द रूटीन लाइफ




इस संसार में कुछ भी एेसे ही नहीं मिल जाता. यह दुनिया तौलकर कर्मों के हिसाब से सुख और दुख देती है. यहां न तो पुण्य से अधिक सुख सुविधाओं के साधन मिल पाते हैं और न ही पाप से अधिक दुख, कष्ट और पीड़ा मिलती है. यहां सबकुछ नियमों से बंधा हुआ है. यदि इस नियम में थोड़ा सा भी विचलन होता है तो प्रकृति और जीवन में भारी उथल-पुथल मचती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि इस संसार से ज्यादा कुछ लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए क्योंकि उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है.

रोज हमारे जीवन में एक ही तरह का रूटीन, एक ही तरह की बातें, वही चिंता, वही शिकायतें, वही पुराने विचार आते हैं. हम भी उनसे न तो पीछा छुड़ा पाते हैं और न ही कुछ उससे आगे सोच पाते हैं. क्या यही हमारा जीवन है? जिसमें कुछ नया नहीं है, जिसमे कोई रचनात्मकता, कोई खासियत, कोई विशेषता नहीं है. कब तक हमारी जिंदगी में कुछ नया नहीं होगा, कब तक हम इस बेहोशी की जिदंगी से होश में नहीं आएंगे ? क्या हम इसी बंधी हुई जिन्दगी से गुजर जाएंगें और जीवन में कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे.

जीवन हर पल कुछ नया सिखाता है यदि हम सीखना चाहें. कुछ नया करने की जीवन को बदलने की जितनी छटपटाहट हमारे विचारों में, हमारी बातों में होती है उतनी हमारे कार्यों में क्यों नहीं दिखती. क्यों हमारी अधिकतर ऊर्जा यों ही व्यर्थ चली जाती है.

सूर्य की बिखरी किरणें मात्र गर्मी और रोशनी उत्पन्न करती हैं। किन्तु जब उन्हें छोटे से आतिशी शीशे द्वारा एक बिन्दु पर केन्द्रित किया जाता है। तो देखते-देखते चिनगारियाँ उठती हैं और भयंकर अग्नि काण्ड कर सकने में समर्थ होती है.संसार के सफल व्यक्तियों की, एक विशेषता अनिवार्य रूप से रही है, कि वे अपने मस्तिष्क पर काबू प्राप्त किये रहते हैं। जो निश्चय कर लिया उसी पर अविचल भाव से चलते रहे हैं, बीच में मन को डगमगाने नहीं दिया है। यदि उनका मन अस्त-व्यस्त डाँवाडोल रहा होता तो शायद ही किसी कार्य में सफल हो सके होते.

खुद को अपने जीवन में मौजूद सब से महत्वपूर्ण चीज़ों की याद दिलाते रहना चाहिए कभी-कभी हमारे मन में कुछ ऐसे विचार भी जन्म लेते हैं, जो शायद हमारे लिए बिल्कुल भी महत्वपूर्ण नहीं होते. हो सकता है, कि आपकी नौकरी जा चुकी हो, किसी ने आपका साथ छोड़ दिया हो, या किसी ने धोखा दिया हो, या किसी के व्यवहार ने चोट पहुंचाई हो. फिर भी हमें यह विचार करना ही होगा कि सच में ये सारी बातें कितने समय तक मायने रखेंगी. निराशा से बचने के लिए हमें अपने मन को हर वक़्त सिर्फ़ महत्वपूर्ण बातों की याद दिलाते रहना चाहिए जैसे कि हमारे मित्र और अपना परिवार, अपना स्वास्थ्य और सुरक्षा, अपना घर और खाना
अवसर और स्वतंत्रता अादि की याद दिलाती रहनी चाहिए.

सफलता पाने की उम्मीद रखना अच्छी बात है लेकिन इस बात को भी हो समझना कि आप असफल भी हो सकते हैं उतना ही महत्वपूर्ण है. इस तरह का संतुलन पाना बहुत कठिन है, लेकिन असफलता का अनुभव होने के बाद भी यह आप को स्वस्थ रखेगा. शोध दर्शाते हैं, कि आप सफल होंगे या असफल इस विचार का आप के इस लक्ष्य को पाने की मेहनत पर प्रभाव पड़ेगा और कहीं ना कहीं इस का प्रभाव आप के प्रदर्शन पर भी पड़ेगा। आप सफल होंगे, इस बात पर विश्वास करने से आप को और अधिक मेहनत करने में मदद मिलेगी. हालाँकि, इस बात को याद रखें, कि आप के सफल होने या विफल होने, का दृष्टिकोण आप की असली सफलता को प्रभावित नहीं करेगा, इसे सिर्फ़ आप की मेहनत ही प्रभावित कर सकती है.

