ऐसा लगता है जैसे जिंदगी मुझे पहचानती नहीं

ऐसा लगता है जैसे जिंदगी मुझे पहचानती नहीं,
ऐसे देखती है मानो बरसों से मुझे जानती नहीं।

नहीं है किसी से शिकायत न किसी बात का रोना है,
पत्थर की दुनिया में शीशे सा दिल तो बस एक खिलौना है।

क्या हुआ जो दूसरों से ज्यादा मैनें पाया नहीं,
बहुत धोखे खाए लेकिन दूसरों को गिराया नहीं।

खत्म नहीं हुआ है खेल कुछ हिस्सा अभी बाकी है,
चेहरे के पीछे छिपे चेहरों को अभी बेनकाब होना बाकी है।

देखो मेरा दिल अपनी बेबसी तुमसे कहता नहीं,
कहने को तो मेरा है लेकिन बिन तुम्हारे रहता नहीं।

बहुत थक गये है हम, कुछ देर और सोने दो,
थोड़ी सी रात बाकी है सुबह तो होने दो।

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