कुछ तुम जैसा कुछ मुझ जैसा

यादों की थोड़ी सी मिट्टी लेकर ,
आज उनसे दो दोस्त बनाना,
कुछ तुम जैसा, कुछ मुझ जैसा।

आज दोस्तों की महफिल में,
फिर से कुछ रंग जमाना,
कुछ तुम जैसा, कुछ मुझ जैसा।

फिर तोड़कर पुतलों की मिट्टी मिला देना,
उससे फिर दो दोस्त बनाना,
कुछ तुम जैसा, कुछ मुझ जैसा।

ताकि तुम में कुछ-कुछ मैं रह जाऊँ,
और मुझ में कुछ-कुछ तुम रह जाओ,
कुछ तुम जैसा, कुछ मुझ जैसा।

आज फिर से पुरानी यादों को खोलकर,
उसमें से दो चेहरे निकालना,
कुछ तुम जैसा कुछ मुझ जैसा।

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