ऊपर कही गयी इन सभी बातों का सार क्या है. इन सभी बातों का सार बस एक ही है कि हम कितने ही असहाय, लाचार क्यूं न हो, राहें कितनी भी अँधेरी और परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यूं न हों. भीतर कुछ एेसा होता है जो मरता नहीं है. भीतर की आवाज को सुन पाना मुश्किल है क्योंकि हमारी कोशिश हमारा ध्यान बाहर की आवाज को सुनने में लगा हुआ है. यदि हम उस आवाज को सुन पाते हैं तो हमें रास्ता मिल जाता है. शेष लोगों के लिए रूटीन लाइफ तबतक जारी रहती है.

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यह जो जिंदगी है

इस दुनिया में एक बात अनोखी है कि सँसार में क्षमता सभी के पास है. पर जिसको जो काम मिला हुआ है उसका स्तर उसकी क्षमता के स्तर से अधिक है. यही कारण है कि हर कोई अपने स्तर पर संघर्ष कर रहा है. जो संघर्ष छोटा बच्चा कर रहा है वैसा ही संघर्ष बड़ा व्यक्ति भी अपने स्तर पर कर रहा है. संघर्ष कहीं पर भी कम नहीं है. इस संसार का सत्य यही है कि किसी भी व्यक्ति को एेसे कार्य नहीं मिले हैं जो उसकी क्षमता के स्तर से कम हों. कोई भी अपनी मर्जी से संघर्ष करना नहीं चाहता है पर प्रकृति उसे संघर्ष करने को बाध्य करती है.

बुद्ध जब तक सिद्धार्थ थे और महल में रहते थे तब तक एक सामान्य राजकुमार थे. सोने की डिब्बी में सुरक्षित रखे गए बीज की तरह थे. उन्हे सारी सुविधाएं सारे सुख महल के अंदर ही उपलब्ध करा दिए गए थे. पर उनके मन में एक गहरी असंतुष्टि की भावना थी कि बाहर की दुनिया में क्या है? क्या महल जैसा सुख सारी दुनिया में है? वे दुनिया से अपरिचित थे, वे जीवन के अनुभव से अपरिचित थे, वे स्वयं से अपरिचित थे.

जो जीवन में जितना संघर्ष करता है वो उतना ही सीखता है. सफल या असफल हो जाना अन्य कारणों पर भी निर्भर करता है. पर सीखने के लिए, सत्य का अनुभव करने के लिए, अपनी क्षमताओं को समझने के लिए संघर्ष करना ही पड़ता है. जो जितना संघर्ष करता है और विकास करता है. प्रकृति भी उसके सामने और कठिन परिस्थितियां एवं चुनौतियां प्रस्तुत करती जाती है. यह अनवरत जारी रहने वाली प्रक्रिया है.

जब एक बार बुद्ध महल से बाहर निकले और दुनिया देखी तब वे दुनिया और उसके दुखों से परिचित हुए. उन्होंने जाना दुनिया में दुख ही दुख हैं. शरीर के बीमार पड़ने का दुख, शरीर के बूढ़े होने का दुख, शरीर की मृत्यु का दुख. उन्होंने पाया कि यह शाश्वत है. एेसा दुनिया में कोई भी नहीं है जिसे कोई रोग न हो, जिसका शरीर बूढ़ा न हो, जिसकी मृत्यु न हो. संसार के दुखों ने उन्हें विचलित कर दिया. अभी तक वे जो जीवन जी रहे थे उसमें उन्हें इस तरह का कोई अनुभव नहीं मिला था जो जीवन का सत्य बताता हो.

जो व्यक्ति संघर्ष करने से बचना चाहता है, उससे भागना चाहता है. उसके व्यक्तित्व और जीवन का विकास नहीं हो पाता है. उसकी उम्र एवं शरीर तो बढ़ जाता है पर मन का विकास नहीं हो पाता है. वो एक एेसे बच्चे की तरह होता है जो जिद करता है पर उसे पता नहीं होता कि उसकी जिद वास्तविकता से कितने परे है. बिना संघर्ष हमें जिदंगी के अनुभव नहीं मिलते. हमें अपने उद्देश्य का पता नहीं चलता. हम भटकते रहते हैं और बेचैनी कम नहीं होती है. एक गहरी असंतुष्टि की भावना उसके दिल में हमेशा रहेगी कि वह जो हासिल करने आया था, उसे जो करना था, शायद वह वो कर नहीं पाया.

