जिंदगी के कुछ खूबसूरत सच क्या हैं

अलग-अलग लोगों के जीवन के अलग-अलग परिप्रेक्ष्य होते हैं। यह पूरी तरह से निर्भर करता है कि आप यह प्रशन किससे पूछ रहे हैं?

कवि के लिए, जीवन एक कविता है।

एक कलाकार के लिए, जीवन एक मंच है।

लापरवाह मन के लिए, यह एक पार्टी है

आम आदमी के लिए, यह एक यात्रा है।

गरीबों के लिए, यह एक संघर्ष है।

एक नवजात शिशु के लिए दुनिया में आना ही जीवन है।

युवाओं के पढ़ाई और दोस्त बनाना ही जीवन है।

एक प्रोफेशनल के लिए अच्छी नौकरी पाना और करियर को सेटेल करना ही जीवन है।

एक पिता के लिए परिवार को एक अच्छी जिंदगी देना ही जीवन है।

एथलीट और स्पोर्ट पर्सन के लिए प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीतना ही जीवन है।

सुरक्षा बलों एवं सेनाओं के के लिए लोगों और देश की हिफ़ाजत करना ही जीवन है।

वैज्ञानिकों के लिए नये शोध करना ही जीवन है।

किसी के लिए अपने माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान देखना ही जीवन है।

किसी के लिए हर बार प्यार में पड़ना और फिर धोखा खाकर आगे बढ़ जाना ही जीवन है।

किसी के लिए बारिश में अकेले भीगना ही जीवन है।

किसी के लिए अपने सर्वोत्तम प्रयासों को करके भी असफल हो जाना और फिर पूरी शक्ति से प्रयास करना ही जीवन है।

लिस्ट बहुत लंबी है और सबके अपने नजरिये हैं। मेरे लिए,जीवन एक यात्रा है। जीवन के बारे में सबसे सुंदर चीज यह है कि हम कभी-कभी सफल हो सकते हैं,और कभी-कभी असफल हो सकते हैं।आप हर बार जीत नहीं सकते उसी तरह,आप हर बार हार नहीं सकते हैं। लेकिन यह अनुभव है जो हमें हर बार मिलता है और यही मायने रखता है। यही वो निशानी है जो हम दुनिया को दिखा सकते हैं और अंत में यही हमारे साथ रह जाता है।

वो झूठ भी अच्छा है

लिपिडेमा एक प्रकार का विकार है जिसमें त्वचा के नीचे वसा की अत्यधिक जमावट के कारण दोनों पैरों का असमान्य तरीके से विस्तार होता है। आम तौर पर यह समय के साथ बदतर होता जाता है, दर्द मौजूद होता है, और लोगों को आसानी से चोट लगनेे की संभावना होती है। इस बीमारी का कारण अज्ञात है लेकिन माना जाता है कि आनुवंशिकी और हार्मोनल कारक इसके लिए जिम्मेदार हैं।

उसने पूछा, “क्या मैं सुंदर दिखती हूं?”

“हाँ। तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो। ” लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा।

वह लड़की लिपिडेमा से पीड़ित थी और उसका बढ़ता हुआ वजन उसके नियंत्रण में नहीं था।

वह जानता था कि वह पतली दिखना चाहती थी। लेकिन वह मजबूर थी।

उस लड़के के लिए उसकी आंतरिक सुंदरता महत्वपूर्ण थी।

इसी कारण से उसने झूठ बोला।

झूठ बोलना सही है, जब आप इंसान की आत्मा को खरोंच पहुंचाना नहीं चाहते हैं।

हर कोई अच्छा दिखना चाहता है। लेकिन सभी भाग्यशाली नहीं होते हैं। कुछ लोग मजबूर हैं।

झूठ बोलिये, जब आप किसी को चोट नहीं पहुंचाना चाहते हैं।

झूठ बोलिये, जब आप किसी को डिमोटिवेट नहीं करना चाहते है।

झूठ बोलिये,  जब यह दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाता है।

झूठ बोलिये, जब यह दूसरों की शांति प्रभावित नहीं करता है।

झूठ बोलिये, जब यह दूसरों को बेहतर तरीके से सहज महसूस करता है।

कभी-कभी, हम अपनी भावनाओं को छिपाने के लिए झूठ बोलते हैं। ऐसा समय भी होता हैं जब झूठ बोलना हानिकारक नहीं होता है, खासकर, जब यह किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट लाता है, तो यह एक खूबसूरत झूठ है।

