गुरू-पूर्णिमा विशेष- बिन गुरु जीवन सूना है

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enter कुछ दिनों बाद गुरू-पूर्णिमा है । भारतीय संस्कृति में गुरू की बड़ी महिमा बतायी गयी है। गुरु का जीवन में स्थान महत्वपूर्ण है। गुरु ही वह व्यक्ति है जो जीवन की उलझी हुई राहों में भटकते हुए व्यक्ति का मार्गदर्शन कर उसे लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं।

get link मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक, जिदंगी के हर पड़ाव पर उसे एेसे व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है जो उसका मार्गदर्शन करें और जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाए। किसी शिशु के लिए उसकी मां ही प्रथम गुरु है उसके बाद के जीवन अनेकों व्यक्ति कभी शिक्षक, कभी कोच, कभी मेटंर आदि के अनेक रूप में आकर व्यक्ति का मार्गदर्शन करते हैं और गुरु की भूमिका निभाते हैं।

https://www.cedarforestloghomes.com/enupikos/3537 गुरु का कार्य है मनुष्य को रास्ता दिखाना, आध्यात्मिक विचारधारा के अनुसार अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को गुरु कहा जाता है। शास्त्रों में गुरु की तुलना ईश्वर से कही गई है। सच्चे गुरु की प्राप्ति दुरूह है, सच्चे गुरु आसानी से नहीं मिलते हैं बल्कि गुरु की प्राप्ति के लिए शिष्य को अपनी पात्रता सिद्ध करनी पड़ती है। सच्चे गुरु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है।

source url आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक पारिवारिक और साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं।

http://web-impressions.net/fister/2742 यह दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे उन्हें आधिकारिक भी कहा जाता है, उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है।

on rencontre des gens citation भारत वर्ष में गुरू पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन हर एक शिष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार अपने गुरु को दक्षिणा देता है और गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है।

köpa Sildenafil Citrate rhodos आज के दिन स्कूल और विद्यालयों में यह दिन गुरू को सम्मानित करने का होता है। मन्दिरों में भी पूजा की जाती है, पवित्र नदियों में लोग स्नान करते हैं, जगह जगह भंडारे होते हैं का आयोजन किया जाता है। यह पर्व है अपने गुरु के स्मरण का, हमारे जीवन में उनके योगदान उन्हें धन्यवाद देने का और गुरु के बताए हुए रास्ते पर चलने का।

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