मन में उठने वाली इसी बेचैनी ने बुद्ध को विवश कर दिया कि वो महल छोड़कर कहीं चले जाएं जहां वो इस अशांति की शांति ढूंढ सकें. बुद्ध का जीवन अनेकों को अनेक तरीकों से प्रेरणा देता है पर उनकी एक महत्वपूर्ण शिक्षा यह भी है कि जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है. जो संघर्ष कर पाने में समर्थ हैं केवल वही जीवन का उपयोग कर पाते हैं. बाकी लोगों की तलाश जारी रहती है..
साभार – युग निर्माण योजना (शांति कुँज हरिद्वार)



अंतहीन तलाश





कोई किसी को वही दे सकता है जो खुद उसके पास हो। किसी को शांति वही दे सकता है जो खुद स्थिर हो। किसी को हिम्मत वही दे सकता है जो खुद पथरीली राहों पर चला हो। किसी को रास्ता वही बता सकता है जो खुद सफर पर निकला हो। बिना अनुभव का ज्ञान तो बस उधार की जानकारी होता है जिसका सहारा लेकर किसी तरह समस्या को कुछ समय के लिए टाला तो जा सकता है पर उसका पूर्ण समाधान नहीं किया जा सकता है।

जिन्दगी में प्रेम की तलाश सभी को होती है इसके बिना जीवन एेसे मुरझा जाता है जैसे बिना पानी के पौधा पर अक्सर यह तालाश अधूरी रह जाती है क्योंकि इसकी तालाश हम करते हैं दूसरे व्यक्ति में, हमें लगता है कि दूसरा व्यक्ति ही हमें वह सब कुछ दे सकता है जिससे हमें शांति मिल जाएगी। हमारी उम्मीद अक्सर टूट जाती है क्योंकि हम यह भूल जाते हैं कि कोई भी व्यक्ति हमें वही दे सकता है जो कि उसके खुद के पास हो। हम जिस दूसरे व्यक्ति में प्रेम को ढूंढ रहे हैं वो भी किसी तीसरे व्यक्ति में उसे तालाश कर रहा है और तीसरा व्यक्ति किसी चौथे व्यक्ति को ढूंढ रहा है इस तरह यह अंतहीन सिलसिला जारी है।

एक मकड़ी ने कमरे में जाला लगाने की सोची वह सही जगह की तलाश करने लगी उसने चिड़िया से सलाह मांगी चिड़िया ने कहा जाला कहीं भी लगाना पर खिड़कियों से दूर रहना क्योंकि जब हवा चलेगी तो जाला टूट जाएगा। मकड़ी ने बात मानकर कमरे के एक कोने में जाला बुनना शुरू ही किया था कि एक बिल्ली आ गयी उसने कहा यहां जाला बुनना बेकार है क्योंकि इस कोने में मक्खियाँ नहीं आती हैं तो फिर तुम्हारे जाले में फंसेगा कौन? तुम अलमारी के पीछे जाला बुनों वो जगह तुम्हारे मुफीद रहेगी। मकड़ी ने अब अलमारी के पीछे ठिकाना बनाने लगी तो अलमारी में रहने वाली दीमक ने कहा यह अलमारी दीमक लगने के कारण खराब हो गई है और थोड़े समय बाद इसे कबाड़ी ले जाएगा तुम कहीं और चली जाओ। मकड़ी की तालाश जारी है।

जीवन में अधिकांश लोगों के साथ एेसा ही हुआ करता है। हमें क्या नहीं करना चाहिए यह बताने को बहुत लोग मिल जाते हैं, पर क्या करना चाहिए इसका जवाब बहुत कम लोगों के पास होता है। एेसे लोग जीवन में मुश्किल से मिलते हैं और कभी-कभी तो हम एेसे इंसान को पहचान ही नहीं पाते हैं। आवश्यकता है खुद पर भरोसा करने की और बिना विचलित हुए लगातार कोशिश जारी रखने की,क्योंकि एेसा करने पर हमें अनुभव प्राप्त होता है और जब हमें जानकारी और अनुभव दोनों मिल जाते हैं फिर हमें अपनी समस्या का समाधान भी मिल जाता है ।