झूठ बुरा है यदि इसका इस्तेमाल हम अपने फायदे के लिए करते हैं। हालांकि, जब आप दूसरों के फायदे के लिए झूठ बोलते हैं, तो कभी-कभी यह सच से भी बेहतर साबित हो सकता है।

जिंदगी से शिकायतें कम कर दीजिये

1-विवेक ने नौकरी के इंटरव्यू में भाग लेने के लिए 200 किमी से अधिक यात्रा की, वेटिंग रूम में 8 घंटे इंतजार किया और लंच भी नहीं किया। फिर, कंपनी वालों ने सूचित किया, “इन्टरव्यूव आज रद्द कर दिया गया है, कृपया अगले दिन आओ” उसने शिकायत नहीं की। बाद में, उसने दूसरी नौकरी के साक्षात्कार की तैयारी करना शुरू कर दिया।

2- शिवम को उसकी उम्मीद के मुताबिक नौकरी नहीं मिली, वह साधारण काम करता है और ज्यादा कमाई नहीं करता है। इसके अलावा, वह एक मध्यम श्रेणी के परिवार से है। उसने अपनी स्थिति स्वीकार कर ली है और इसके बारे में शिकायत नहीं करता है। उसे पता है कि मुझे अपने कड़ी मेहनत के माध्यम से अपना भाग्य बनाना है।

3- विनय की हाइट कम है, लेकिन उसने कभी भगवान से शिकायत नहीं की है और न ही वह खुद को दुर्भाग्यशाली समझता है। उसने अपनी भौतिक बनावट को स्वीकार कर लिया है।

4- अभि हर समय बहुत सारी गलतियां करता है , लेकिन उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। आम तौर पर वह अपने दोषों के लिए बहाना नहीं बनाता है, इसके बजाय वह हर गलती से सीखने की कोशिश करता है।

5- हममें से बहुत से लोग अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से किराए के फलैट में रहते हैं। उनके पास अपना कोई निजी कमरा नहीं है । जब मेहमान और रिश्तेदार हमारे घर पर आते हैं तो हमें ड्राइंग रूम में फर्श पर सोना पड़ता है। लेकिन वे उस स्थिति के साथ ठीक हैं, उन्होंने कभी इसकी निंदा नहीं की है।

5- अभि को आफिस छोड़ने के बाद हर दिन, बस के लिए 1-2 घंटे इंतजार करना पड़ता है। कभी-कभी वह बेहद थक जाता है । उसके ज्यादातर दोस्तों के पास अपनी निजी कार है, लेकिन उसक पास नहीं है और वह इसके साथ ठीक है।

6- हाल ही में अभय के स्मार्टफोन को कुछ लोगों द्वारा सड़क से छीन लिया गया। तब उसने नोकिया के बेसिक फोन का उपयोग शुरू किया। वह लोगों को, पीडीएफ किताबें पढ़ते,वीडियो देखते, टेक्स्टिंग करते, स्नैपशॉट लेते, अलग-अलग ऐप्स का उपयोग स्मार्टफ़ोन पर करते हुए देखता है। उसे उन क्षणों की याद आती है लेकिन उसके लिए तुरंत दूसरा स्मार्टफोन खरीदना आसान नहीं है, अब वह स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग के बजाय अन्य उत्पादक काम पर अधिक ध्यान देता है और इस बारे में अधिक सकारात्मक महसूस करता है।

विवेक, विनय,शिवम,अभय और उन जैसे हजारों लोगों के लिए हर दिन एक संघर्ष है। ये लोग एक मध्यम श्रेणी के जीवन, करियर, अवसाद, निराशा, सामाजिक दबाव, वित्तीय समस्या, वर्कलोड और माता-पिता की असीमित उम्मीदों के साथ प्रतिदिन लड़ते हैं।

