दिल ने मांगी है दुआ

जब जीवन में घना अंधेरा होता है और कोई राह नहीं सूझती है तब प्रार्थना से फूटती है प्रकाश की किरण जो डूबते को तिनके का सहारा साबित होकर हमारे टूटे हुए आत्मविश्वास को धीरे-धीरे फिर से जोड़ने का काम करती है।

प्रार्थना हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है। शोध से पता चला है कि सर्जरी के बाद होने वाले घावों के भरने में प्रार्थना मरहम का काम करती है। यह हमारे दिल को मजबूत बनाकर हमारी धड़कनों को सामान्य करती है। प्रार्थना करने से हमारा इम्यूनिटी सिस्टम बेहतर होता है।

प्रार्थना करने से न केवल हमारी एकाग्रता बढ़ती है बल्कि इससे हमें अपने मन में झांकने का मौका मिलता है। इससे हममें सही-गलत में फर्क करने की समझ बढ़ती है और बेचैनी से निजात मिलती है। एक शोध से पता चला है कि जो लोग नियमित रूप से प्रार्थना करते हैं उनमें अवसाद की समस्या कम होती है और वे दूसरों की तुलना में अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर पाते हैं।

प्रार्थना इंसान द्वारा उत्पन्न की जाने वाली ऊर्जा का सबसे सशक्त रूप है। दिल से निकली हुई प्रार्थना कभी निरर्थक नहीं जाती है। विज्ञान भी प्रार्थना की ताकत को मानता है और जिदंगी के अनेक अवसरों पर यह साबित भी हुआ है कि इंसान को दवा के साथ-साथ दुआ की भी जरूरत होती है

जरूरी नहीं है कि प्रार्थना अपने लिए ही की जाए, हम प्रार्थना दूसरों के लिए भी कर सकते हैं। कहते हैं कि दूसरों के लिए की गई दुआ जल्दी कुबूल होती है। प्रार्थना हमें यह अहसास दिलाती है कि हम अकेले नहीं हैं, कहीं कोई है जो हमारा बोझ उठाने में हमारी मदद कर रहा है।

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