जीवन में आत्मसम्मान का होना क्यों जरूरी है

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एक भिखारी एक स्टेशन पर कटोरा लेकर बैठा हुआ था उसके पास में एक बांसुरी भी ऱखी हुई थी। लोग आते और उनमें से कुछ रूक कर कटोरे में पैसा डालकर आगे बढ़ जाते। एक युवा व्यवसायी उधर से गुजरा और उसने कटोरे मे 50 रूपये डाल दिये, उसके बाद वह ट्रेन मे बैठ गया। ट्रेन चलने ही वाली थी वह कि वह व्यवसायी एकाएक ट्रेन से उतर कर भिखारी के पास लौटा और बांसुरी उठा कर बोला, “मै कुछ धुन सुनूंगा। तुम्हारी बांसुरी की धुनों की कुछ कीमत है, आखिरकार तुम भी एक व्यापारी हो और मै भी।” उसके बाद वह युवा तेजी से ट्रेन मे चढ़ गया।

http://curemito.org/estorke/1617 कुछ वर्षों बाद, वह युवा व्यवसायी एक बिजनेस समारोह में हिस्सा लेने दूसरे शहर गया। उस समारोह में वह भिखारी भी मौजूद था। भिखारी ने उस व्यवसायी को देखते ही पहचान लिया, वह उसके पास जाकर बोला- आप शायद मुझे नही पहचान रहे है, लेकिन मै आपको पहचानता हूँ। उसके बाद उसने उसके साथ घटी उस घटना का जिक्र किया। व्यवसायी ने कहा- तुम्हारे याद दिलाने पर मुझे याद आ रहा है कि तुम स्टेशन पर भीख मांग रहे थे। लेकिन तुम यहाँ सूट और टाई मे क्या कर रहे हो?

buy Viagra amex in Tempe Arizona भिखारी ने जवाब दिया, आपको शायद मालूम नही है कि आपने मेरे लिए उस दिन क्या किया। मुझे पर दया करने की बजाय आप मेरे साथ सम्मान के साथ पेश आये। आपने मेरी बांसुरी उठाकर कहा कि मेरी धुनों की कुछ कीमत है, आपके जाने के बाद मैँने बहूत सोचा, मै यहाँ क्या कर रहा हूँ? मै भीख क्योँ माँग रहा हूँ? मैने अपनी जिदगी को सँवारने के लिये कुछ अच्छा काम करने का फैसला लिया। मैने अपनी बांसुरी उठायी और घूम-घूम कर अपनी प्रस्तुति देने लगा। धीरे -धीरे मेरी मेहनत रंग लायी, पारखी लोगों की नजर मुझ पर पड़ी और मुझे अच्छा काम मिलने लगा। आज मैं यहां इस समारोह में अपनी प्रस्तुति देने आया हूँ।

मुझे मेरा सम्मान लौटाने के लिये मै आपका तहेदिल से धन्यवाद क्योंकि उस घटना ने मेरी जिंदगी को ही बदल दिया।

trading212 login आप अपने बारे मे क्या सोचते है? खुद के लिये आप स्वयं क्या राय रखते हैं ? इन सारी चीजो को ही हम अप्रत्यक्ष रूप से आत्मसम्मान कहते हैं। दुसरे लोग हमारे बारे मे क्या सोचते है ये बाते उतनी मायने नहीँ रखती लेकिन आप अपने बारे में क्या सोचते हैं ये बात बहूत मायने रखती है।

follow url यह बात सत्य है कि हम अपने बारे मे जो भी सोचते हैँ, उसका एहसास जाने अनजाने मे दुसरो को भी करा ही देते हैं और इसमे कोई भी शक नही कि इसी कारण की वजह से दूसरे लोग भी हमारे साथ उसी ढंग से पेश आते हैं।

http://heatherbestel.com/2008/10/its-official-we-are-all-lazy/?replytocom=9280 आत्म-सम्मान ही वह वजह है जिससे हमारे अंदर प्रेरणा पैदा होती है। इसलिए आवश्यक है कि हम अपने बारे मे एक बेहतर राय बनाएं और आत्मसम्मान के साथ जीवन जिएं।

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