जिन्दगी में सिर्फ नकारात्मकता ही नहीं है

समय या मिली हुई परिस्थितियों को बदल पाना सभी के लिए संभव नहीं होता है। यह परिवर्तन स्वयं होता है जिसे हमें स्वीकार करना पड़ता है। जिस तरह रात को हम दिन में नहीं बदल सकते हैं पर बिजली के बल्ब को जलाकर अँधेरे को दूर कर सकते हैं, उसी तरह परेशानियों,समस्याओं, बाधाओं, दुख के आने पर इन्हें हम तुरंत तो दूर नहीं कर सकते पर परिस्थितियों को समझकर, सही काम करके, सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए हम सही दिशा में प्रयास जारी रख सकते हैं और इनके प्रभाव को कम कर सकते हैं।

जीवन में आने वाली परिस्थितियों, घटनाओं और व्यक्तियों में हम क्या देखते हैं ? यह बहुत कुछ हमारे नजरिये पर निर्भर करता है। जिसका नजरिया नकारात्मक है उसे हर व्यक्ति हर वस्तु में केवल कमियां और त्रुटियां ही नजर आएंगी, जिसका नजरिया सकारात्मक है वह हर परिस्थिति में अच्छाई ढूंढ लेता है ।

यह तो मनुष्य का स्वभाव है कि वह दूसरों को सफल और खुद को असफल देखकर दुखी होता है। यदि हम ईमानदारी से अपना मूल्यांकन करें तो हम देखेंगे कि दूसरों सफल होने के लिए हमें दुखी होने की नहीं बल्कि अपनी गलतियों और भूल को सुधारने की आवश्यकता है। सुख और दुख जीवन में आते जाते रहेंगे पर आवश्यकता है यह सीखने और समझने की कि हम खुद को इन परिस्थितियों के लिए कैसे तैयार रख सकते हैं। जिससे हम इन परिस्थितियों को बेहतर समझ सके और इन्हें सहन भी कर सकें।

हम रोज अपनी जिन्दगी में ना जाने कितनी परेशानियों को झेलते हैं और हम सारी परेशानियों के लिए हमेशा दूसरों को दोषी ठहराते हैं, कुछ लोगों को तो दुनिया की हर चीज़ और हर नियम में दोष दिखाई देता है। हम सोचते हैं कि उस आदमी की वजह से आज मेरा काम बिगड़ गया या उस व्यक्ति की वजह से मैं असफल हो गया, सड़क पर पड़े कूड़े को देखकर सभी लोग नाक पर रुमाल रखकर दूसरों को गलियां देते हुए निकल जाते हैं लेकिन कभी खुद सफाई के लिए आगे नहीं आते हैं।

जिन्दगी में सिर्फ नकारात्मकता ही नहीं है । सभी के पास काफी कुछ एेसा है जो दूसरों के पास नहीं है, विचारों में बहुत शक्ति होती है हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं। हम कभी खुद को सुधारने की कोशिश नहीं करते, कभी खुद परिवर्तन का हिस्सा बनने की कोशिश नहीं करते। एक एक बूंद से घड़ा भरता है और आपका प्रयास एक बूंद ही सही लेकिन वो बूंद घड़ा भरने के लिए बहुत जरुरी है।

इंटेलिजेंट और बुद्धिमान व्यक्ति के बीच क्या फर्क होता है

1- एक इंटेलिजेंट व्यक्ति हमेशा आपको सही उत्तर देगा जबकि एक बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा आपसे सही सवाल पूछेगा।

2- इंटेलिजेंट व्यक्ति यह जानता है कि कब और कहां बोलना है जबकि बुद्धिमान व्यक्ति यह जानता है कि कब और कहां चुप रहना है।

3- कोई व्यक्ति जन्म से स्मार्ट हो सकता है लेकिन लोग बुद्धिमान केवल अनुभवों के साथ बनते हैं।

4- एक इंटेलिजेंट व्यक्ति जानता है कि किसी भी परिस्थिति में प्रतिक्रिया को कैसे व्यक्त करना है जबकि एक बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि किसी भी परिस्थिति से कैसे निपटना है।

5- इंटेलिजेंट व्यक्ति हमेशा अपनी गलतियों से सीखते हैं जबकि बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा दूसरों की गलतियों से सीखते हैं।

