है जहां जीवन शुरू होता है और प्यार कभी खत्म नहीं होता है।

विचारों की ताकत को इग्नोर मत कीजिए

आज दुनिया जैसी भी दिखाई देती है वह पूर्व में हमारे मन में उठने वाले विचारों का परिणाम है। आज दुनिया में जितनी अच्छी चीजें, अविष्कार,प्रगति दिखाई देती है वह परिणाम है उन सकारात्मक विचारों का जिनका जन्म किसी मनुष्य के ह्रदय में हुआ था और दुनिया में जो भी नकारात्मकता है,सत्ता और शक्ति का दुरुपयोग है वह भी परिणाम है उन नकारात्मक विचारों का जिनका जन्म किसी मनुष्य के ह्रदय में हुआ होगा।

1- मनुष्य का जीवन घटनाओं का समूह है और ये घटनाएं हमारे विचारों का परिणाम हैं। विचार एक शक्ति है जिसका उपयोग करके हम जीवन में बहुत ऊंचा भी उठ सकते हैं और इस शक्ति का दुरुपयोग हमें पशुओं के स्तर से भी नीचे गिरा सकता है।

2-मन ही विचारों का उद्गम और अंत स्थल है, विचार मन से ही जन्म लेते हैं और मन में ही समाप्त हो जाते हैं। हमारे विचारों का हमारे जीवन की हर एक घटना पर प्रभाव पड़ता है।

3-विचार भी बच्चों की तरह होते हैं, वे भी अपना पराया, भला बुरा नहीं समझते हैं और बस कभी भी, कहीं भी, कहीं से भी हमारे पास चले आते हैं ।यदि हम आने वाले विचारों का स्वागत करते हैं, उन्हें अपनाने का प्रयास करते हैं तो वे पुष्ट होते हैं, बढते हैं, विकसित होकर हमारा पुनर्निर्माण करते हैं।

4-यदि विचारों को दुत्कार दिया जाए ,उन्हें बेइज्जत कर दिया जाए, उनकी परवाह न की जाए तो फिर एेसे विचार हमारे पास से चले जाते हैं। ये विचार मृतप्राय होकर हमारे मन की गहराइयों में दफन हो जाते हैं।

5-सभी विचार न तो हर एक के लिए अच्छे होते हैं और न ही बुरे, विचारों को चुनने के लिए मनुष्य स्वतंत्र है। जो विचार आपको अच्छा लगता हो, जिनसे अच्छी आदतें बनती हों, जो उत्तम स्वभाव का निर्माण करते हों एेसे विचार हमारे मित्र के समान हैं। एेसे विचारों का हमें खुले दिल से स्वागत करना चाहिए,इन विचारों का बार-बार चिंतन करना चाहिए।

6- विचारों में बहुत शक्ति होती है,हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं।नकारात्मक विचार नकारात्मकता को और सकारात्मक विचार सकारात्मकता को आकर्षित करते हैं।

7- विचार वह शक्ति है जिसका उपयोग अच्छे और भलाई के कामों में भी किया जा सकता है और इस शक्ति को एेसे कामों में भी नष्ट किया जा सकता है जो मानवता को कलंकित करते हैं।

कुछ लक्षण जो बताते हैं कि आप पहले से ज्यादा मेच्योर हो गए हैं

1- जब कोई तारीफ करे तो बहुत खुशी न हो और अहंकार ना आये और जब कोई निंदा करे तो गुस्सा न आये बल्कि आप उस निंदा पर विचार करें और यह सोचें कि दूसरे ने ऐसा क्यों कहा।

2- जब दुख ज़्यादा दुख न लगे और खुशी में ज़्यादा खुशी न हो और जब आप ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव बिना परेशानी के झेल पाए और उसे कभी ईश्वर की मर्जी,तो कभी अपनी नियति जानकर एक्सेप्ट कर

3- जब आप फेसबुक, इंस्टाग्राम पर अपना ज्यादा समय बर्बाद ना करके अपने लक्ष्यों को अपना ज्यादा समय देने लगें।

4- जब आप अपने जज़्बातों को सोशल मीडिया पर शेयर ना करके उस व्यक्ति के साथ सुलझाने की कोशिश करते है , जिसके साथ आपका मन मुटाव हुआ है।

5- जब आप समझते है कि हर बार आप सही नहीं हो सकते और सामने वाले की पूरी बात सुनने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं |

6- जब आप अपनी गलतियों को मानते हैं और सामने वाले व्यक्ति की भावनाओं का सम्मान दिल से करते हैं।

7- जब आप अलविदा कहने की हिम्मत रखते हैं और समझते है कि कोई भी आपका साथ जीवन भर नहीं देगा और आपको अपना सफर अकेले ही तय करना है।

8- जब आप जिम्मेदारियों से मुँह नहीं मोड़ते हैं और जो जैसा है उसे वैसे ही स्वीकार करना सीख लेते हैं।

खुद से दोस्ती क्यों जरूरी है ?

हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है? यदि हमें इस प्रश्न का उत्तर खोजना है तो इसकी तलाश खुद के भीतर से ही प्रारंभ करनी होगी, खुद को समझ लेने के बाद ही संसार से प्राप्त ज्ञान का सही उपयोग हो पाता है अन्यथा यह ज्ञान खोखला ही साबित होता है जो सिर्फ हमारे भीतर अहंकार का ही पोषण करता है।

इससे पहले कि हम यह जानें कि हम क्या होगें, यह जान लेना जरूरी है कि हम क्या हैं? हम जो भी हैं उसे पहचानकर, समझकर ही उस भविष्य की रचना की जा सकती है जो अभी तक हमारे भीतर कहीं सो रहा है।

ज्ञान और जानकारी में फर्क है जो हमें अपने भीतर से, खुद को खोजने से, खुद के विषय में प्राप्त होता है वही ज्ञान है बाकी जो कुछ हम संसार से सीखते हैं वो जानकारी है। हममें से ज्यादातर लोगों के पास जानकारी तो बहुत है पर ज्ञान बहुत अल्प या नहीं के बराबर है।

ज्ञान प्राप्त करने की पहली शर्त खुद को जानने की है। यदि इस बिंदु पर अंधकार है तो सब जगह अंधेरा है। यदि यहां प्रकाश है तो सर्वत्र उजाला है।

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हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम स्वयं के प्रति उदासीन हैं। हम खुद के प्रति सजग नहीं हैं। चिराग तले अंधेरा वाली कहावत हमारे जीवन में सत्य सिद्ध हुई है। एेसे में यदि हमारी जीवन भटककर गलत दिशा में चला जाता है तो इसमें अचरज कैसा ?

खुद के प्रति अनजान बने रहने के कारण हमारी जिंदगी की स्थिति उस नाव की भांति है जिसका मांझी सो गया है फिर भी नाव किसी तरह, इधर-उधर लहरों के सहारे बही चली जा रही है।

खुद को जानना ही ज्ञान की पराकाष्ठा है। खुद को समझे बिना किसी और को समझने का मूल्य कुछ भी नहीं है। जो खुद से बेगाना है वह दूसरों से कितना भी घुल मिल जाए उसका कोई अर्थ नहीं है। स्वयं के अनुभव के बिना दूसरों से प्राप्त ज्ञान में हित कम अहित ज्यादा है।

आसान नहीं है खुद को जानना, बहुत कोशिश करनी पड़ती है पर जीवन को सार्थक बनाने की यह अनिवार्य शर्त है। आप भी खुद को समझने की कोशिश कीजिए, मैं भी कर रहा हूं।

जिंदगी में हम पैसों के पीछे भागने से खुद को कैसे रोक सकते हैं ?

जीवन में हम पैसोंं के पीछे जितना भागते हैं वह हमसे उतना ही दूर चला जाता है। पैसा जीवन में आवश्यक है लेकिन सब कुछ नहीं है।

पैसे के बिना जीवन सम्भव नहीं। आज के युग में ये मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। पैसा सब ज़रूरतें पूरी करने का माध्यम है। इंसान को आज की ही नहीं कल की भी चिंता होती है यहां तक कि समझदार जीव भी बुरे समय के लिए भोजन संचित करके रखते हैं।

पैसा भोजन की तरह होता है , हम सभी यह जानते हैं कि बिना भोजन के कोई भी जीवित नहीं रह सकता है। उसी तरीके से बिना पैसे के इस दुनिया में जीवित रहना बहुत मुश्किल है।

लेकिन यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है की जरूरत से ज्यादा खाना स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने की बजाय, स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है और इसीलिए हम अपने खाने पर नियंत्रण रखते हैं।

कल्पना कीजिए कि आपको किसी पार्टी में बुलाया गया है और वहां पर तरह- तरह के व्यंजन आपके सामने परोसे गए हैं और आप को इस खाने का कुछ भी पेमेंट नहीं करना है । ऐसी स्थिति में अक्सर खुद को रोक नहीं पाते हैं और जितना आपको खाना चाहिए उससे कई गुना ज्यादा आप खा लेते हैँ। यह जानते हुए भी कि जरूरत से ज्यादा खाना हमारे स्वयं के स्वास्थय के लिए हानिकारक है।

ठीक ऐसे ही, हम जब ऐसी पोजीशन में रहते हैं जहां पर हम पैसा कमा सकते हैं, चाहे वह गलत तरीके से हो या सही तरीके से हो, हम खुद को रोक नहीं पाते हैं।

इसी वजह से दुनिया में ज्यादातर लोग पैसे के पीछे भागते रहते हैं और कभी यह जानने की कोशिश नहीं करते की वह पैसा क्यों कमाना चाहते हैं और वह इस पैसे का क्या इस्तेमाल करेंगें?

रियल लाइफ में पैसा कमाना बहुत मुश्किल होता है। यदि आप बहुत सारा पैसा कमाना चाहते हैं तो आपको अपना समय, अपनी ऊर्जा और यहां तक कि अपना मानसिक संतुलन भी दांव पर लगाना पड़ता है।

बीत गया समय कभी भी वापस नहीं आता,खराब हुआ स्वास्थ्य भी कभी वापस नहीं आता है,जो रिश्ते हम खो देते हैं वह भी वापस नहीं आते हैं जो बुरे कर्म पैसा कमाने में हम करते हैं वह हमारा कभी पीछा नहीं छोड़ते हैं।

आपको सिर्फ इतना पैसा कमाना चाहिए जितना कि जरूरी हो, ताकि आपके पास में पर्याप्त समय और ऊर्जा हो जिससे कि आप अपने जीवन की और भी चीजें जो महत्वपूर्ण और मूल्यवान हैं उनको प्राप्त कर सकें।

किसी ने सच ही कहा है पैसा वह वस्तु है जिससे आप कितना भी कमा लो, कम ही लगता है।