लेकिन ये लोग अपनी मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उम्मीद को खोना नहीं चाहते हैं और आशावादी होने की कोशिश करते हैं। ये लोग कड़ी मेहनत करते हैं और खुद को बताते हैं कि सब कुछ ठीक होगा शायद आज नहीं लेकिन आखिरकार एेसा जरूर होगा। इन्होनें खुश रहने के लिए अपने जीवन में संघर्ष का रास्ता चुना है। इसलिए, ये लोग जिंदगी से शिकायत या आलोचना किए बिना एक साधारण जीवन जी रहे हैं।

याद रखिये कि जब आप अपनी किसी श्वास को जीवन से शिकायत करने में नष्ट करते हैं, तब कहीं कोई होता है जो अपनी आखिरी सांस ले रहा होता है। आपको जीवन में जो कुछ मिला है उसकी सम्मान कीजिए।

रिजेक्शन को हैंडेल करने के कुछ उपाय

रिजेक्ट किया जाना अनदेखा किये जाने से कहीं ज्यादा बेहतर है। अपनी बेरोजगारी के दौरान, मुझे अधिकतर लोगों ने अनदेखा किया और बहुत कम लोगों ने ही मुझे विनम्रतापूर्वक नहीं कहा था।

बहुत बार, यह रिजेक्शन का डर है जो हमें कोशिश करने से रोकता है। यह आश्चर्यजनक है कि हम कितनी बार गलत होते हैं। आप हमेशा कोशिश करके असफल हो सकते हैं, लेकिन कभी कोशिश करने में असफल मत होइये।

1)- हमेशा आगे बढ़ते रहिये। आप गलत हो सकते हैं लेकिन आगे बढ़ना निश्चित रूप से गलत नहीं है। कुछ भी तब तक नहीं होता जब तक आप कुछ करते नहीं हैं।

2)- कभी भी न को दिल से मत लगाइये क्योंकि आपको यदि कोई आगे बढ़ने से रोक सकता है तो वह स्वयं आप ही हैं। हेनरी फोर्ड ने कहा था, ‘चाहे आप कर सकते हैं या फिर नहीं कर सकते हैं, दोनों ही स्थितियों में आप सही हैं ”

3)- ज्यादातर लोग जो आपको रिजेक्ट करते हैं, ऐसा करने का अधिकार नहीं रखते हैं, लेकिन यदि आप वो करेंगे जो ये कहते हैं तो आप उन्हें यह अधिकार दे देते हैं।

4)- लोग अपने आप में बहुत अधिक व्यस्त हैं और आप उनकी प्राथमिकताओं मे नहीं हैं।

5)- हर कोई पहले खुद को सफल बनाने के बारे में सोचता है। कुछ ही हैं जो दूसरों पर ध्यान देते हैं खासकर तब जब उन्हें आपसे आसानी से कोई रिटर्न मिलता नहीं दिखाई देता है।

6)- लगभग कोई भी मूल्यवान चीज एेसी नहीं है जो आसानी से मिल जाए, जितना कठिन संघर्ष होगा, उतना ही लंबा समय “संतुलन” तक पहुंचने में लग जाएगा और उतनी ही लंबी आपकी खुशी होगी।

7)- रिजेक्शन का दर्द आपकी अपेक्षाओं के अनरूप होता है। सावधानी से सोचिये कि आपकी अपेक्षाएं यथार्थवादी थीं या नहीं। यदि वे नहीं थीं, तो उसके बारे में बेहतर समझने से झटका नरम हो आपकी पीड़ा कम हो सकती है।

8)- “नाराज होना जहर पीने की तरह है जिसे पीकर आप दूसरे व्यक्ति के मरने की प्रतीक्षा करते हैं।” निराश और हताश महसूस करना भी इसी तरह है। चीजें कैसे काम करती हैं, इस बारे में आप उदास या गुस्सा महसूस कर सकते हैं, लेकिन इससे कुछ भी नहीं बदलेगा। अपने लिए खेद महसूस करने के बजाय, इसका उपयोग सीखने के अवसर के रूप में करिये और पता लगाइये कि अगली बार आप अलग क्या कर सकते हैं।