6- एक इंटेलिजेंट व्यक्ति जानता है कि कैसे तर्क के द्वारा जीतना है जबकि एक बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि कैसे लोगों को जीतना है।

7- एक इंटेलिजेंट व्यक्ति सोचता है कि वह जानता है, एक बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि वह सोचता है।

8- एक इंटेलिजेंट व्यक्ति अपनी क्षमताओं के बारे में जानता है और उनके बारे में आश्वस्त होता है जबकि बुद्धिमान व्यक्ति अपनी कमजोरियों के बारे में जागरूक रहता है और अधिक सीखने के लिए तैयार रहता है।

9- इंटेलिजेंस चीजों को पकड़ना है जबकि बुद्धिमानी आगे बढ़ते रहना है।

10- जो कहा गया है उसे समझना इंटेलिजेंस है जबकि जो नहीं कहा गया उसे समझ पाना बुद्धिमानी है।

हर गलती को यहां माफ़ी नहीं मिलती है

प्रकृति कभी क्षमा नहीं करती है। कर्मों के विधान में क्षमा का प्रावधान नहीं है। प्रकृति एक तरह के अनुशासन में बंधी है और जो भी इस सीमा का अतिक्रमण करता है, उसे क्षमा नहीं मिल मिल सकती, दंड अवश्य मिलता है।

ठंड की रातों में खुले बदन निकल पड़ने पर प्रकृति क्षमा नहीं करेगी, ठंड तो लगेगी ही, गर्मी की दोपहर में निकलने पर लू माफ नहीं करेगी वह अवश्य ही झुलसा देगी, उसी तरह यह प्रकृति भी कुछ शाश्वत नियमों और कायदों से परिचालित है। जो भी इन नियमों का उल्लंघन करेगा वह दंड पाएगा उसे क्षमा नहीं मिल सकती है।

तर्क कितना भी कर लिया जाए, होशियारी कितनी भी दिखा ली जाए पर यदि हम प्रकृति के नियमों की अवहेलना करते हैं तो उसके अनुरूप हमें दंड पाने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह सोच कि ईश्वर हमारी हर गलती को माफ कर देगा उचित नहीं है।

रावण का अंत करने वाले स्वयं भगवान श्रीराम थे जिनकी करूणा और संवेदना जग जाहिर है फिर भी उन्होंने बुराई को क्षमा नहीं किया। जब कोई ईश्वरीय विधान को तोड़ता है तो उसे क्षमा नहीं मिलती है। बुराई को यदि क्षमा कर दिया जाए तो जीवन में अराजकता बढ़ती है, अराजकता अनुशासन के विरूद्ध है और इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

अनीति और अत्याचार का साथ देना भी अनीति करने जैसा ही है इसलिए प्रकृति अनीति का साथ देने वाले को भी नहीं बख्शाती है। इस दुनिया में प्रकृति के नियम सर्वोपरि हैं उनसे बड़ा व ऊंचा कोई भी नहीं है।

इसके विपरीत जो प्रकृति के नियमों का सम्मान करते हैं और उसके संचालन में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष सहयोग देते हैं तो प्राकृतिक शक्तियां भी उसका सहयोग करती हैं और अपने तरीके से लाभान्वित और पुरस्कृत करती हैं।

अनीति, अत्याचार एवं बुराई का विरोध होना ही चाहिए पर दंड देने का अधिकार हर किसी के पास नहीं होता है। इसकी एक व्यवस्था होती है और उस व्यवस्था पर दंड देने का फैसला छोड़कर हमें गलत का विरोध करना चाहिए।

हमें स्वयं अनुशासन में रहते हुए प्रकृति के नियमों के अनुरूप सही मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। ईश्वर का सच्चा बंदा कभी ईश्वर के विधान का उल्लंघन नहीं करता है, इसका उल्लंघन तो अहंकारी और उदंड आसुरी शक्तियां करती हैं और जिन्हें क्षमा नहीं दंड दिया जाता है।

हमारी रूटीन लाइफ कब तक जारी रहती है

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1- रोज हमारे जीवन में एक ही तरह का रूटीन, एक ही तरह की बातें, वही चिंता, वही शिकायतें, वही पुराने विचार आते हैं । हम भी उनसे न तो पीछा छुड़ा पाते हैं और न ही कुछ उससे आगे सोच पाते हैं।

