खुद पर यकीन होना क्यों जरूरी है

आज जो हमारे पास है वह कल हमारे पास नहीं होने की संभावना ही सारे भय की जड़ है। अपने बुने हुए भय के जाल से बचने की कोशिश हम जीवन भर करते रहते हैं, पूरे जीवन भागदौड़ करते हैं पर अपने बुने हुए भय के बाहर निकल नहीं पाते।

एक दिन रास्ते में सड़क के किनारे बंधे एक हाथी को देखा,उसके पैरों में रस्सी बंधी थी। यह देखकर आश्चर्य हुआ कि हाथी जैसा विशाल जानवर केवल एक छोटी सी रस्सी से बंधा था। हाथी इस बंधन को जब चाहे तब तोड़ सकता था, लेकिन वो ऐसा नहीं कर रहा था।

जब हाथी के ट्रेनर से पूछा कि तो उसने बताया एेसे हाथियों को बचपन से ही रस्सियों से बांधा जाता है। उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती कि वे इन रस्सियों को तोड़ सकें। बार-बार प्रयास करने के बाद जब ये रस्सियों नहीं टूटती तो इन्हें यकीन हो जाता है कि वे इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते और बड़े होने के बाद भी उनका यह यकीन बना रहता है इसलिए वो रस्सी तोडऩे का प्रयास ही नहीं करते हैं।

दूसरी तरफ विज्ञान का ऐसा मानना है कि भंवरे उड़ नहीं सकते, लेकिन भंवरे को लगता है कि वो उड़ सकता है, इसलिए वह लगातार कोशिश करता है और बार-बार असफल होने पर भी वह हार नहीं मानता। आखिरकार भंवरा उडऩे में सफल हो ही जाता है।

लोग हमें बताते हैं कि यह मत करो, वो मत करो, तुमसे ये नहीं होगा, वो नहीं होगा। कभी-कभी हम कोशिश भी करते हैं और अगर असफल हो गए तो हमें यकीन हो जाता है कि यह काम नहीं हो पाएगा। फिर धीरे-धीरे यही बातें हमारे विचारों और बिहेवियर को कंट्रोल करने लगती हैं और हम प्रयास करना छोड़ देते हैं।

यह सच है कि जीवन में सब कुछ हमारे हाथ में नहीं होता है पर जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है उन बातों पर ध्यान देना जो हमारे हाथ में हैं प्रयास करना ही हमारे वश में है इसलिए हमें ज्यादा सोचना छोड़कर बस प्रयास करते रहना चाहिए और खुद हर परिस्थिति में खुद पर यकीन बनाए रखना चाहिये।

भंवरा मानता है कि वह उड़ सकता है, इसलिए वह उड़ पाता है जबकि हाथी मानता है कि वह रस्सी नहीं तोड़ सकता, इसलिए वह रस्सी को नहीं तोड़ पाता है। यही बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है।

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