हम जीवन में इतना कन्फ्यूज क्यों रहते हैं

उमंग बहुत महत्वाकांक्षी युवक था,वह जीवन में सब कुछ पा लेना चाहता था। वह बहुत बड़ा आदमी बनना चाहता था, पहले वो सोचता था कि बस एक अच्छी नौकरी मिल जाए तो फिर कुछ नहीं मांगूगा। वह रात दिन उसी के सपने देखने लगा, मेहनत करने लगा, उसी के बारे में सोचने लगा। जिन्दगी ने इम्तिहान लिया, कई बार लिया फिर वो सफल हो गया। उसे मिल गयी थी वह नौकरी जिसके बारे में वो सोचता था।

थोड़े दिनों बाद उसे लगने लगा कि उसे जो मिला है वो अधूरा है और लोगों की तुलना में कम है। उसने नौकरी छोड़ दी और बिजनेस शुरू किया। उसकी समझ में अब दुनियादारी की मिलावट थी।

इस बार उसने मेहनत कम की और चालाकी एवं होशियारी पर ज्यादा ध्यान दिया और अपनी अधूरी जिन्दगी को पूरा करने की कोशिश करने लगा। अब उसे कर्मफल पर कम और अपनी होशियारी पर ज्यादा भरोसा हो गया था।

दुनिया की नजर में उसमें आत्मविश्वास आ गया था। उसे इस बार संघर्ष कम करना पड़ा और काफ़ी हद तक वो अपने इरादों में सफल भी हुआ था उसके पास पैसा और रूतबा सब कुछ था।

फिर भी न जाने क्यों जिदंगी का अधूरापन दूर नहीं हुआ बार बार ध्यान उन चीजों की तरफ जाता था जो उसने हासिल नहीं की थी। उसकी बेचैनी बढ़ी तो उसने दिमाग दौड़ाया और अधूरे को पूरा करने का प्लान बनाया।

इस बार उसने पूरा ध्यान होशियारी पर दिया, उसे अब ईश्वर,सत्य,नियति पर बस दिखावे के लिए भरोसा था। अब उसकी नज़र में सब जायज़ था। दूसरों की नजर में अब उसमें अहंकार आ गया था। उसे इस बार जो मिला वो पहले से ज्यादा था। वह दुनिया की नजर में बहुत सफल हो गया था।

थोड़े दिनों बाद उसे लगने लगा कि वह अभी भी सन्तुष्ट नहीं है। अपने शिखर पर पहुंच कर वो अकेला था। उसकी नजर में होशियारी ही सर्वोपरि थी।

वक्त के अपने नियम होते हैं जो किसी के लिए नहीं बदलते कुछ पलों के लिए लगता है कि जीवन और वक्त हमारे नियन्त्रण में है और हम जो चाहें वो कर सकते हैं और हमारी होशियारी हमें बचा लेगी पर वक्त के नियम नहीं बदलते।

उसका भी वक्त बदल रहा था, जिन्दगी के नियम लागू हो रहे थे पर बुद्धि को लाजिक नहीं समझ आ रहा था। वक्त के नियम लाजिक के परे थे। बहुत मुश्किल था अहंकार के लिए वक्त के आगे झुकाना उन रास्तों पर वापस लौटना जिन्हें वो पीछे छोड़ चुका था।

जब बेबसी ज्यादा बढ़ी तब उसने ईश्वर को पुकारा। अब उसे होशियारी पर कम और ईश्वर पर ज्यादा भरोसा था। अब वह वापस मुड़ गया था जिसकी दिशा केन्द्र की ओर थी, उसे जीवन का लक्ष्य स्प्षट हो गया था, उसके जीवन का सारा कन्फ्यूजन समाप्त हो गया था।

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