ऐसा क्या है जिसे हम रोजाना करते हैं और पछताते हैं?

अभि जब आफिस के लिए सुबह जल्दी अपने घर से निकला तब वह बढ़िया मूड में था।

आज घर छोड़ते समय वह बच्चों को चूमना और पत्नी को गले लगाना नहीं भूला।

अभि एक मुस्कुराहट के साथ आफिस पहुंचा।

थोड़ी देर बाद बॉस ने उसे केबिन में बुलाया।

बॉस ने उसे एक छोटी सी गलती के लिए दूसरे सहकर्मियों के सामने बुरी तरह अपमानित किया और दुबारा गलती होने पर नौकरी से निकाल देने की धमकी दी।

वह बास के सामने चाह कर भी कुछ बोल नहीं पाया,अपनी सीट पर आकर उसने सिर दर्द के लिए दवा ली फिर उसने

डर और घृणा में पूरे दिन काम किया।

रात में जब वह घर वापस आया तब पत्नी ने मुस्कुराहट के साथ उसका स्वागत किया और पूछा कि दिन कैसा रहा?

यह सुनकर वह जोर से चिल्लाया और खुद को अकेला छोड़ने के लिए कहा।

उसकी पत्नी उसके लिए एक कप चाय लाई, उसने इसे वॉशबेसिन में फेंक दिया।

जब बच्चों ने उसे गले लगाना चाहा लिया तो अभि ने उन्हें दूर धक्का दिया और अपने कमरे में चला गया।

उसने अपने कमरे में अकेले रात का खाना खाया,उसे खुद को शांत करने में 2 घंटे लग गए।

जब वह अंततः क्षमा मांगने के लिए बाहर गया तो उसने देखा कि उसकी पत्नी और बच्चे दूसरे कमरे में शांति से सो रहे हैं।

उसे इन निर्दोष लोगों पर काम की निराशा और झल्लाहट निकालने का बहुत अफसोस था।

वह उस रात बहुत पछतावे और भारी दिल से सोया।

उसने फैसला किया कि यह फिर कभी नहीं होगा।

अभि कितने दिनों तक अपने वादे पर कायम रह पाया यह तो पता नहीं पर ये अकेले अभि की नहीं बल्कि हम सबकी यही कहानी है।

जो लोग हमें निःस्वार्थ रूप से प्यार करते हैं या हमारे ऊपर निर्भर करते हैं, वे हमारी निराशा और क्रोध के प्रति सबसे ज्यादा शिकार होते हैं।

ये लोग हमारे माता-पिता, पति या पत्नी, भाई-बहन, सबसे अच्छे दोस्त या फिर कोई और हो सकता है।

ज्यादातर बार वे हमारे इस लापरवाह व्यवहार पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं और इसे भारी दिल से अनदेखा कर देते हैं।

बेहतर होगा यदि हम अपनी नकारात्मकता को स्वयं तक सीमित कर इन लोगों को नकारात्मकता से दूर रखें और उन्हें एक सुंदर जीवन देने पर ध्यान दें।

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