2- इस संसार में कुछ भी एेसे ही नहीं मिल जाता, यह दुनिया तौलकर कर्मों के हिसाब से सुख और दुख देती है। यहां सबकुछ नियमों से बंधा हुआ है यदि इस नियम में थोड़ा सा भी विचलन होता है तो जीवन में भारी उथल-पुथल मचती है।

3- जीवन हर पल कुछ नया सिखाता है यदि हम सीखना चाहें, कुछ नया करने की जीवन को बदलने की जितनी छटपटाहट हमारे विचारों में, हमारी बातों में होती है उतनी हमारे कार्यों में नहीं दिखती । हमारी अधिकतर ऊर्जा यों ही व्यर्थ चली जाती है।

4- संसार के सफल व्यक्तियों की, एक विशेषता अनिवार्य रूप से रही है, कि वे अपने मस्तिष्क पर काबू प्राप्त किये रहते हैं। जो निश्चय कर लिया उसी पर अविचल भाव से चलते रहे हैं, उन्होनें बीच में मन को डगमगाने नहीं दिया है।

5- हो सकता है, कि आपकी नौकरी जा चुकी हो, किसी ने आपका साथ छोड़ दिया हो, या किसी ने धोखा दिया हो, या किसी के व्यवहार ने चोट पहुंचाई हो, फिर भी हमें यह विचार करना ही होगा कि सच में ये सारी बातें कितने समय तक मायने रखेंगी।

6- शोध दर्शाते हैं, कि आप सफल होंगे या असफल इस विचार का आप के इस लक्ष्य को पाने की मेहनत पर प्रभाव पड़ेगा और कहीं ना कहीं इस का प्रभाव आप के प्रदर्शन पर भी पड़ेगा।

7- आप सफल होंगे, इस बात पर विश्वास करने से आप को और अधिक मेहनत करने में मदद मिलेगी हालाँकि, इस बात को याद रखें, कि आप के सफल होने या विफल होने, का दृष्टिकोण आप की असली सफलता को प्रभावित नहीं करेगा, इसे सिर्फ़ आप की मेहनत ही प्रभावित कर सकती है।

8- ऊपर कही गयी सभी बातों का सार यही है कि हम कितने ही असहाय, लाचार क्यूं न हो, राहें कितनी भी अँधेरी और परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यूं न हों, भीतर कुछ एेसा होता है जो मरता नहीं है।

9- भीतर की आवाज को सुन पाना मुश्किल है क्योंकि हमारी कोशिश हमारा ध्यान बाहर की आवाज को सुनने में लगा हुआ है।

10- जब हम अपने अंदर की उस आवाज को सुन पाते हैं तो हमें रास्ता मिल जाता है, शेष लोगों के लिए रूटीन लाइफ तब तक जारी रहती है।

जीवन के कुछ महत्वपूर्ण अनकहे नियम क्या हैं

1- कभी भी अपने माता या पिता को कठोर स्वर में जवाब न दें, या फिर तब जवाब न दें जब आप गुस्से में हों। क्रोध में आप महसूस कर सकते हैं कि आप सही हैं लेकिन बाद में आप इसे लेकर पछतावा जरूर महसूस करेंगे।

2- अपने दोस्तों को बुद्धिमानी से चुनें। आपकी संगत और दोस्तों का आप पर बहुत प्रभाव पड़ता है। आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि वे आपकी मानसिकता और आदतों को कितना प्रभावित करते हैं।

3- जिंदगी में कर्म बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह जीवन में अप्रत्याशित तरीके से वापस आते हैं। जीवन में सोच-समझकर बोलिये और अपने कार्यों को बुद्धिमानी से चुनिये।

4- आज जो कुछ भी आपके जीवन में चल रहा है, कुछ साल बाद आपको इसका अहसास होगा कि अच्छाई हर चीज में छिपी होती है।

5- अपने जीवन के किसी मोड़ पर आप निश्चित रूप से इस बात के लिए भगवान का शुक्रिया अदा करेंगे कि कुछ चीजें आपकी जिंदगी में वैसी नहीं हुईं जैसा कि आप चाहते थे।

6- बोलने से पहले हमेशा सुनने और समझने की कोशिश करिये। यह मुश्किल जरूर है लेकिन निरंतर अभ्यास से आप इसे अपनी आदत बना सकते हैं। और यह आदत आपकी जिंदगी आसान बना देगी।