9)- यदि आप नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयार कर रहे हैं, तो आप इंटरव्यू से पहले कितना अध्ययन कर सकते हैं, इंटरव्यू के सवालों के बारे में आप कितनी सावधानी से सोचते हैं, और आप समय पर पंहुच सकते हैं या नहीं। इन बातों पर आप नियंत्रण कर सकते हैं। लेकिन साक्षात्कारकर्ता का दिन अच्छा रहा है या नहीं, अन्य साक्षात्कारकर्ता आपके मुकाबले उस पोजीशन के लिए बेहतर फिट हैं या नहीं । इन बातों पर आप नियंत्रण नहीं कर सकते हैं,यदि आप उन हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जिन्हें आप नियंत्रित करते हैं, तो खुश रहें कि आपने जो भी कर सकते थे वह सब किया। आपके नियंत्रण से बाहर की किसी चीज़ पर फ़ोकस करना व्यर्थ है, इसलिए उस पर ध्यान न दें।

10)- यदि आपका लक्ष्य नौकरी पाना है, तो आप साक्षात्कार के दौरान चिंतित होंगे और आपको नौकरी नहीं मिलने पर निराशा होगी। पर यदि आपका लक्ष्य साक्षात्कार में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है या पिछले साक्षात्कार में आपने जो सबक सीखा है, उसे लागू करना है, तो सफलता पूरी तरह से आपके नियंत्रण में है। ध्यान रखिये कि यदि प्रक्रिया आपके नियंत्रण में है लेकिन परिणाम नहीं, तो केवल प्रक्रिया पर अपना ध्यान केंद्रित करिये।

अच्छी खबर यह है कि आप केवल एकमात्र एेसे नहीं हैं जिनहें रिजेक्ट किया गया है – जैक मा, अब्दुल कलाम,माइकल जॉर्डन, वॉल्ट डिज़्नी और जे.के. रोलिंग जैसे लोगों भी रिजेक्टेड लोगों की लिस्ट में आपके साथ हैं।

“कुछ साल पहले एक यूसीएलए सर्वेक्षण ने बताया कि औसत एक वर्ष का बच्चा नहीं शब्द को, दिन में 400 से अधिक बार सुनता है !”

कोई तेरे खातिर है जी रहा

हर किसी के जीवन में एक एेसा वक्त आता है, जब हमारे जीवन में कुछ भी सही नहीं होता है। आपको हर तरफ से असफलता मिलती है और आप जिंदगी से निराश हो जाते हैं। आपका आत्मविश्वास टूट जाता है और आपको लगता है कि आपका जीवन बेकार है। लेकिन यह सच नहीं है।

हमेशा कोई न कोई, कहीं न कहीं, होता है, जो आपके साथ रहने की इच्छा रखता है।

हमेशा कोई न कोई, कहीं न कहीं, होता है, जो आपके चेहरे पर एक मुस्कान देखने के लिए घंटों इंतजार करता है।

हमेशा कोई न कोई, कहीं न कहीं होता है, जो आपके लिए मुश्किलों से भरे पहाड़ों को पार करने के लिए खुशी से तैयार रहता है।

हमेशा कोई न कोई, कहीं न कहीं होता है, जो आपसे मिलने के लिए हजारों मीलों के फासले पार करने में भी संकोच नहीं करता है।

उनके लिए जीना सीखिये। अपने जीवन को व्यर्थ समझने की भूल कभी मत कीजिए,क्योंकि कोई आपको देखकर अपने जीवन को जीने की बात करता है।

हो सकता है कि वे आपके साथ हों, हो सकता है कि वे आपके माता-पिता हों, हो सकता है कि वे आपके भाई बहन हों, हो सकता है कि वो आपकी पत्नी या पति हों या फिर कोई एेसा हो जिससे आपका कोई सांसारिक रिश्ता न हो।

यह भी हो सकता है कि आपके जीवन में ऐसा कोई व्यक्ति न हो। फिर उनके लिए प्रतीक्षा कीजिये। निश्चित रूप से वे आपके जीवन में एक न एक दिन जरूर आ जाएंगे।

किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जिंदगी को जीना शुरू कीजिए जो आपके लिए जीना चाहता है। एेसा करने से आपकी जिंदगी निश्चित रूप से पहले से सुंदर हो जाएगी और आपको खोया हुआ आत्मविश्वास फिर मिल जाएगा।

दो चीजें जो आपका जीवन बदल सकती हैं

विल स्मिथ ने कहा था है कि केवल दो चीजें हैं जो आपको सफल बनाती हैं, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप कौन हैं या आप कहां से हैं?

