जब मन उदास होता है




कुछ नया करने की जीवन को बदलने की जितनी छटपटाहट हमारे विचारों में, हमारी बातों में होती है उतनी हमारे कार्यों में क्यों नहीं दिखती। क्यों हमारी अधिकतर ऊर्जा यों ही व्यर्थ चली जाती है?

रोज हमारे जीवन में एक ही तरह का रूटीन, एक ही तरह की बातें, वही चिंता, वही शिकायतें, वही पुराने विचार आते हैं। हम भी उनसे न तो पीछा छुड़ा पाते हैं और न ही कुछ उससे आगे सोच पाते हैं। क्या यही हमारा जीवन है?

जिसमें कुछ नया नहीं है, जिसमे कोई रचनात्मकता, कोई खासियत, कोई विशेषता नहीं है। कब तक हमारी जिंदगी में कुछ नया नहीं होगा, कब तक हम इस बेहोशी की जिदंगी से होश में नहीं आएंगे ? क्या हम इसी बंधी हुई जिन्दगी से गुजर जाएंगें और जीवन में कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे।

संसार के सफल व्यक्तियों की, एक विशेषता अनिवार्य रूप से रही है, कि वे अपने मस्तिष्क पर काबू प्राप्त किये रहते हैं। जो निश्चय कर लिया उसी पर अविचल भाव से चलते रहे हैं, बीच में मन को डगमगाने नहीं दिया है। यदि उनका मन अस्त-व्यस्त या डाँवाडोल रहा होता तो शायद ही किसी कार्य में सफल हो सके होते।

खुद को अपने जीवन में मौजूद सब से महत्वपूर्ण चीज़ों की याद दिलाते रहना चाहिए कभी-कभी हमारे मन में कुछ ऐसे विचार भी जन्म लेते हैं, जो शायद हमारे लिए बिल्कुल भी महत्वपूर्ण नहीं होते। हो सकता है, कि आपकी नौकरी जा चुकी हो, किसी ने आपका साथ छोड़ दिया हो, या किसी ने धोखा दिया हो, या किसी के व्यवहार ने चोट पहुंचाई हो, फिर भी हमें यह विचार करना ही होगा कि सच में ये सारी बातें कितने समय तक मायने रखेंगी।

निराशा से बचने के लिए हमें अपने मन को हर वक़्त सिर्फ़ महत्वपूर्ण बातों की याद दिलाते रहना चाहिए जो वर्तमान में आपके पास हैंं जैसे कि हमारे मित्र और अपना परिवार, अपना स्वास्थ्य और सुरक्षा, अपना घर और खाना, उपलब्ध अवसर और स्वतंत्रता आदि की याद दिलाती रहनी चाहिए।

हम कितने ही असहाय, लाचार क्यूं न हो, राहें कितनी भी अँधेरी और परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यूं न हों, भीतर कुछ ऐसा होता है जो मरता नहीं है।

भीतर की आवाज को सुन पाना मुश्किल है क्योंकि हमारी कोशिश हमारा ध्यान बाहर की आवाज को सुनने में लगा हुआ है। यदि हम उस आवाज को सुन पाते हैं तो हमें रास्ता मिल जाता है। शेष लोगों के लिए रूटीन लाइफ तब तक जारी रहती है।

सफलता पाने की उम्मीद रखना अच्छी बात है लेकिन इस बात को भी हो समझना कि आप असफल भी हो सकते हैं उतना ही महत्वपूर्ण है। इस तरह का संतुलन पाना बहुत कठिन है, लेकिन असफलता का अनुभव होने के बाद भी यह आप को स्वस्थ रखेगा।
शोध दर्शाते हैं, कि आप सफल होंगे या असफल इस विचार का आप के इस लक्ष्य को पाने की मेहनत पर प्रभाव पड़ेगा और कहीं ना कहीं इस का प्रभाव आप के प्रदर्शन पर भी पड़ेगा। आप सफल होंगे, इस बात पर विश्वास करने से आप को और अधिक मेहनत करने में मदद मिलेगी।

हालाँकि, इस बात को याद रखें, कि आप के सफल होने या विफल होने, का दृष्टिकोण आप की असली सफलता को प्रभावित नहीं करेगा, इसे सिर्फ़ आप की मेहनत ही प्रभावित कर सकती है।

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