7- दूसरों को उनकी वेश-भूषा एवं बाहरी रंग-रूप के आधार पर जज मत कीजिए। एेसा करके आप अक्सर कुछ बेहतरीन लोगों से मुलाकात को मिस कर देते हैं जिन्हें नियति ने आपके लिये चुना था।

8- लोग वैसे भी आपके बारे में बात करेंगे, हर किसी के लिए अपना रास्ता मत बदलिये।

9- जिंदगी में आत्म-सम्मान से अधिक महत्वपूर्ण प्यार है। अपने अहंकार को अपने प्रियजनों के लिए छोड़ दीजिये।

10- इससे पहले कि वे आपको तोड़ दें,नियमों को सीख लीजिये।

ह्यूमन साइक्लोजी के कुछ रोचक तथ्य जिन्हें आपको जानना चाहिये

1- मनोविज्ञान कहता है, जब कोई व्यक्ति रोता है और आंसुओं की पहली बूंद यदि दायीं आंख से आती है, तो इसका मतलब खुशी से है। यदि यह बाईं आंख से आती है, तो इसका रिश्ता दर्द से होता है।

2- मनोविज्ञान कहता है, जब भी आप किसी के बारे में बहुत सोचते हैं, तो एेसा इसलिए है क्योंकि वह वयक्ति आपके बारे में पहले से सोच रहा था।

3- मनोविज्ञान कहता है, आमतौर पर सबसे अच्छी सलाह वाले लोग सबसे अधिक समस्याओं से घिरे होते हैं।

4- मनोविज्ञान कहता है, इंटेलिजेंट लोगों में विवादों से बचने की प्रवृत्ति अधिक होती है, यही कारण है कि कुछ लोग क्यों सबकुछ देखते हैं लेकिन कहते कुछ भी नहीं हैं।

5- मनोविज्ञान कहता है, जिन चीजों का आपको बहुत इंतजार रहता है, वह अक्सर जीवन में तब आती हैं जब आप उनके बारे में सोचना बिल्कुल बंद कर देते हैं।

6- मनोविज्ञान कहता है, पहली बार किसी से मिलने पर, आपके पास अपना पहला इम्प्रेशन छोड़ने के लिए केवल 7 सेकंड होते हैं।

7- मनोविज्ञान कहता है, किसी व्यक्ति को आपके दिमाग से दूर करने में असमर्थ होना इस बात का संकेत है कि आप भी उस व्यक्ति के दिमाग में हैं।

8- मनोविज्ञान कहता है, पुरूष का दिमाग महिला के दिमाग की तुलना में 10% अधिक बड़ा होता है लेकिन महिला का दिमाग पुरूष के दिमाग की तुलना में अधिक कुशलता से काम करता है।

9- मनोविज्ञान कहता है, चाहे आप कितने भी मजबूत इंसान हों, हमेशा कोई ऐसा व्यक्ति होता है जो आपको कमजोर कर सकता है।

10- मनोविज्ञान कहता है, रात में सोने में असमर्थता का मतलब है कि आप किसी के सपनों में जाग रहे हैं।

क्योंकि हर चाहत पूरी नहीं होती है

चाह का पूरा न होना और अनचाहा घटित हो जाना ही हमारे दुखों का मूल कारण है। हम जन्म से ही कुछ न कुछ चाहते हैं और चाहत के पूरा न होने पर हम दुखी हो जाते हैं।

चाहत का बदला हुआ रूप आकांक्षा है। हम जीवन में ऊंचा पद, धन-दौलत, मान-सम्मान, ताकत- वर्चस्व सब कुछ पा लेना चाहते हैं। आकांक्षा प्रगति और विकास के लिए आवश्यक है पर साथ ही दुखों का कारण भी है। आकांक्षा रखना बुरा नहीं है पर जब यह अनियंत्रित होकर संग्रह की प्रवृत्ति से जुड़ जाती है तब यह न केवल स्वयं के लिए बल्कि समाज के लिए भी परेशानी और विषमता का कारण बनती है।

आकांक्षा जब नियंत्रण से निकल जाती है तब यह अहंकार और लालच को जन्म देती है और अहंकार से पैदा होता है क्रोध और संघर्ष। यह संघर्ष जब हिंसक हो जाता है तब यह कमजोर वर्ग को अपना शिकार बनाता है।