वे दो चीजें हैं पढ़ते रहना और दौड़ते रहना।

दौड़ते रहना महत्वपूर्ण है क्योंकि जब आप दौड़ते समय अपनी सीमा तक पहुंचते हैं, तो आपको अपने आप से आवाज़ें मिलेंगी कि ‘ठीक है आप पहले से ही बहुत पहले भाग चुके हैं, अब रूकिये और एक BREAK लीजिए।

अपनी आवाज़ों का जवाब देते रहिये कि ‘मुझे अभी और अधिक दौड़ते रहने की ज़रूरत है, मुझे अपने लक्ष्य तक पहुंचने की ज़रूरत है’। यह आपको किसी भी समस्या का सामना करने के लिए तैयार करेगा और आपको कठिनाइयों का सामना करने के लिए आवश्यक साहस मिलेगा।

पढ़ते रहना भी बहुत जरूरी है क्योंकि लाखों, अरबों एेसे लोग हैं जो हमसे पहले भी इस दुनिया में रह चुके हैं और आज आप जिस समस्या का सामना कर रहे हैं वह कोई अनूठी समस्या नहीं है। ऐसे लोग पहले भी रहे हैं जो इस तरह की समस्या का सामना सफलतापूर्वक कर चुके हैं। रोज़ाना पढ़ते रहिये,आपको उन सभी समस्याओं का समाधान मिलेगा जिनका सामना आप कभी करेंगे।

यह दो चीजें आपको निश्चित रूप से आपको जिंदगी भर लाभ पहुंचाएंगी।

यह सत्य है कि ‘एक किताब, एक पृष्ठ, एक पैराग्राफ और यहां तक ​​कि एक रेखा भी आपके जीवन को बदल सकती है’!

खुद को एेसे मानसिक रूप से मजबूत बनाइये

1-आप जिस दुर्भाग्य से गुजर रहे हैं उसको खुद पर हावी मत होने दीजिये। कठिनाईयां जीवन में अपरिहार्य हैं। हर परिस्थिति के लिए खुद को दोष मत दीजिए।

2-खुद को किस्मत और हालात का शिकार मत समझिये। खुद को पीड़ित समझने से आपको लोगों का ध्यान और सहानुभूति मिल सकती है। एक बार जब आपको लोगों का ध्यान और सहानुभूति मिल जाती है ,फिर इसकी आदत लग जाती है। याद रखिये कि जिस तरह से आप व्यवहार करते हैं, उस पर किसी का बस नहीं है।

3- जिन चीजों पर आपका नियंत्रण नहीं है उनके बारे में सोचकर अपनी ऊर्जा को नष्ट मत कीजिए। चिंता करने से आपकी समस्याएं समाप्त नहीं होगीं।

4- हर एक को खुश नहीं किया जा सकता है। यह आसमान में तारे गिनने जैसा मुश्किल काम है, लोगों को उनके हाल पर छोड़कर जीवन को अपनी शर्तों और सिद्धांतों के अनुसार जीना सीखिये।

5- निर्णय अपने लॉजिक एवं इमोशन दोनों को ध्यान में रखकर लीजिये, निर्णय लेते हुए अपने दिल और दिमाग दोनों की सुनिये। एक बार निर्णय लेने के बाद उस पर दृढ़ रहिये और बार-बार लिए हुए निर्णय की एनालिसिस मत कीजिए।

6- अपने बीते हुए कल में मत रहिये, गुजरे हुए कल से सीख लेकर आगे बढिये,एेसा करना मुश्किल जरूर है पर नामुमकिन नहीं।

7- अन्य लोगों की सफलता से ईर्ष्या न करें, यदि आपको सफलता की अपनी परिभाषा की स्पष्ट समझ है और इसका आपके लिए कुछ मतलब है, तो आप को ईर्ष्या होने की संभावना नहीं है। आपकी ईर्ष्या आपके प्रयासों और अपने लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते में बाधक है।

