जिन्दगी यूं ही चलती रहे

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click here रूद्राक्ष के जीवन में सबसे मुश्किल पल तब आए थे जब डाक्टरों ने उसे बताया था कि उसका ट्यूमर कैंसरस हो चुका है। हालांकि कैंसर अभी प्रारंभिक अवस्था में था जिसका इलाज सर्जरी और कीमोथेरेपी द्वारा संभव था। रूद्राक्ष के लिए जीवन के इस कटु सत्य को स्वीकार कर लेना आसान नहीं था और उसने कुछ महीनों तक यह बात अपने परिवार से छुपाए रक्खी थी। पर सत्य तो भावनाओं के परे होता है और लाख छिपाने पर भी एक दिन बाहर आ ही जाता है।

http://www.cilentoescursioni.it/?kiskwa=strategia-opzioni-binarie-a-2-minuti&e05=7b रूद्राक्ष का एक छोटा-सा हँसता खेलता हुआ परिवार था। उसकी पत्नी वेदिका स्कूल में पढ़ाती थी उसी स्कूल में उसका दस वर्ष का बेटा प्रखर और पांच साल की बेटी ऊर्जा भी पढते थे। उनके जीवन की गाड़ी हंसी खुशी निर्बाध गति से आगे बढ़ रही थी पर रूद्राक्ष की बीमारी ने मानों खुशियों पर अचानक ब्रेक लगा दिये थे।

sortierspiel kennenlernen कैंसर की इस बीमारी ने रूद्राक्ष को शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से तोड़ दिया था। अपनी परेशानी में परेशान रूद्राक्ष थोड़ा चिड़चिड़ा भी हो गया था और छोटी छोटी बातों पर बच्चों को झिड़क देता था। कुछ दिन अस्पताल में रहकर कीमोथेरेपी कराकर रूद्राक्ष जब घर वापस आया तब बच्चों ने देखा कि उनके पापा बेहद थके हुए और उदास लग रहे हैं और उनके सिर के बाल भी झड़ गए हैं।

http://bowlnorthway.com/?jisdjd=forum-opzionibinarie&b58=c3 कुछ दिनों बाद प्रखर का जन्मदिन था। उस दिन सुबह रूद्राक्ष ने प्रखर को अपने पास बुलाकर ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद दिया और कुछ रुपये देते हुए कहा बेटा शाम को माँ के साथ जाकर केक और गिफ्ट ले आना। रूद्राक्ष जानता था कि घर में पैसों की कितनी किल्लत है, उसने उसमें से 100 रूपये लेकर अपनी जेब में रख लिए और बाकी पैसे लेकर वह वेदिका के पास गया और बोला मां ये पैसे रख लो इस बार हम केक की जगह हलवे से काम चला लेगें, यह पैसा पापा की दवा में काम आ जाएगा। यह कहकर वह चला गया।

site de rencontre pour android gratuit शाम को प्रखर जब घर आया तो उसने सिर पर एक बड़ी सी कैप लगा रखी थी। जब वेदिका ने पूछा यह कैप कहां से आयी? तो प्रखर ने मुस्कराते हुए कहा मां यही मेरा बर्थडे गिफ्ट है फिर उसने माँ से मोबाइल मांगा और बोला पापा के साथ एक सेल्फी लेनी है। वह रूद्राक्ष के कमरे में गया उसने देखा कि वो गहरी नींद में सो रहे हैं उसने चुपचाप सेल्फी ली और उसे फेसबुक पर अपलोड कर दिया।

https://www.mccarthyarchitecture.com/indigose/13377 कुछ देर बाद वेदिका ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर देखा कि प्रखर ने अपने पापा के साथ जो सेल्फी ली थी उसमें रूद्राक्ष के सिर पर वही कैप है जो कुछ देर पहले प्रखर लाया था ,पिछले साल की फोटो के साथ उसने इस फोटो को अपलोड किया था और लिखा था कि ” मेरे पापा आज भी उतने ही अच्छे लगते हैं जितने पहले लगते थे , मैं और मेरी बहन उनसे आज भी उतना ही प्यार करते हैं, मैं आज भी उनकी तरह बनाना चाहता हूं.. गेट वेल सून पापा.. भगवान करे मेरे पापा को मेरी भी उमर लग जाए।”

follow url वेदिका मोबाइल लेकर रूद्राक्ष को दिखाने के लिए कमरे में गयी उसने देखा प्रखर वहीं बेड पर सो गया था। वह कैप रूद्राक्ष अपने हाथों में लिए अपने मोबाइल पर पोस्ट पढ रहे थे। उनकी आखों से आंसू लगातार बह रहे थे, यह बेस्ट गिफ्ट था जो अपने जन्मदिन पर प्रखर ने अपने पापा को दिया था।

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