शोषण की इस अर्थव्यवस्था में समाज के संसाधनों जैसे भूमि और पूंजी पर कुछ लोग कब्जा करके शासक या मालिक बन जाते हैं और शेष लोग उनके लिए काम करने वाले। जिनका जीवन के साधनों पर कब्जा है उन्हें रोटी, कपड़ा और मकान की चिंता नहीं होती है पर उनके लिए काम करने वालों को घर का चूल्हा जलाए रखने के लिए रात-दिन संघर्ष करना पड़ता है।

साधनों पर कब्जा रखने वाले अधिकांश लोग आनंद एवं शांति की खोज में इधर-उधर भटकते रहते हैं पर जल में रहने वाली मछली के समान उनकी प्यास कभी नहीं बुझती है। एेसे कम ही लोग होते हैं जो स्वयं में गोता लगाकर सही जगह पर पहुंच पाते हैं।

दुख को जीवन का शाशवत सत्य माना गया है। मनुष्य चिरकाल से ही दुखों के निवारण का उपाय खोज रहा है। सुख की तालाश में हमने यही पाया है कि जीवन ही दुखों का कारण भी हैं और निवारण भी है। यह बात सत्य है कि किसी की हर चाहत पूरी नहीं हो सकती है।

मानव तू परिवर्तन से काहे को डरता है

1- परिवर्तन जीवन का अनिवार्य हिस्सा है। यह अनवरत जारी रहने वाली प्रक्रिया है, परिवर्तन हमारे चाहने या न चाहने पर निर्भर नहीं होता ये तो बस होता रहता है।

2- परिवर्तन मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं macro परिवर्तन और micro परिवर्तन ।

3- जो परिवर्तन हमे और दूसरों को होते हुए दिखाई देते हैं जैसे उम्र के साथ होने वाले परिवर्तन, रहन सहन में होने वाले परिवर्तन, वेशभूषा में और खानपान में होने वाले परिवर्तन आदि को macro परिवर्तन कहा जाता है

4- जो परिवर्तन सूक्ष्म होते हैं जैसे विचारों में होने वाले परिवर्तन, व्यवहार में होने वाले परिवर्तन आदि को micro परिवर्तन कहा जाता है।

5- हम अक्सर macro परिवर्तन को तो नोटिस करते हैं पर micro परिवर्तन को नोटिस नहीं कर पाते हैं। जो सूक्ष्म है उसे देख पाना आसान नहीं होता है।

6- जीवन में होने वाले परिवर्तन सकारात्मक भी होते हैं और नकारात्मक भी जो परिवर्तन जीवन में अनुकूल परिस्थितियां लाते हैं उन्हें सकारात्मक और जो परिवर्तन प्रतिकूल परिस्थितियां लाते हैं उन्हें नकारात्मक परिवर्तन कहते हैं।

7- हममे से ज्यादातर लोग परिवर्तन पसंद नहीं करते और इसके लिए तैयार भी नहीं होते हैं क्योंकि हमें हमेशा एक अज्ञात का डर होता है जिसे fear of unknown कहते हैं।

8- परिवर्तन लाने में हमेशा विरोध का सामना करना पड़ता है कभी यह विरोध खुद के भीतर से तो कभी बाहर से होता है।

9- जीवन में होने वाले बड़े परिवर्तन अकस्मात होते हैं जिसके लिए हम तैयार नहीं होते हैं और जब ये परिवर्तन होते हैं तो अक्सर जीवन बदल जाता है।

10- परिवर्तन में अवसर भी होता है और भय भी होता है जो इसमें अवसर देखते हैं वो आगे बढ़ जाते हैं और जो परिवर्तन से भयभीत हो जाता है वो वहीं रह जाता है जहां वो पहले था।

11- परिवर्तन स्थायी या पूर्ण नहीं होता यह लगातार चलने वाली अंतहीन प्रक्रिया है जिसका कोई अंत नहीं है। मैनेजमेंट की भाषा में इसे ही टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट कहते हैं।

12- यह लगातार दौड़ी जाने वाली एेसी रेस है जिसकी कोई फिनिशिंग लाइन नहीं होती है

तुम्हारी आँखों के आँसू बड़े अनमोल हैं

आँसू भी अभिव्यक्ति का एक माध्यम हैं। ये भावनाओं के अतिरेक को दर्शाते हैं। जब मानवीय संवेदनाएं अपने चरम पर पहुंच जाती हैं तो अपने आप को आंसुओं के माध्यम से अभिव्यक्त करती हैं।

