हर वर्ष कुछ कहता है

इस साल के समाप्त होने में अब कुछ घंटे ही शेष हैं। सारी दुनिया पलकें बिछाकर नये साल के स्वागत में लगी हुई है। सभी के मन में बीते साल से बिछुड़ने की पीड़ा भी है और नये साल की नयी उम्मीदों से मिलने का उत्साह भी। एेसे में शायद यह सही समय है इस बात का अवलोकन करने का कि बीते हुए साल में हमने क्या खोया और क्या पाया।

कहते हैं कि समय इंसान को सब कुछ सिखा देता है बीते हुए साल ने भी बहुत कुछ सिखाया जिसे यहां साझा करके गुजरते हुए साल को विदा करना चाहता हूं।

इस वर्ष ने सिखाया है कि चीजें हमेशा वैसी नहीं होती हैं जैसा कि आप सोचते और चाहते हैं। यह भी अनुभव मिला है कि गलतियां होने का अर्थ यह नहीं है कि आपकी कोशिशें व्यर्थ थीं। यह भी सीखा कि कुछ टूटी हुई चीजें फिर दुबारा नहीं जुड़ती हैं। और मुश्किल वक्त से निकलने में आपके सच्चे मित्र एवं आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति ही सहायक साबित होती है।

इस साल ठोकरें खा कर यह भी सीखा कि जब आपको स्वयं अपनी क्षमताओं पर संदेह होने लगे तो बस पीछे मुड़कर यह देख लीजिए कि आपने अब तक क्या और कैसे हासिल किया है? एेसे समय पर खुद को याद दिलाइये उन लड़ाइयों के बारे में जिन्हें आपने जीता है और उन डरों को याद कीजिए जिन पर विजय प्राप्त करके आप यहां तक पहुंचे हैं।

यह साल जाते-जाते यह भी बता गया कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं बल्कि उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप स्वयं अपने विषय में क्या विचार रखते हैं। इस साल यह भी जाना कि अंत में यह महत्व नहीं रखता कि आपने क्या खोया और क्या पाया बल्कि महत्व यह रखता है कि आपने किसी को कैसे खोया,और किसी को कैसे पाया

कुछ ही घंटों में यह वर्ष घड़ी एवं कैलेण्डरों में हमेशा के लिए गुजर जाएगा। उम्मीद है कि इस वर्ष के खट्टे-मीठे अनुभवों से आपने बहुत कुछ सीखा होगा और यह कामना है कि आने वाला वर्ष के अनुभव आपको और बेहतर बनाएंगे।

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