8- हम सभी को जीवन में अनुचित व्यवहार एवं तरीकों का सामना करना पड़ता है। आप महसूस कर सकते हैं कि आपको जो मिला है आप उससे बेहतर के लायक हैं, लेकिन याद रखिये कि यह आपके निजी विचार हैं और इसका कोई आधार नहीं है। कई बार हम मानते हैं कि यदि हमने किसी चीज के लिए प्रयास किया है, इसलिए सफलता मिलनी ही चाहिए। यह एक बेहतर उम्मीद हो सकती है, लेकिन अगर आपको लगता है कि आप सफलता और पुरस्कार के हकदार हैं तो आप निराश होंगे।

9-प्रयास करना मत छोड़िये, खुद में सुधार लाने और विफल होने के बाद फिर से प्रयास करने के लिए तैयार रहिये। तत्काल परिणाम की अपेक्षा मत कीजिये। व्यवहार में परिवर्तन और आदतों को बदलने में समय लगता है। तत्काल परिणामों की अपेक्षा करना निराशा की ओर ले जाता है।

वो जो दुनिया बदलते हैं

हममें से अधिकांश लोगों को अपने अपने वर्तमान से बहुत शिकायतें होतीं हैं। हम अक्सर यह महसूस करते हैं और कहते हैं कि जीवन में चीजें यदि इस तरह से न होकर उस तरह होतीं तो बेहतर होता। हम परिवार, समाज, देश और दुनिया को बदलना चाहते हैं और हमें लगता है कि एेसा करने से हमारा वर्तमान और भविष्य पहले से अधिक सुरक्षित और सुखद होगा।

हम दुनिया को कैसे बदल सकते हैं? ठीक यही प्रश्न एक बार किसी ने सत्य की खोज में लगे एक महान दार्शनिक से पूछा था। इस प्रश्न के उत्तर में दार्शनिक ने जो कहा यदि उसके मर्म को हम सही तरीके से समझ सकें तो हमारी दुनिया बदलने की चाहत काफी हद तक पूरी हो सकती है।

दार्शनिक ने प्रश्न के उत्तर में अपने जीवन का अनुभव को साझा किया था और कहा था कि –

जब मैं जवान था, मैं दुनिया को बदलना चाहता था।

मुझे दुनिया को बदलना मुश्किल लगा, इसलिए मैंने अपने देश को बदलने की कोशिश की।

जब मैंने पाया कि मैं अपने देश को नहीं बदल सकता, तो मैंने अपने शहर को बदलने पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया।

यह सब सोचते हुए जिस तरह जब उम्र बढ़ने लगी, तो मुझे एहसास हुआ कि मैं अपना शहर नहीं बदल सकता और मैंने अपने परिवार पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया।

अब, जब मैं बूढ़ा आदमी बन चुका हूं, तब मुझे यह पता चला है कि केवल मैं अपने खुद के सिवा कुछ नहीं बदल सकता हूँ।

अब मुझे यह अचानक पता चलता है कि यदि बहुत पहले मैं खुद को बदल चुका होता, तो मैं अपने परिवार पर असर डाल सकता था।

मैं और मेरा परिवार मिलकर हमारे शहर पर असर डाल सकते थे। उनका प्रभाव देश को बदल सकता था और सब मिलकर वास्तव में दुनिया को बदल सकते थे ।

दरअसल किसी भी बदलाव की शुरुआत खुद से होती है। इतिहास गवाह है कि कोई भी बदलाव दुनिया में रातों रात नहीं हुआ है। कुछ लोगों ने अकेले चलने की पहल की और कारवां बनता गया।

जो लोग खुद को बदलने की हिम्मत रखते हैं वही दुनिया को बदलने का माद्दा भी रखते हैं। उस बदलाव को पहले आप स्वयं में लाइये जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं। यही बदलाव की फिलासफी है।

अपनी आलोचना को हैंडल करना सीखिए

1-कितना भी कड़वा क्यों न हो, लोगों को धैर्यपूर्वक सुनना सीखिये।

2-दूसरों द्वारा दिए गए सही लॉजिक को एकनालेज कीजिए।

3-अपनी गलतियों को स्वीकार करना सीखिये और उनसे सबक लीजिये।

4- आप लोगों के प्रति असम्मानजनक हुए बिना भी उनसे भिन्न विचार रख सकते हैं।

5- हर एक आलोचना को खुद से जोड़ कर मत देखिये।

6- याद रखिए कि हर किसी को यह पता नहीं है कि आपके लिए सर्वश्रेष्ठ क्या है।

7- इतिहास गवाह है कि अलोचना उसी की होती है जिसने कुछ बड़ा करने की कोशिश की है।

8- अपने मूल्यों से समझौता न करना और अपनी बात पर अड़ जाना, इन दोनों में फर्क होता है। इस अंतर को समझिये।

9- किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत आक्षेप और उसकी व्यक्तिगत आलोचना से बचने का हरसंभव प्रयास कीजिए।

10-किसी व्यक्ति की बात को समझने का अर्थ उससे सहमत होना नहीं है।

11- व्यक्तित्व के विकास के लिए कुछ मात्रा में आलोचना सहायक होती है।

12-लोगों को स्वस्थ आलोचना के लिए प्रोत्साहित कीजिए।

13- आलोचना को सकारात्मक रूप में लेने के लिए धैर्य और अभ्यास की आवश्यकता होती है।

जिंदगी में जिन बातों को अनदेखा नहीं करना चाहिये

1-अपने जुनून को अनदेखा करना – आप अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती करते हैं जब आप अपने जुनून को इग्नोर करना शुरू करते हैं। अपने जुनून को पूरा करने में बीतने वासा समय बेशक आपको खुशी देगा क्योंकि आप जो कर रहे हैं उसे करने के लिए ही बने हैं।

2. ब्लाइंड ट्रस्ट – किसी पर आंख बंद करके विश्वास मत कीजिये, एेसा करने पर एक दिन आपको एेसा धोखा मिल सकता है कि आपका विश्वास पर से ही विश्वास उठ जाएगा।

3-हर किसी को खुश करने की कोशिश – यह पूरी तरह से निरर्थक प्रयास है। आप चाहे जितनी भी कोशिश कर लीजिये आप कभी भी सभी लोगों लोगों को खुश नहीं कर पाएंगे बेहतर होगा कि आप उन लोगों पर ध्यान दीजिये जो जीवन में आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।

4-क्षमा नहीं करना – अपने दिल पर बोझ मत लीजिए और लोगों को इसलिए क्षमा कीजिये क्योंकि आपके पास एक अच्छा दिल है और आप शांति चाहते हैं। लेकिन यह याद रखिए बुद्धिमान व्यक्ति लोगों को क्षमा करते हैं लेकिन उनकी गलतियों को कभी भूलते नहीं हैं।

5- जरूरत से ज्यादा बोझ उठाना- अपनी क्षमता से अधिक जिम्मेदारी लेना जिंदगी में तनाव को आमंत्रित करने जैसा है। जीवन संतुलन का दूसरा नाम है। एक साथ बहुत सारे काम करने की अपेक्षा कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर करना बेहतर है।

6- दूसरों से तुलना करना – आपके सुख-चैन को उड़ाने का यह सबसे बड़ा कारण है। खुद को कमतर मत आंकिए, हर इंसान दूसरे से अलग और यूनिक है।

7- चीजों की अधिकता करना – एक प्रचलित कहावत है कि अधिकता हर चीज की बुरी होती है, यह हमारे जीवन के हर पहलू पर लागू होती है। जितनी जल्दी यह समझ लिया जाए उतना ही अच्छा है।

8- स्वास्थ्य की उपेक्षा करना – देर से उठना, चीनी का अत्यधिक सेवन, फास्ट फूड, खान-पान में लापरवाही आदि एेसी आदतें हैं जो भविष्य में आपको आपकी सोच से भी अधिक नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि आप अपनी सेहत से खिलवाड़ करेगें तो यह एक दिन आपको नष्ट कर देगी।

9- अपनी बात कहने में हिचकिचाहट – हिचकिचाहट का एक क्षण आपको जीवन भर के लिए पछताने पर मजबूर कर सकता है। अपनी बात कहने, अपने जुनून को पूरा करने में, हंसने में, नए प्रश्नों को पूछने में, नई पहल करने में संकोच मत कीजिए एेसा करके आप पहले से अधिक संतुष्ट होंगे।

10- किसी की सच्ची भावनाओं से खिलवाड़ मत कीजिए।