कुछ बातें जो बहुत कीमती हैं

एक 05 वर्ष का लड़का अपनी 3 वर्ष की छोटी बहन के साथ मेले में घूम रहा था। मेले में खिलौने की दुकान के सामने उसकी बहन रूक गई और दुकान की शेल्फ में रखी हुई एक सुंदर सी गुड़िया को निहारने लगी।

लड़का अपनी बहन का हाथ पकड़कर दुकान के अंदर जाकर काउंटर पर बैठे हुए व्यक्ति से बोला अँकल वहां जो गुडिया रखी है न वो मेरी बहन को बहुत पसंद है क्या कीमत है उस गुड़िया की? फिर उसने अपनी जेब में हाथ डालकर 5 रू. का सिक्का निकाला और कहने लगा कि अंकल मेरे पास बस इतने ही पैसे हैं, दुकानदार ने जब कोई जवाब नहीं दिया तो वह लड़का कुछ सोचते हुए अपनी बहन से बोला मुन्नी तुम यहीं रूको मैं अभी आता हूँ।

थोड़ी देर बाद वह लड़का जब वापस आया तो उसके हाथ में एक थैला था उसने आते ही थैला दुकान के काउंटर पर पलट दिया। उस थैले से निकले हुए कागज के छोटे-छोटे टुकड़े काउंटर पर बिखर गए। दुकान का मालिक जो दूर से ही यह सब देख रहा था काउंटर के पास आया और लड़के से बोला कि बेटा ये सब क्या है? लड़के ने कहा अकंल ये नये पैसे हैं जिन्हें मैंने अभी बनाया है।

दुकान का मालिक अधेड़ उम्र का एक सुलझा हुआ व्यक्ति जिसने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे थे । वह काउंटर पर बैठकर उन कागज के टुकड़ों को एेसे गिनने लगा मानो वो असली के नोट हों, उस लड़के ने उससे पूछा कि अकंल क्या पैसे अभी भी कम हैं?

दुकानदार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया नहीं बेटा ये पैसे तो गुड़िया की कीमत से भी ज्यादा हैं। एेसा कहते हुए उसने कुछ कागज के टुकड़ों को अपनी जेब में रख लिया और छोटी बच्ची को वह गुड़िया दे दी।

गुड़िया पाकर वह बच्ची खिलखिला उठी, अपनी बहन को खुश देखकर उस लड़के के चेहरे पर प्रसन्नता और सुकुन दिखने लगा उसने दुकानदार का शुक्रिया किया और अपनी बहन का हाथ पकड़कर दुकान से चला गया।

दुकान का मुनीम आश्चर्यचकित होकर यह सारा घटनाक्रम देख रहा था। जब वह छोटा लड़का और उसकी बहन वहां से चले गये तो वह मालिक के पास आया और बोला सेठजी आपने इतनी महंगी गुड़िया केवल कागज के कुछ टुकड़ों के बदले मे दे दी?

सेठजी हंसते हुए बोले मुनीम जी, हमारे लिये ये केवल कागज के टुकड़े हैं पर उस पांच साल के बच्चे के लिये उसका बहुत मूल्य है पांच साल का वह बच्चा समझता है कि कागज के इन टुकड़ों के बदले वह दुनिया में कुछ भी खरीद सकता है, इस उम्र में वो नहीं जानता, कि पैसे क्या होते हैं?

पर जब वह बडा होगा ना, और जब उसे याद आयेगा कि उसने अपने बनाए हुए कागज के टुकड़ों के बदले बहन के लिए गुड़िया खरीदकर दी थी। तब उसे मेरी याद जरुर आयेगी, और फिर वह सोचेगा कि इस दुनिया में अच्छे इंसान भी हैं ।

वह समझेगा का कि जिदंगी में कुछ बातें पैसे भी ज्यादा कीमती होती हैं, यही बात उसके अंदर सकारात्मक सोच बढानेे में मदद करेगी वह भी दूसरों की जरूरत के समय उनकी मदद करेगा और एक अच्छा इंन्सान बनने के लिये प्रेरित होगा। इस तरह यह दुनिया पहले से और बेहतर बन जाएगी।

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