जिन्दगी में हर बार दूसरा मौका नहीं मिलता

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quiero conocer hombre de 60 aГ±os अजय कपूर एक बेहतरीन वेब डिजाइनर हैं। उनके क्लाइंट्स उनके काम के मुरीद हैं। उनके पास काम की कोई कमी नहीं है। वह स्वस्थ और सुखी जीवन जी रहे हैं। पर कुछ वर्षों पहले तक उनके जीवन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था वह पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों मोर्चों पर संघर्ष कर रहे थे।

source link आज से पांच साल पहले की रविवार की उस सुबह को वो कभी भी नहीं भूल सकते जब सुबह के वक्त वो अपने चार वर्ष के बेटे अर्जुन के साथ घर के बाहर लान में फुटबाल खेल रहे थे। गेंद के पीछे भागते हुए अचानक उन्होंने महसूस किया कि वो बुरी तरह हाफं रहे हैं। उनकी सांसें उखड़ रहीं थीं और चेहरा लाल हो गया था। वह बुरी तरह खांस रहे थे।

viagra shop अजय कपूर की एक बुरी आदत थी जो उनकी सभी अच्छाईयों पर भारी पड़ रही थी। उन्हें धूम्रपान की लत थी। एक दिन में 10-15 सिगरेट पी जाना उनके लिए सामान्य सी बात थी। उनके दिन की शुरुआत सुबह की चाय और सिगरेट के साथ होती थी और अौर अंत रात के खाने के बाद सिगरेट से होता था। इस आदत की शुरुआत कई वर्षों पहले कालेज के समय से हुई थी जब उन्होंने दोस्तों के कहने पर शौक में सिगरेट पीना शुरू किया था। शुरुआत में वो सामान्य सिगरेट पीते थे और अब डिजाइनर सिगरेट पीने लगे थे। उनका यह शौक कब गंभीर लत में बदल गया इसका स्वयं उन्हें भी पता नहीं था।

follow site अजय कपूर की हालत तेजी से बिगड़ती जा रही थी। अब वह जमीन पर गिर गये थे उनकी पत्नी उनके सीने को और उनकी मां उनके पैरों के तलवों को जोर जोर से मल रहीं थीं। उनकी चेतना तेजी से लुप्त होती जा रही थी। थोड़ी ही देर में एम्बुलेंस आ गयी और उन्हें समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया गया था। उन्हें दिल का गंभीर दौरा पड़ा था जिसका मुख्य कारण डाक्टर ने अत्यधिक सिगरेट और शराब का सेवन बताया था। उनकी बायोप्सी भी की गई थी जिसकी रिपोर्ट में कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों की पुष्टि हुई थी।

conocer personas aleman अजय अस्पताल के अपने बिस्तर पर शांत लेटे हुए थे। उनकी मुख मुद्रा गंभीर थी उनकी आखें खिड़की के बाहर शून्य में कुछ तलाश रहीं थीं। आज उनका दिल उनसे कुछ कह रहा था एेसा नहीं था कि उनका दिल पहले कुछ नहीं कहता था वो पहले भी उनसे बात करता था पर उनके जीवन में इतना कोलाहल था कि उसकी आवाज उन तक नहीं पहुंच पाती थी। उन्हें याद आ रहा था कि उनकी मां और पत्नी ने न जाने कितनी बार उनसे इस बुरी आदत को छोड़ देने को कहा था पर हर बार उन्होंने उनकी बातों को धुएं में उड़ा दिया था। पहले उन्होंने सिगरेट को पिया था और अब सिगरेट उन्हें पी रही थी।

http://milehiproperty.com/?ki0oss=E-trade-stock-ticker-research&456=b2 अजय को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी और वो अपने घर वापस आ गए थे पर उनकी समस्याएं अभी समाप्त नहीं हुईं थीं। उन्हें अभी एक लम्बी लड़ाई लड़नी थी और यह लड़ाई उनकी खुद से थी। वर्षों से जमी हुई आदतें यूं ही नहीं जाती हैं। इंसान का मन बार बार सही गलत कुछ भी लॉजिक देकर उन आदतों के पास वापस लौट जाना चाहता है। इन्हें उखाड़ फेंकने के लिए आवश्यकता होती है दृढ़ इच्छाशक्ति और मनोबल की जो लगातार अभ्यास और संयम से आता है।

follow कहते हैं इंसान को वक्त सब कुछ सिखा देता है। अजय कपूर को भी वक्त ने सिखा दिया। बीते वक्त की परिस्थितियों और मुश्किलों ने उन्हें मजबूत बना दिया था। लंबे समय तक उन्होंने खुद से संघर्ष किया और अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इस बुरी आदत से छुटकारा पा लिया।
सौभाग्यशाली थे अजय कपूर जो समय रहते संभल गए और मौत के मुंह से बाहर निकल आए। यदि आप में भी कोई एेसी बुरी आदत है तो उसे अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और मनोबल के सहारे उखाड़ फेंकिये। याद रखिए जिन्दगी में हर किसी को दूसरा मौका नहीं मिलता, हर कोई अजय कपूर की तरह भाग्यशाली नहीं होता।

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