मानवीय बुद्धि तर्क प्रधान और मन भावना प्रधान है। तर्क की भाषा वाणी तो मन की भाषा मौन है जो कि आँसूओं के माध्यम से व्यक्त होती है।

जैसा कि हम समझते हैं पर आँसू अनिवार्य रूप से दुखों का कारण नहीं होते हैं। दुख के अलावा करूणा में, आनंद में, हर्ष के अतिरेक में और कृतज्ञता में भी आंसू बहते हैं।

जब ह्रदय की संवेदनाएं और भावनाएं अपने चरम पर पहुंच जातीं हैं तब खुद को संभाले रहना मुश्किल हो जाता है। जब सुख और दुख की लहरें पूरी ताकत के साथ उफान मारती हैं तो सब्र का बांध टूट जाता है और भीतर जो कुछ है वह आंसू बनकर निकलने लगता है।

आँसूओं का भावनाओं और संवेदनशीलता से गहरा रिश्ता है। जिसके दिल में दूसरों के लिए संवेदना और प्रेम है उसकी आँखों से आँसू उतनी ही जल्दी बहते हैं। कुछ लोगों के दिलों में संवेदनाओं और भावनाओं के प्रति गहरी उदासीनता होती है, एेसे व्यक्तियों का दिल पत्थर का होता है और आखों के आँसू सूख जाते हैं।

आंसुओं का संबंध न तो दुख से है और न सुख से है। इनका रिश्ता तो बस भावनाओं के अतिरेक से है। जब ह्रदय पर कोई चोट पड़ती है, जब कोई अज्ञात भाव मन को छूता है, जब उम्मीद की कोई किरण ह्रदय को स्पर्श करती है तब दिल की गहराईयों में कुछ हलचल सी मचती है जो मन में पीड़ा अथवा आनन्द का तूफान ला देती है तब एेसी भावनाएं संभाले नहीं संभलती हैं और उनकी अभिव्यक्ति आँसूओं के रूप में होती है।

जिसके मन में दूसरों के लिए जगह और विचारों में गहराई है, सच्चे आंसू केवल उन्हीं की आखों से बहते हैं, जिनके मन शुष्क हैं उन्हें आंसुओं का सौभाग्य नहीं मिलता है। यदि भावनाएं निर्मल और विचार पवित्र हैं तो इनके शिखर पर पहुंचने पर जो आंसू निकलते हैं वो स्वयं ईश्वर को भी विवश कर देते हैं।

कुछ बातें जिंदगी में जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए

1- कभी – कभी लोगों को उनकी अपेक्षा से अधिक दीजिए और एेसा खुशी से करिये।

2- जब आप किसी से कहते हैं कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ तो जरूरत पड़ने पर इसे साबित भी कीजिए।

3- जब आप किसी से माफी मांगते हैं तो सामने वाले व्यक्ति की आंखों में देखिये।

4- लोगों को उनके रिश्तेदारों और कपड़ों से जज मत कीजिए।

5 – सोचिए तेजी से लेकिन लोगों से बातें हमेशा धीरे कीजिए ।

6- आप हार सकते हैं लेकिन सबक सीखना कभी मत छोड़िये।

7- छोटी-छोटी बातों में रिश्तों को चोट मत पंहुचने दीजिए।

8- जब आपको एहसास होता है कि आपने गलती की है तो तत्काल कदम उठाइए और सही वक्त आने की प्रतीक्षा मत करिये।

9- फोन पर बात करते समय मुस्कुराइए,सामने वाला इसे आपकी आवाज़ में में महसूस कर सकता है ।

10- नये बदलावों का बाहें खोलकर स्वागत कीजिए लेकिन अपने मूल्यों से समझौता कभी मत करिये।

11- अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दूसरों की मदद के लिए इस्तेमाल कीजिए। यह धन से मिलने वाली सबसे बड़ी संतुष्टि है।

12- घर पर सकारात्मक वातावरण का होना बहुत महत्वपूर्ण है। एक सामंजस्यपूर्ण घर बनाने के लिए आप जो कुछ कर सकते हैं जरूर कीजिए।